महाभारत कालीन अतीत की स्मृतियाँ सहेजे है गढ़मुक्तेश्वर कार्तिक मेला: मिनी-कुंभ का स्वरूप
(मनोज कुमार अग्रवाल -विभूति फीचर्स) पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गढ़मुक्तेश्वर में कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाला प्रसिद्ध गंगा स्नान पर्व और मेला महाभारत कालीन अतीत से जुड़ा हुआ है। अपनी सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक महत्व के कारण यह मेला देश और दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान बन चुका है। आज इस मेले ने 'मिनी-कुंभ' का विशाल स्वरूप ले लिया है, जो 10 किलोमीटर से अधिक क्षेत्रफल में फैला है।
जिले के प्रभारी मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने इस मेले के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि कार्तिक गंगा मेला केवल स्नान तक ही सीमित नहीं, बल्कि एकता, भाईचारा, सांस्कृतिक विरासत और स्वदेशी का प्रतीक है, जिससे देश के विकास को नई दिशा मिलती है।

पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व
दिल्ली से लगभग 100 किमी दूर गंगा के निचले तट पर स्थित गढ़मुक्तेश्वर में यह स्नान पर्व अनादिकाल से चला आ रहा है।
| युग/काल | पौराणिक कथाएँ और तथ्य |
| द्वापर युग (महाभारत काल) | महाभारत युद्ध के बाद, भगवान श्रीकृष्ण के निर्देश पर सम्राट युधिष्ठिर ने कौरवों और पांडवों के वीर योद्धाओं की आत्मा की शांति के लिए यहाँ तर्पण किया था। |
| प्राचीन नाम | शिवपुराण के अनुसार, गढ़मुक्तेश्वर का प्राचीन नाम 'शिववल्लभ' था। |
| गणों की मुक्ति | पुराणों के अनुसार, भगवान शिव ने यहीं महर्षि दुर्वासा के श्राप से अपने जय और विजय नामक गणों को पिशाच योनि से मुक्ति दिलाई थी, इसलिए इसका नाम 'गणमुक्तिश्वर' पड़ा, जो बाद में लोक उच्चारण से गढ़मुक्तेश्वर हो गया। |
| त्रेता युग | शिव पुराण के अनुसार, इसी क्षेत्र में गंगा किनारे खाण्डवी वन था। भगवान परशुराम ने यहीं एक शिवलिंग स्थापित किया था, जिसके आसपास के क्षेत्र का नाम शिव वल्लभ पुर पड़ गया। |
| इंद्रप्रस्थ से जुड़ाव | त्रेता युग का खांडवी वन द्वापर युग में खांडव वन और बाद में खांडवप्रस्थ, जो फिर इंद्रप्रस्थ बना, के नाम से अस्तित्व में आया। पांडवों ने यहीं अपना नया राज्य स्थापित किया था। |
| तर्पण का अनुष्ठान | सम्राट युधिष्ठिर ने कार्तिक शुक्ल अष्टमी को गौ पूजन किया, कार्तिक एकादशी (देवोत्थान एकादशी) से चतुर्दशी तक यज्ञ किया और पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करके तर्पण किया था। |
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा: 'मिनी-कुंभ' का आयोजन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की है कि इस साल ऐतिहासिक गढ़मुक्तेश्वर मेले को 'मिनी-कुंभ' के रूप में आयोजित किया जाएगा। यह मेला उत्तर प्रदेश की गहरी आस्था, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक विरासत का जीता-जागता प्रतीक है और यह 5 नवंबर तक चलेगा।
-
श्रद्धालुओं का अनुमान: इस मेले में करीब 50 लाख श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है।
-
सुरक्षा और व्यवस्था पर जोर: मुख्यमंत्री ने हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर और अमरोहा के तिगरी मेले की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने यातायात प्रबंधन, सुरक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य सुविधाओं, पीने के पानी और प्रकाश व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया।
-
सुरक्षा उपाय: श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए सभी गंगा घाटों पर एनडीआरएफ और एसडीआरएफ टीमों की तैनाती, सीसीटीवी, ड्रोन निगरानी, बचाव नौकाओं और हेल्पलाइन केंद्रों की स्थापना का निर्देश दिया गया है।
-
स्वच्छता और पर्यावरण: सीएम योगी ने मेले को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के संदेशों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया और सिंगल-यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया।
मेले का मुख्य स्नान 5 नवंबर को होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं, ताकि मेला हर कीमत पर अप्रिय घटना से रहित संपन्न हो।
