अंधविश्वास को दूर करने के लिए क्या करना चाहिए? Andhvishwas Ko Dur Karne Ke Upay

andhvishwas ko kaise khatm karen

भारत में अंधविश्वास, बिल्ली रास्ता काटने का वैज्ञानिक कारण, Andh vishwas se kaise bache

Andhvishwas Kya Hota Hai?

अंधविश्वास और विज्ञान​​​​

हम सभी ने कभी न कभी अंधविश्वास के बारे में सुना, पढ़ा या देखा होगा। और अंधविश्वास, सदियों से एक ऐसी प्रथा चली आ रही है, जिसकी कोई वजह भी नहीं है। लेकिन बस लोग इन प्रथाओं को मानते चले आ रहे हैं, क्यूंकि जब एक छोटा बच्चा अपने परिवार और समाज में जिन परंपराओं को, जिन मान्यताओं को बचपन से देखता है, तो वो भी उन सब चीज़ों को मानने लगता है। और जो यह अंधविश्वास है, वह उसके दिमाग में इतना गहरा असर छोड़ देता है कि वो पूरी लाइफटाइम इन सब अंधविश्वासों से बाहर नहीं निकल पाता। बता दे की अंधविश्वास ज्यादातर कमजोर मनोविज्ञान और कमजोर मानसिकता वाले  लोगों में देखने को मिलता है। और जो लोग जीवन में असफल हो जाते हैं वो अधिकतर अंधविश्वास में विश्वास करने लगते हैं, और वो ऐसा मान लेते हैं की अंधविश्वास को मानने में ही उनको सफलता मिल जाएगी। और ये अंधविश्वास केवल अशिक्षित लोग ही नहीं, बल्कि यह काफी शिक्षित, उच्च आय वर्ग और विकसित देशों के लोगों में भी देखने को मिल जाता है। अंधविश्वास समाज और धर्म के हिसाब से अलग-अलग तरह के होते हैं।और बहुत तरह के अन्धविश्वास हमें समाज में देखने को मिल जाते हैं। जिसमे से कुछ अच्छे और कुछ बुरे अन्धविश्वास माने जाते हैं। 

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Andhvishwas ko kaise dur karen?

अंधविश्वास को दूर करने के लिए क्या करना चाहिए

तो आज हम आपको सबसे पहले उन अन्धविश्वास के बारे में बताएंगे, जिन्हे करना समाज में अच्छा माना जाता है। जिसमे सबसे पहला नाम आता है नज़र बट्टू का यानी की घरों के बाहर या दुकान में मिर्च और नीबू लगाना। बता दें की उत्तर भारत और पाकिस्तान में नींबू को बहुत शुभ माना जाता है और बहुत सारे अनुष्ठान में इसका प्रयोग किया जाता है। लोगों का मानना है कि ऐसा करने से बुरी आत्माएं दूर होती हैं। और इस गाठ-बन्धन का नाम नज़र-बट्टू होता है। जबकि इसके पीछे की वजह बहुत पुरानी है दरअसल पहले के समय में कीटनाशक दवाएं नहीं होती थीं और क्यूंकि नीम्बू में एसीटिक एसिड पाया जाता है जो कीटाणुओं को पनपने से रोकता है, जिसकी वजह से लोग पहले नीम्बू और मिर्च का प्रयोग करते थे जिसे आज से समय लोगों ने अलग ही रूप दे दिया..... इसके बाद किसी अनुष्ठान के उपहार में एक रुपय जोड़ना भी भारत में काफी प्रचलित है और कुल रूपये में एक रुपय और जोड़ने को बहुत शुभ माना जाता है।इसके पीछे कई कारण हैं, कुछ लोग मानते हैं कि इस्से किसमत चमकती है, कुछ लोगों के लिये ये बड़ों का आशीर्वाद, और कुछ लोग इसे जिंदगी के नय पड़ाव की शुरुआत मानते हैं। और कुछ लोगों का कहना है कि एक रुपय बढ़ाने से कुल का भाग करना कठिन हो जाएगा। वहीँ अगर एक रूपये ना बढ़ाये जाएँ तो कुल के दो बराबर भाग किये जा सकते है और इसे अशुभ माना जाता है। इसलिए, शुभ कामों में ये काफी प्रचलित है । 

