भारत में समान नागरिक संहिता क्यों आवश्यक है | What Is The Uniform Civil Code In Hindi?
 

uniform civil code kya hai

UCC Kya Hai Hindi
संविधान की धारा 44 क्या है?
भारत में किस राज्य में समान नागरिक संहिता है?

आज हम आपको एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय के बारे में बताने जा रहे हैं. जिसे (UCC) यूनिफॉर्म सिविल कोड या समान नागरिक संहिता कहते हैं. तो सबसे पहले आपको बताते हैं, की यूनिफॉर्म सिविल कोड क्या होता है? और इसका मतलब क्या है? 

संविधान की धारा 44 क्या है? uniform civil code ka matlab kya hai

आपको बता दें की इस कानून के अंतर्गत देश में सभी धर्मों और समुदायों के लिए एक सामान, यानि की बराबर का कानून होना. चाहे वो किसी भी धर्म या जाति से क्यों न हो. यानी की हर धर्म, जाति, लिंग के लिए एक जैसा कानून. अगर सिविल कोड लागू होता है तो विवाह, तलाक, बच्चा गोद लेना और संपत्ति के बंटवारे जैसे कई विषयों में सभी नागरिकों के लिए एक जैसे नियम होंगे.और अगर आसान भाषा में कहें, तो देश में सभी धर्मों, समुदाओं के लिए एक जैसा कानून होगा. और यह संहिता संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत आती है. जिसमे बताया गया है कि राज्य पूरे भारत में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता बनाने का प्रयास करेंगे. और ये जो समान नागरिक संहिता का मुद्दा है.  ये एक सदी से भी ज्यादा समय से राजनीतिक नरेटिव और बहस का केंद्र बन गया है.
अब अगर हम बात करें भारतीय जनता पार्टी की, तो समान नागरिक संहिता लागू करना भाजपा के चुनावी घोषणापत्र का शुरुआत से ही एक हिस्सा रहा है. और बीजेपी ने अभी हाल फ़िलहाल में कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले समान नागरिक संहिता का वादा किया था. और उधर, उत्तराखंड जैसे राज्य अपनी समान नागरिक संहिता तैयार करने की प्रक्रिया में हैं. बता दें की भाजपा 2014 में सरकार बनने के बाद से ही UCC को संसद में कानून बनाने पर जोर दे रही है. और 2024 में लोकसभा चुनाव आने से पहले इस मुद्दे ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है. आपकी जानकारी के लिए बता दें भाजपा सत्ता में आने पर UCC को लागू करने का वादा करने वाली पहली पार्टी थी और यह मुद्दा उसके 2019 के लोकसभा चुनाव घोषणापत्र का  एक अहम हिस्सा था.

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भारत में समान नागरिक संहिता क्यों आवश्यक है?UCC Full Form in Hindi

लेकिन कुछ ऐसी भी पार्टियां हैं जो समान नागरिक सहिंता का विरोध करते नज़र आ रही हैं. जैसे की AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, 'की भारत के प्रधानमंत्री भारत की विविधता और इसके बहुलवाद को एक समस्या मानते हैं. इसलिए, वो ऐसी बातें कहते हैं। शायद भारत के प्रधानमंत्री को अनुच्छेद 29 के बारे में नहीं पता होगा . इसलिए वो  UCC के नाम पर देश से उसकी बहुलता और विविधता को छीनना चाहते हैं. इसके अलावा 30 से ज्यादा आदिवासी संगठनों ने भी UCC का विरोध करते हुए आशंका जताई कि इससे उनके प्रथागत कानून कमजोर हो जाएंगे. आदिवासी जन परिषद के अध्यक्ष प्रेम साही मुंडा ने कहा की, 'हम विभिन्न वजहों से UCC का विरोध करते हैं. हमें डर है कि इससे आदिवासी कानून प्रभावित हो सकते हैं.  जो कानून आदिवासी भूमि की रक्षा करते हैं. अगर आपके मन में भी ये सवाल आता है की क्या समान नागरिक संहिता भारत के संविधान का हिस्सा है. तो आपकी जानकारी के लिए बता दें, की हाँ. UCC को संविधान में शामिल किया गया है. और संविधान के अनुच्छेद 44 में बताया गया है कि सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करना सरकार का दायित्व है. और सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने कई फैसलों में समान नागरिक संहिता लागू करने की बात कही है. वहीँ 1985 में शाहबानो के मामले में फैसला देते हुए भी सुप्रीम कोर्ट ने समान नागरिक संहिता की रूपरेखा बनाने की बात कही थी. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में एक मामले में कहा था, की ईसाई कानून के तहत ईसाई महिलाओं को अपने बच्चे का 'नैचुरल गार्जियन' नहीं माना जा सकता, जबकि अविवाहित हिंदू महिला को बच्चे का 'नैचुरल गार्जियन' माना जाता है. उस समय भी सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि समान नागरिक संहिता एक संवैधानिक जरूरत है. 

