नही जूझना पड़ेगा आक्सीजन की समस्या से वैज्ञानिकों ने की बड़ी खोज 

नही जूझना पड़ेगा आक्सीजन की समस्या से वैज्ञानिकों ने की बड़ी खोज
 CSIR CMERI ने दी बड़ी राहत ऑक्सीजन अब हर जगह हो सकेगी उपलब्ध 

Covid 19 कोरोना वायरस Corona virus के बढ़ते हुए cases  में सबसे बड़ी कमी ऑक्सीजन की पाई जा रही है और मरीजों को ऑक्सीजन की सप्लाई समय से ना हो पाने के कारण पूरे देश में ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी हो गई और इस समय मेडिकल से जुड़े लोग और मरीजों को भारी दिक्कत का सामना कर सबसे ज्यादा करना पड़ा है तो वह है ऑक्सीजन की इस समय पूरा देश कोविड-19 की महामारी से गुजर रहा है और कोरोनावायरस में सबसे जरूरी अगर है तो वह है ऑक्सीजन थेरेपी ऑक्सीजन थेरेपी का मतलब यह है कि ऑक्सीजन मरीज को उस समय दिया जाना जब उसका ऑक्सीजन लेवल काफी कम हुआ जा रहा है यह बहुत बड़ी समस्या देश की है जिससे इस देश में निपटने के पूरा देश लगा हुआ है लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि ऑक्सीजन की उपलब्धता जहां है वहां से जहां जरूरत है ऑक्सीजन की वहां ट्रांसपोर्टेशन की सबसे बड़ी कमी हो रही है और इसको देखते हुए रेलवे उनके द्वारा ऑक्सीजन एक्सप्रेस चलाया गया लेकिन फिलहाल अभी जहां जरूरतें हैं ऑक्सीजन की कमी अभी लगातार बनी हुई है यह अलग बात है कि आने वाले कुछ दिनों में यह समस्या दूर हो जाएगी लेकिन इन सबके बीच की तत्काल ऑक्सीजन कैसे उपलब्ध कराया जाए और आगे की तैयारी हम कैसे करें इसको देखते हुए सीएसआईआर सीएमपीआई ऑक्सीजन एनरिचमेंट की टेक्नोलॉजी विकसित की है इस टेक्नोलॉजी से यह है कि ऑक्सीजन तत्काल उपलब्ध कराया जा सकता है और इस टेक्नोलॉजी को जो ऑक्सीजन एंड रिच मैन की जो टेक्नोलॉजी है उसको हैदराबाद को उपलब्ध करा दिया गया है और इस मौके पर सी एस आई आर सी एम ई आर आई के डायरेक्टर डॉ हरीश हिरानी ने कहा कि इस यूनिट में बहुत ही आसानी के साथ में 90% से अधिक ऑक्सीजन शुद्ध रूप में 15 एलपीएम तक की सीमा में उपयोग की जाने वाली हवा की आपूर्ति कर सकता है कुल मिलाकर अगर हम इसके टेक्नोलॉजी के टम्स में ना जाए तो यह माना जा सकता है कि यह ऐसे दूरदराज क्षेत्रों में जहां पर ऑक्सीजन की जरूरत है तत्काल ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के लिए टेक्नोलॉजी विकसित कर ली गई है और इससे काफी कम हो जाएगी इस टेक्नोलॉजी के अपोलो कंप्यूटिंग लैबोरेट्रीज के जयपाल रेड्डी ने कहा कि पहला प्रोटोटाइप 10 दिनों के अंदर इसको विकसित कर लिया जाएगा जो नई टेक्नोलॉजी आजाद की गई है और मई के दूसरे सप्ताह से उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा इस समय इनके पास में जैसा कि उन्होंने दावा किया कि 300 यूनिट के आसपास उत्पादन की क्षमता है जिसे मांग के अनुरूप पूरा किया जा सकता है इस टेक्नोलॉजी में सबसे बड़ा फायदा यह है कि ऑक्सीजन कंसंट्रेटर का उपयोग करते हुए मरीज को अगर तत्काल ऑक्सीजन की उपलब्धता वही करा दी जाए जहां उसको समस्या हो रही है तो उसके बाद में हो सकता है कि उस को अस्पताल ले जाने की आवश्यकता पड़े ही नहीं और वेंटिलेटर पर जाने की समस्या भी काफी कम हो सकती है .

जिस तरीके से देश इस समय ऑक्सीजन की समस्या से जूझ रहा है ऐसे में यह नई टेक्नोलॉजी जो विकसित की गई है उससे यह माना जा सकता है कि आने वाले दिनों में समस्याएं काफी कम हो सकती हैं क्योंकि अभी जिस तरीके से साइंटिस्ट लोगों का और जानकार लोगों का कहना है कि अभी तीसरा स्क्रीन बाकी है जो जून से सितंबर के बीच में भी आ सकता है तो ऐसे में मेडिकल की सुविधाओं की पूरी उपलब्धता और पूरी तैयारी सरकार और मेडिकल से संबंधित लोगों की होनी चाहिए कि जहां भी मेडिकल की सुविधाएं हैं वहां कम से कम ऑक्सीजन की समस्या ना उपलब्ध हो और ऑक्सीजन की उपलब्धता कराने के लिए नई टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा सकता है।

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