What Is Front Of Pck Labelling In India? | FSSAI के नये ड्राफ्ट और प्रोसेस्ड पैकेज्ड फूड की पैकेजिंग और लेबलिंग को लेकर क्यों गरमाया चर्चा का बाजार | Food Packaging Laws And Regulations In India

What Is Front Of Pck Labelling In India

What Are Labelling Laws In Food Packaging खाद्य पैकेजिंग में लेबलिंग कानून क्या हैं?
What Is The Front-Of-Pack Nutrition Labeling Scheme फ्रंट-ऑफ़-पैक पोषण लेबलिंग योजना क्या है?
What Is The Packaging And Labelling Act फूड लेबलिंग क्या है?

क्या आप भी प्रोसेस्ड पैकेज्ड फूड खाते हैं। तो क्या कभी आपने इसके पैकेट के पीछे पलट कर देखा कि आप जो खाना खाने जा रहे हैं उसमे क्या क्या पड़ा हुआ है या उसकी न्यूट्रिशनल वैल्यू क्या है। एक चिप्स का पैकेट क्या कभी आपने जानना चाहा कि उसमें कितना फैट, कार्बोहाइड्रेट या अन्य सामग्री क्या है, ये आपने शायद ही कभी देखा होगा। आज के समय में भारतीज बाजार में प्रोसेस्ड फूड और पैकेट वाले खाने की भरमार है। फ़ूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया के पैकेजिंग और लेबलिंग रेगुलेशन 2011 के मुताबिक़, भारत में बिकने वाले हर प्री-पैक्ड प्रोसेस्ड फूड के पैकेट पर उसके पौष्टिक तत्वों की पूरी जानकारी होनी चाहिए। 

क्या है फ्रंट-ऑफ-पैक पोषण लेबलिंग योजना और ये क्यों है इतना महत्वपूर्ण। 

अब सवाल ये आता है कि जब इन पैकेट वाले खाने के पीछे पहले से खाने की सामग्री संबंधी सूचना दी जा रही है तो आखिर क्यों पैकेज्ड फूड के पैकेट में आगे सामग्री की जानकारी लिखना चर्चा का विषय बना हुआ है और इसे लेकर क्यों पैकेज्ड फूड इंड्रस्ट्री विरोध कर रही हैं। इसके लिए पैकेट पर जानकारी होती तो है लेकिन कहा जा रहा है कि जानकारी पीछे होने के कारण शायद ही कोई इस पर ध्यान देता होगा। साथ ही लोगों का ये भी कहना है कि यह कई बार इतना छोटा होता है कि पढ़ने पर समझ ही नहीं आया। एक और कारन ये भी है कि भारत में कई क्षेत्र ऐसे भी हैं जहां लोगों को न इंग्लिश आती है न ही हिंदी। 

What Is New At Fssai Regulations: एफएसएसएआई नियमों में नया क्या है?

दरअसल, FSSAI के ड्राफ्ट के मुताबिक़ अब खाने-पीने के पैकेट पर Front-Of-The-Pack Nutritional Labelling (FOPNL) लगाना अनिवार्य किया जा सकता है। मतलब अब खाने के पैकेज्ड आइटम में लिखा होगा कि उसमें कितना नमक, चीनी और फैट है। इसी के आधार पर उस फूड की 1 से 5 तक रेटिंग भी की जायेगी। इस रेटिंग के अनुसार इसपर गुड फूड या नॉट गुड फूड के लेबल लगे होंगे। जिससे जिन्हे पढ़ने में किसी प्रकार की दिक्कत भी हो तो वो भी समझ जाएं की खाने में किस प्रकार की सामग्री हो सकती है और इसमें जो पोषक तत्व हैं वो उनके लिए कितने अच्छे या हानिकारक हैं। मुख्यतः इसका मक़सद ये है कि खरीदारों को पता हो कि खाने की न्यूट्रिशनल वैल्यू कितनी है। यह ठीक वैसे ही कार्य करता है जैसे सिगरेट के पैकेट पर लेबलिंग की जाती है यह कितना नुकसानदायक है, जिससे ग्राहकों को इससे होने वाले नुकसान का पता रहे और वो अपनी सूझ-बुझ का इस्तेमाल करके अपनी इच्छा अनुसार पैकेट लेते हैं।  

FSSAI Packaging And Labelling Regulations 2022

आपको बता दें कि एफ़एसएसएआई ने सरकार के सामने मसौदा यानी ड्राफ्ट पेश करने से पहले इस पूरे मामले पर जनता की राय जाननी चाही। इसके लिए उसने नवंबर 2022 में इस मसौदे को सार्वजनिक किया। जिसके बाद इस मसौदे पर काफ़ी बहस हुई और इस मुद्दे पर कई वर्षों से अलग-अलग स्तर पर परामर्श चल रहे हैं। जहां एक तरफ पैकेट फ़ूड इंडस्ट्री इस पर हामी भरने को तैयार नहीं मतलब इस ड्राफ्ट के पूरी तरह से अगेंस्ट हैं। वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञ प्रोसेस्ड पैकेज्ड फूड पर सख़्त से सख़्त मानदंडों को लेकर मांग कर रहे हैं। 

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