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Andhvishwas ko dur karne ke upay

अंधविश्वास को दूर करने में विज्ञान का योगदान

इसके बाद नदी में सिक्के फेंकने वाली एक प्रथा को आज भी बहुत लोग मानते हैं और ऐसा करते भी हैं उनका ऐसा मानना है की नदी में सिक्के फेंकने से सफ़लता मिलती है। जबकि इसका कारण यह है कि पहले के समय में सिक्के पीतल के हुआ करते थे। और जो पीतल होता है वो पानी को स्वच्छ रखकर किटानु ख़त्म करता है। उस वक्त लोगों को नदियों से ही पानी मिलता था। तो नदियों में सिक्के डालने से लोगों को पानी स्वच्छ मिलता था, और हमारे शरीर में भी थोड़ा पीतल जाता था। पहले लोग नदी में सिक्के डालने की सलाह देते थे । लेकिन आज के सिक्के स्टेनलेस स्टील के बने होते है। इनका नदी में कुछ भी असर नहीं होता है। ये अब सिर्फ़ एक अंधविश्वास बनकर रह गया है । 
दुनिया में अगर कभी भी कोई बाहर जाता है तो उन्हें शुभ यात्रा या हैप्पी जर्नी कहना आम बात है।  लेकिन यहां इतना काफी नहीं है, भारत में लोगों का कहना है, की अगर यात्रा के समय कोई व्यक्ति किसी मुर्दे को ले जाते देख ले तो उसका सफर अच्छा जायेगा, या फिर हाथी को देखना भी शुभ माना जाता है, इसके साथ ही एक गाय और बछड़ा साथ देखना लोग अच्छा मानते हैं, यात्रा शुरू करने से पहले दही खाना, या अपनी शकल पानी में देख लेना, ये सारी चीजों का यात्रा शुरू होते समय होना बहुत शुभ मानते है और लोगों को लगता है की ऐसा होने पर, वो जिस काम के लिए जा रहे हैं उसमे उनको सफलता मिलेगी। 
साथ ही जब भी कुछ नया लिया जाता है तो उसकी शुरुआत पूजा करके या भगवान का नाम लेकर ही शुरू की जाती है। जब भी लोग लोग नया घर या फिर नई गाडी लेते है तो उसके लिए पूजा करते है और नारियल को तोडते है और पूजा के समय नारियल को तोड़ना भी बहुत सामान्य हो गया है।  जिसका कोई मतलब नहीं होता है । 

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भारत में अंधविश्वास
Andh vishwas se kaise bache?

