सूर्य ग्रहण क्यों लगता है इसका क्या कारण है | Surya Grahan kaise lagta hai?

surya grahan kyo hota hai


surya grahan kyun lagta hai?

सूर्य ग्रहण में क्या क्या वर्जित है?

by supriya singh

सूर्यग्रहण या चंद्र ग्रहण का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में एक बहुत बड़े महायुद्ध की तस्वीर सी घूमने लगती है. क्यूंकि हम  बचपन से सुनते चले आ रहे हैं की सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य भगवान राक्षशों से वध करते हैं. और उस समय वो बहुत बड़े संकट के बीच में होते हैं. लेकिन क्या सच में ऐसा ही होता है .

सूर्य ग्रहण का क्या मतलब होता है?

वैसे जो सूर्य ग्रहण है, ये तो सदियों से लगते आ रहा है. और ये आपको दुनिया के किसी भी देश में देखने को मिल जायेगा. लेकिन अभी भी बहुत लोगों के मन में ये सवाल रहता है की सूर्य ग्रहण है क्या, और क्या इससे मानव जीवन भी प्रभावित हो सकता है . तो चलिए आपको बताते हैं की आखिर क्यों सूर्य ग्रहण इतनी चर्चाओं में रहता है और असल में सूर्य ग्रहण होता क्यों हैं. अगर हम इसे आसान भाषा में कहें, तो सूर्य और पृथ्वी के बीच में जब चंद्रमा आ जाता है, तो उस समय चंद्रमा के पीछे सूर्य का जो बिंब है, वो कुछ समय के लिए पूरी तरह से ढक जाता है या कहें की छिप जाता है. तो ये जो प्रोसेस है, इसी को सूर्य ग्रहण लगना कहते है. और जब पृथ्वी और सूर्य के बीच में चंद्रमा  आता है, तो उस समय पृथ्वी पर रोशनी नहीं पहुच पाती है. जिसकी वजह से उतने समय के लिए पृथ्वी में दिन के उजाले में भी अंधकार हो जाता है. वहीँ वैज्ञानिकों का कहना है की जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी तीनों एक सीधी रेखा में होते हैं, तभी सूर्य ग्रहण लगता है.

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सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य में कौन से परिवर्तन होते हैं?

अब ये समझ में आ गया की, सूर्य ग्रहण क्यों लगता है. लेकिन शायद ही ये बहुत कम लोग जानते होंगे, की सूर्य ग्रहण कितने प्रकार का होता है. अगर आपको ऐसा लगता है की सूर्य ग्रहण तो सिर्फ एक प्रकार का होता है. तो आप गलत हैं, क्यूंकि सूर्य ग्रहण एक नहीं बल्कि तीन प्रकार के होते हैं. जिसमे पूर्ण सूर्य ग्रहण, आंशिक सूर्य ग्रहण और वलयाकार सूर्य ग्रहण होता है. अब इनके अंतर को थोड़ा डिटेल में समझेंगे. जैसे की पूर्ण सूर्यग्रहण जब लगता है तो पृथ्वी का एक भाग पूरी तरह से अंधेरे में बदल जाता है. और इस क्रिया में चंद्रमा, पृथ्वी के सबसे ज्यादा नज़दीक होता है.  साथ ही आपको ये भी बता दें कि पूर्ण सूर्यग्रहण हर 100 साल में सिर्फ एक बार होता है. और जो अगला पूर्ण सूर्यग्रहण होने वाला है. वो 8 अप्रैल, 2024 को लगेगा...... और जो आंशिक सूर्यग्रहण है, उसमे चंद्रमा पृथ्वी के एक हिस्से को पूरी तरह से ढक देता है. इसके बाद जो सूर्यग्रहण है. वो तब होता है जब चंद्रमा, पृथ्वी से दूर होता है उस समय वलयाकार सूर्य ग्रहण की स्थिति बनती है. इस दौरान चंद्रमा, सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता. लेकिन इस क्रिया के दौरान सूर्य जो है, वो रिंग आफ फायर जैसा देखने में लगता है और आकार भी उसका छोटा हो जाता है. अब आपको ये भी जानना जरुरी है की सूर्य ग्रहण लगने के दौरान क्या-क्या सावधानियां बरतनी जरुरी होती हैं.

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सूर्य ग्रहण पड़ने पर क्या क्या नहीं करना चाहिए?

जैसे की सूर्य ग्रहण के तीनों प्रकार में आप  कभी भी आँखों में किसी उपकरण का इस्तेमाल किये बिना सूरज को डायरेक्ट न देखें. और  अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो आपके लिए खतरनाक भी हो सकता है. क्यूंकि नंगी आखों से अगर आप सूरज को देखते हैं. तो आपके रेटिना में जलन या आप अंधे भी हो सकते हैं. अब आप सोच रहे होंगे की डायरेक्ट सूरज को देखने में क्या प्रॉब्लम है. तो आपको बता दें कि उस समय सूर्य से उत्सर्जित खतरनाक पराबैंगनी किरणें निकलती है.  जो सीधे आपके रेटिना में मौजूद उन कोशिकाओं को नष्ट करती हैं. जिनका काम रेटिना की सूचनाएं मस्तिष्क तक पहुंचाना है. इसके आलावा और भी कुछ चीज़े हैं जिनमे आपको सूर्यग्रहण के दौरान सावधानी बरतने की जरुरत है. जैसे की सूर्य ग्रहण के दौरान आपको पूजा-पाठ नहीं करनी चाहिए . और सूर्य ग्रहण के समय खाना बनाना और खाना नहीं चाहिए.  इसके साथ गर्भवती महिलाएं जो हैं, वो घर से बाहर बिलकुल न निकलें.  ग्रहण के समय कोई भी शुभ कार्य न करें . सूतक काल के समय  यात्रा नहीं करनी चाहिए. इसके साथ ही सूर्य ग्रहण के दौरान आप अपने अराध्‍य देव का मंत्र जाप जरूर करें. इसके साथ ही आपको एक और महत्वपूर्ण बात बता दे की, केवल अमावस्या को ही लगता है.  हिंदू धर्म में, सूर्य ग्रहण को राहु और केतु के प्रभाव से जोड़ा जाता है. वहीँ इस्लाम धर्म में, सूर्य ग्रहण को ईश्वर की शक्ति का प्रतीक माना जाता है. सूर्य ग्रहण एक प्राकृतिक घटना है जो की एक साल में कई बार होती है. और यह एक महत्वपूर्ण घटना है जिसका वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों में विशेष महत्व है.

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