आखिर क्यों 1948 का ओलंपिक नंगे पैर खेली थी भारतीय फुटबॉल टीम ? | Why Indian Football Team Play Barefoot In 1948 Olympics

Indian Football Team Play Barefoot In 1948 Olympics

What Football Player Kicked Barefoot In 1948

भारतीय फुटबॉल टीम फीफा क्यों नहीं खेलती है?

1950 वर्ल्ड कप में भारत क्यों नहीं खेला?

खेल खबर: फुटबॉल देश-दुनिया के पसंदीदा खेलों में से एक है। भारत में भी फुटबॉल काफी पसंद किया जाता है, बड़ी संख्या में लोग फुटबॉल को देखते हैं। लेकिन जब भी फुटबॉल के खिलाडियों की बात आती है तो हमारे जहन में मैसी और रोनाल्डो जैसे  खिलाडियों का नाम आता है। किन्तु आखिर क्यों हम किसी भारतीय फुटबॉल खिलाड़ी के नाम को नहीं जानते। आपमें से बहुत से लोगों के मन में ये सवाल जरूर आया होगा कि आखिर क्यों भारतीय फुटबॉल टीम वर्ल्ड कप नहीं खेलती है? जिसे लेकर कई तरह की बातें आप सोशल मीडिया पर देख सकेंगे। 

1948 के ओलंपिक की क्यों वायरल हुई तस्वीर। 

1948 के ओलंपिक की क्यों वायरल हुई तस्वीर। 

कुछ समय पहले 1948 के ओलंपिक की तस्वीर सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई। इस तस्वीर में भारतीय फुटबॉल खिलाडियों को नंगे पैर देखा जा सकता है। जिसे लेकर तरह-तरह की खबरे सामने आयी, इसी की पड़ताल (Fact Check) की आप की खबर ने। हम बात करेंगे 1948 के ओलंपिक की जहां भारतीय टीम नंगे पैर खेली थी। क्या इसकी वजह गरीबी थी, संसाधनों की कमी या कोई और संस्थागत समस्या इसकी वजह बनी थी। 

खिलाडियों ने क्यों नहीं पहने जूते? 

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार इसका कारण खुद खिलाड़ी थे। भारतीय फुटबॉल टीम के ग्यारह में से आठ भारतीय खिलाड़ियों ने स्वेच्छा से जूते पहनने से इनकार कर दिया क्योंकि वे नंगे पैर खेलने में अधिक सहज थे। इसके लिए उन्होंने 1948 के द इंडियन एक्सप्रेस एक संग्रहित संस्करण की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि खिलाड़ी नंगे पैर खेलने में सहज थे और भले उस समय खिलाड़ी लंदन ओलंपिक्स के शुरूआती दौर में ही बाहर हो गए लेकिन ब्रिटिश मीडिया में उनकी काफी प्रशंसा हुई। 

1950 के फुटबॉल वर्ल्ड कप से क्यों बाहर रही भारतीय फुटबॉल टीम?

अब बात करते हैं कि आखिर क्यों भारतीय फुटबॉल टीम ने 1950 में वर्ल्ड कप नहीं खेला था? लल्लनटॉप की रिपोर्ट के अनुसार 1950 में भारतीय फुटबॉल टीम को वर्ल्ड कप खेलने का न्योता दिया गया था जिसमें भारतीय टीम ने हिस्सा लेने से मना कर दिया था। कारण ये था कि उस समय तक ओलंपिक्स को वर्ल्ड कप से बड़ा समझा जाता था। भारतीय टीम ने 1952 में ओलंपिक्स में हिस्सा लिया लेकिन प्रिलिमनरी राउंड में ही युगोस्लाविया से हार कर बाहर हो गयी।
 

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