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समान नागरिक संहिता के फायदे और नुकसान क्या है?

अब सवाल ये उठता है की अगर भाई समान नागरिक सहिंता देश के लिए इतना जरुरी है तो इसे लागू करने में सबको क्या समस्या है इसमें तो सब एकसमान  हो जायेंगे और किसी में कोई भेदभाव भी नहीं रहेगा। तो वो अभी तक इसलिए संभव नहीं हो पाया। क्यूंकि आजादी के 75 साल में एक समान नागरिक संहिता और पर्सनल लॉ में सुधारों की मांग होती रही है. और समान नागरिक संहिता को लागू करने में कई चुनौतियां हैं. जिसमे से धार्मिक संगठनों का विरोध बहुत बड़ी समस्या है. क्यूंकि कुछ लोगों का कहना है की भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है. यहां सभी धर्मों को स्वतंत्र रूप से मानने, अभ्यास करने और प्रचार करने का अधिकार है. इसे संविधान के अनुच्छेद 25 में शामिल किया गया है. और UCC का विरोध करने वालों का मानना है कि सभी धर्मों के लिए समान कानून के साथ धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार और समानता के अधिकार के बीच संतुलन बनाना मुश्किल होगा. साथ ही समान नागरिक संहिता का विरोध करने वाले कहते हैं कि इससे सभी धर्मों पर हिंदू कानूनों को लागू कर दिया जाएगा. अब बात आती है की अगर UCC लागू कर दिया जाता है तो क्या-क्या बदलाव हो सकते हैं. तो बता दें की UCC के लागू होते ही हिंदू , मुसलमानों, ईसाइयों और पारसियों को लेकर सभी वर्तमान कानून निरस्त कर दिए जाएंगे. वहीँ बीजेपी का कहना है कि समान नागरिक संहिता लागू होने से देश में एकरूपता आएगी. और अगर UCC लागू होता है, तो पूरे देश में सभी धर्मों के लिए विवाह, तलाक, बच्चा गोद लेने और संपत्ति के बंटवारे जैसे विषयों में सभी नागरिकों के लिए एक जैसे नियम रहेंगे.

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भारत में किस राज्य में समान नागरिक संहिता है?what is the uniform civil code in hindi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समान नागरिक संहिता की वकालत करते हुए विरोधियों से सवाल किया कि दोहरी व्यवस्था से देश कैसे चलेगा. प्रधानमंत्री ने कहा की, “हम देख रहे हैं समान नागरिक संहिता के नाम पर लोगों को भड़काने का काम हो रहा है. एक घर में परिवार के एक सदस्य के लिए एक कानून हो, दूसरे के लिए दूसरा, तो क्या वह परिवार चल पाएगा.  फिर ऐसी दोहरी व्यवस्था से देश कैसे चल पाएगा, हमें याद रखना है कि भारत के संविधान में भी नागरिकों के समान अधिकार की बात कही गई है.
हालांकि, देश में एक शहर ऐसा भी है जहां 150 साल पहले UCC लाया गया था। जी हाँ वर्तमान में, गोवा भारत का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां समान नागरिक संहिता है।इसके अलावा उत्तराखंड भारत की आजादी के बाद पहला ऐसा राज्य बनने जा रहा है जहाँ 5 फरवरी 2024 को यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी की  समान नागरिक संहिता का बिल पास किया जायेगा। इसके बाद लगातार कुछ और राज्यों में भी समान नागरिक सहिंता के लागू होने के आसार नज़र आ रहे हैं.

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