BRICS Summit 2026: भारत की अर्थव्यवस्था को कैसे मिलेगा फायदा? इन 5 क्षेत्रों में खुल सकते हैं नए अवसर

BRICS Summit 2026: How will India's economy benefit? New opportunities could open up in these 5 sectors.
 
BRICS Summit 2026: भारत की अर्थव्यवस्था को कैसे मिलेगा फायदा? इन 5 क्षेत्रों में खुल सकते हैं नए अवसर

नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने जा रहा है। भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और उसकी अध्यक्षता का विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखा गया है।

BRICS का यह सम्मेलन सिर्फ कूटनीतिक लिहाज से महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि व्यापार, निवेश, डिजिटल भुगतान, ऊर्जा और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में भारत के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर सम्मेलन में लिए गए फैसलों को व्यावहारिक रूप दिया जाता है तो भारतीय कारोबार और निर्यात को इसका दीर्घकालिक फायदा मिल सकता है।

1. भारतीय कंपनियों के लिए नए बाजार

BRICS के विस्तार के साथ भारत के सामने कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं तक पहुंच बढ़ाने का अवसर है। समूह में ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका के साथ मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और यूएई जैसे देश शामिल हैं।इससे भारतीय दवाइयों, इंजीनियरिंग उत्पादों, आईटी सेवाओं, कृषि उत्पादों, ऑटोमोबाइल कंपोनेंट्स और अन्य वस्तुओं के निर्यात के लिए नए बाजार विकसित करने में मदद मिल सकती है।विशेषज्ञों के अनुसार, इससे भारत को किसी एक बड़े बाजार पर अत्यधिक निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है।

2. डॉलर पर निर्भरता घटाने की दिशा में कदम

BRICS देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने और सीमा-पार भुगतान को आसान बनाने पर लगातार चर्चा हो रही है। भारत की प्राथमिकताओं में भी भुगतान प्रणालियों की इंटरऑपरेबिलिटी महत्वपूर्ण है।

रिपोर्टों के मुताबिक, भारत BRICS देशों की केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं यानी CBDC को आपस में जोड़ने की संभावना पर जोर दे रहा है, ताकि सीमा-पार भुगतान को तेज और आसान बनाया जा सके। हालांकि, तकनीकी और राजनीतिक चुनौतियां अभी मौजूद हैं।इसका फायदा व्यापारियों और कंपनियों को लेनदेन की लागत और भुगतान में लगने वाले समय को कम करने के रूप में मिल सकता है।

3. विदेशी निवेश के नए रास्ते

BRICS में खाड़ी क्षेत्र की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की मौजूदगी भारत के लिए निवेश के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों के साथ सहयोग बढ़ने से इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग में निवेश के अवसर बढ़ सकते हैं।

भारत BRICS की अपनी अध्यक्षता के दौरान स्टार्टअप, इनोवेशन, मजबूत सप्लाई चेन और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है।अगर इस सहयोग से वास्तविक निवेश समझौते और परियोजनाएं जमीन पर आती हैं, तो रोजगार और औद्योगिक उत्पादन को भी फायदा हो सकता है।

4. ऊर्जा सुरक्षा को मिल सकता है सहारा

भारत की अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा की स्थिर और भरोसेमंद आपूर्ति बेहद महत्वपूर्ण है। BRICS के विस्तारित समूह में रूस, सऊदी अरब, यूएई और ईरान जैसे प्रमुख ऊर्जा उत्पादक देश शामिल हैं।इन देशों के साथ लंबे समय के ऊर्जा समझौते, निवेश और आपूर्ति श्रृंखला में सहयोग भारत को ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने में मदद कर सकते हैं। मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों में यह मुद्दा और भी महत्वपूर्ण हो गया है।

5. मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन को बढ़ावा

दुनिया की कंपनियां अपनी सप्लाई चेन को अधिक विविध बनाने पर जोर दे रही हैं। ऐसे समय में भारत के लिए BRICS देशों के साथ औद्योगिक सहयोग बढ़ाना महत्वपूर्ण हो सकता है।इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, फार्मा, सेमीकंडक्टर, ऊर्जा उपकरण और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग से भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूती मिल सकती है।भारत की BRICS अध्यक्षता में resilient supply chains और innovation को प्रमुख आर्थिक एजेंडे में शामिल किया गया है।

क्या BRICS की अपनी कॉमन करेंसी आएगी?

BRICS की साझा मुद्रा को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है, लेकिन फिलहाल ऐसी कोई तत्काल कॉमन करेंसी लॉन्च होने की संभावना नहीं दिखती। मौजूदा फोकस स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और सीमा-पार भुगतान व्यवस्था को बेहतर बनाने पर अधिक है।भारत द्वारा CBDC को जोड़ने की पहल का उद्देश्य भी डॉलर को तुरंत हटाना नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय भुगतान को अधिक तेज और सुविधाजनक बनाना बताया जा रहा है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है BRICS Summit?

भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान 25 से अधिक शहरों में 350 से ज्यादा बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। सरकार के अनुसार इन गतिविधियों का उद्देश्य आर्थिक एवं वित्तीय सहयोग के साथ राजनीतिक-सुरक्षा और लोगों के बीच संपर्क को मजबूत करना है।

इसलिए BRICS Summit 2026 का असली आर्थिक महत्व केवल सम्मेलन के दौरान होने वाली घोषणाओं में नहीं, बल्कि उसके बाद होने वाले व्यापार समझौतों, निवेश, डिजिटल भुगतान सहयोग, ऊर्जा साझेदारी और औद्योगिक परियोजनाओं में दिखाई देगा।अगर इन पहलों को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है तो BRICS भारत के लिए सिर्फ एक कूटनीतिक मंच नहीं, बल्कि नए बाजार, निवेश और आर्थिक सहयोग का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।

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