अब ये सारी बातें जो मैंने आपको बताई, इस अन्धविश्वास को लोग सकारात्मक ऊर्जा के रूप में मानते है यानि की वो किसी भी अच्छे काम में इस सब चीज़ों की शुरुआत करते हैं लेकिन इसके साथ ही कुछ बुरे अन्धविश्वास भी प्रचलित हैं जिन्हे करने से या होने मात्र से लोग बहुत अपशगुन मानते हैं। जैसे की सूर्य डूबने के बाद सफाई करना भारत के अनेक अन्धविश्वासो में से एक है, लोगों के मुताबिक ऐसा करना हमारे जीवन में दुर्भाग्य लाता है। लेकिन इस अन्धविश्वास के पीछे कारण क्या है इसे जानने में कोई दिलचस्पी नहीं रखता। बस हमारे पूर्वजों ने हमे बता दिया और हम भी उस चीज़ को फॉलो करने लगे, बिना ये जाने हुए की इन चीज़ों की शुरुआत कहाँ और कैसी हुई। चलिए हम आपको बताते हैं दरअसल पहले के ज़माने में प्रकाश के स्त्रोत अच्छे नहीं थे। और अँधेरे में सफाई करते समय अगर कुछ गलती से गिर भी जाता था तो, लोग धूल के साथ उसे भी फेंक देते थे।और कीमती चीज़ों के खोने के दर की वजह से अँधेरे में सफाई करने के लिए मना किया जाता था । साथ ही भारतीय पुराणो के अनुसार नाग को कभी रक्षक और  कभी विध्वंसक के रूप में जाना जाता है देश के कई क्षेत्रों में इनकी पूजा भी होती है क्यूंकि कुछ लोगों के मुताबिक इनके पास जादुई मणि होती है और कुछ का यह मानना है कि नाग दूध पीते है जिसकी वजह से नाग को दूध पिलाया जाता है जबकि दूध सापों की सेहत के लिए काफी खतरनाक होता है और दूध के सेवन से सांप को निमोनिया या उसकी जान भी जा सकती है । 
कुछ संस्क्रितियों में कांच का टूटना शुभ माना जाता है और कुछ में अशुभ। लेकिन भारत में इसे अपशगुन माना जाता है खास कर किसी अच्छे काम से पहले। कहते हैं कि कांच तोड़ने वाले को सात साल तक असफलता मिलेगी। ऐसा भी माना जाता है कि अगर शीशा अपने आप गिरकर टूट जाए तो उस घर में किसी की मृत्यु निश्चित है। और इस चीज़ का काफ़ी विवरण भी है।मान्यता है की शीशे में हमारे आत्मा को कब्ज करने की ताकत मॉजूद है। इसीलिए उसका टूट्ना का मत्लब है हमारा, आत्मा से अलग होना। समय के साथ ये विश्वास कांच के अंधविश्वास में बदल गया। एक और रीज़न यह है कि पहले कांच बहुत महंगा था, इसिलिए बच्चों को उससे दूर रखने के लिए ऐसी कहनियाँ बनाई गई हो। और यह भी हो सकता है कि टूटे कांच से किसी को चोट ना लगे। इसलिए ऐसी अफ्वाहे फैलाई गई हो । 

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Kya 13 number ashubh hota hai?

बिल्ली रास्ता काटने का वैज्ञानिक कारण

आज के समय में जो सबसे बड़ा अन्धविश्वास है जिससे समाज का हर दूसरा युवा पीड़ित है वो ये की बिल्ली का रास्ता काटना बहुत बड़े अपशगुन का संकेत है।  जिस कारण बिल्ली के रास्ता काटने पर अक्सर लोग रास्ते में रुक जाते हैं। जबकि सच ये है की पहले के समय में लोग बैलगाड़ी की सवारी करते थे। और क्यूंकि जो बिल्ली होती है वो चीते की प्रजाति की है और रात में उसकी आँखे बहुत चमकदार होती हैं तो जब लोग बैलगाड़ी से कहीं जाते थे और रात में अचानक बिल्ली के सामने आने से और उसकी आँखों की रौशनी की वजह से बैल असंतुलित हो जाते थे, जिससे कई बार दुर्घटनाएं हो जाती थीं और तभी से बिल्ली के रास्ते में आने की घटना प्रचलित हो गई । 
इसके साथ ही काफ़ी लोग 13 अंक को बहुत अशुभ मानते हैं। और यह अंधविश्वास बहुत ज्यादा माना जाता है। जैसे की पार्टी में 13 लोगों का होना , घर या गाड़ी का नंबर 13 होना, ये सब अपशगुन है। और कुछ बड़े होटल या हॉस्टल में 13 नंबर कमरा ही नहीं होता है 12 के सीधे 14 होता है । जिसका कोई रीज़न ही नहीं है। कहते हैं की ईसा मसीहा के आखिरी खाने पर उनको मिलाकर 13  लोग थे, और उन में से एक उनका विश्वासघाती निकला। इसके अलावा महीने के तेरहवें दिन पर कफ़ी दुर्घतनाएँ भी हो गईं। जिससे यह अंधविश्वास और भी ज्यादा गहरा हो गया। लेकिन यह सिर्फ़ इत्त्फाक है। जिसका कोई सइंटिफ़िक रीज़न नहीं है । 
इसके आलावा जब कोई घर से निकल रहा हो तब उससे यह पूछकर टोकना कि कहा जा रहे हो, ऐसा करना भी हमारे समाज में अपशगुन है। ऐसा करने से जिस काम के लिए बाहर जाना था वो खराब हो जाएगा। इसी विश्वास के कारण लोग कहते हैं कि घर से निकलते समय किसी को कभी टोकना नहीं। घर से निकलने से पहले छीकना नहीं । छीक आने पर बोला जाता है कि बैठकर पानी पीना लेना चाहिए वरना काम बिगड़ जाएगा। लेकिन अगर वहीँ 2 बार छीके तो ऐसा कुछ नहीं होगा  

