कुछ ख़ास आवाज़ों से क्यों होती है चिढ़ और आता है गुस्सा | Why Do I Get So Irritated With Certain Noises?

Why Do I Get So Irritated With Certain Noises?

Misophonia Causes In Hindi

Is Misophonia A MentalDdisorder?

मिसोफोनिया क्यों होता है?

क्या आपको कभी किसी के सुड़कियाँ ले लेकर चाय पीने, किसी चीज़ के रगड़ने या चप्पल घिसटने से आने वाली आवाज़ से चिढ़ हुई है। हम में से ऐसे बहुत लोग होते हैं जिन्हे दूसरों की सांस लेने की आवाज, खाना चबाने, डकार लेने की आवाज़, किसी के छीकने या फंखे चलने तक की आवाज़ से इर्रिटेशन होती है। ज्यादातर हमे ये एक सामान आदत लगती है और होती भी है। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हे इस तरह की वियर्ड आवाज़ों से गुस्सा आने लगता है और कभी-कभी ये गुस्सा इतना बढ़ जाता है कि लोग बहुत ही ज्यादा आक्रामक हो जाते हैं। 

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मेंटल डिसऑर्डर की ओर इशारा

आपको बता दें कि ये सभी लक्षण एक मानसिक बिमारी या मेंटल डिसऑर्डर की ओर इशारा करते हैं। इस मानसिक स्वास्थ्य समस्या से जुडी बिमारी का नाम है मिसोफोनिया डिसऑर्डर। यह एक ऐसी स्थिति होती हैं जिसमें व्यक्ति को कुछ खास आवाज़ों को सुनकर बहुत ही ज्यादा परेशानी या चिड़चिड़ाहट होने लगती है। 

कुछ ख़ास आवाजों से आता है गुस्सा

कुछ ख़ास आवाजों से आता है गुस्सा 

आपको बता दें कि मिसोफोनिया को सिलेक्टिव साउंड सेंसिटिव डिसऑर्डर के नाम से भी जाना जाता है। जो लोग इस प्रकार की बीमारी से पीड़ित होते हैं उन्हें कुछ खास आवाजों की वजह से गुस्सा और घबराहट होने लगती है। ऐसे लोग इन आवाज़ों से बहुत ही ज्यादा तनाव में आ जाते हैं और कई बार बाहर जाने में और लोगों से मिलने में भी उन्हें दिक्कत होने लगती है। 

पीड़ित लोगों को होती है घबराहट

पीड़ित लोगों को होती है घबराहट

ऐसे लोग जिन्हे इस तरह की आवाज़ों से बहुत अधिक गुस्सा और घबराहट होती है वे इस आवाज़ को सुनकर अपना आपा खोने लगते हैं और किसी भी अन्य चीज़ पर ध्यान नहीं लगा पाते। जिस व्यक्ति को यह ब्रेन एब्नॉर्मेलिटी होती है, उसका ब्रेन इस तरह की आवाज को तुरंत कैच कर लेता है और फिर उसका फोकस वहीं बना रहता है। कुछ मरीजों की स्थिति इतनी गंभीर होती है कि इस तरह की आवाजें सुनने पर वे अपना आपा खो बैठते आपा और आक्रामक भी हो जाते हैं।

क्यों होता है मिसोफोनिया

अभी तक मिसोफोनिया के होने का कोई सटीक कारण तो अभी तक पता नहीं चल पाया है। लेकिन एक शोध में यह पाया गया कि इस बीमारी से पीड़ित लोगों में ब्रेन का इंटीरियर इंसुलर कॉरटेक्स बहुत एक्टिव होता है। यह इंसान के दिमाग का वह हिस्सा होता है, जो भावनाओं को पैदा करने के लिए जरूरी है। इस बिमारी में डॉक्टर मरीज को अच्छी नींद, हेल्दी डाइट, हेल्दी लाइफस्टाइल, रोजाना एक्सरसाइज और तनाव के लिए थेरेपी लेने की सलाह देते हैं।

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