billi ke raste katne se kya hota hai

Superstition Happen in India

विज्ञान अंधविश्वासों से बचना कैसे सिखाता है?

हम सब ने कभी न कभी यह सुना होगा कि रात में नाखून काटना अच्छा नहीं होता है । इस अंधविश्वास के पीछे का रीज़न पता है आपको। वो ये है की नाखुन काटने के बाद सफ़ाई करते समय कुछ कीमती चीज़ें कूड़े में जा सकती हैं । क्यूंकि पहले बिजली की समस्या बहुत थी, तो रात में नाखुन गिर सकते है और पैर में चुब सकते है। इस वजह से यह अंधविश्वास सामने आया । 
वहीँ मासिक धर्म के समय लड़कियों और महिलाओं का मंदिर में प्रवेश वर्जित होता है। साथ ही पूजा करना और भगवान की मूर्ति के सामने दीपक, धूपबत्ती या अगरबत्ती जलाना मना होता है, क्योंकि ऐसा मानते हैं कि मासिक धर्म के दौरान महिला अपवित्र होती है, जबकि यह अंधविश्वास के अलावा कुछ भी नहीं है, क्योंकि मासिक धर्म एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है जैसे सांस लेना, दिल का धड़कना, भोजन करना आदि। 
हमारे समाज में बहुत सारे लोग मंगलवार को बाल नहीं कटवाते हैं और  न ही दाढ़ी बनवाते हैं। मंगलवार को भगवान हनुमान का दिन माना जाता है। भगवान हनुमान के शरीर पर बाल अधिक मात्रा में होते हैं। जिसकी वजह से लोग मंगलवार के दिन बाल कटवाने एवं दाढ़ी बनाने से बचते हैं, जबकि यह सही नहीं है। यह सिर्फ अंधविश्वास  है। अंधविश्वास से बचने के लिए आवश्यकता है अपने मन, अपने दिमाग, सोच और मनोविज्ञान को मजबूत करने की। अक्सर लोग, सुनी-सुनाई बातों के आधार पर अंधविश्वासी होते हैं।

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कभी बिल्ली के रास्ता काटने पर उस रास्ते से बाहर जाकर देखिए, आप पर किसी तरह का कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसी तरह अन्य अंधविश्वासों पर भी प्रयोग करके देखिए, आप अपने आप इन अंधविश्वासों से बाहर निकल आएंगे। और अगर आपके साथ इन अंधविश्वासों पर प्रयोग करते समय कोई अनहोनी होती है, तो यह महज एक संयोग ही होगा। इसमें कोई सच्चाई नहीं होगी, अगर कोई आपसे कहता है कि इन अंधविश्वासों में सच्चाई है, तब आप उससे कहिए कि वह इन अंधविश्वासों की सच्चाई को साबित करके दिखाए। अपने अंधविश्वास से संबंधित विश्वास को छुड़ाना बहुत मुश्किल होता है, और यह एक कड़वी सच्चाई है।

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