Gold Import Falls: कस्टम ड्यूटी 15% होने का दिखा बड़ा असर, भारत में सोने का आयात 70% लुढ़का; जानें सराफा बाजार का नया समीकरण
भारतीयों का सोने के प्रति अटूट प्रेम किसी से छिपा नहीं है, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में उठाए गए कड़े कदमों ने देश के गोल्ड मार्केट का पूरा समीकरण बदल दिया है। सोने और चांदी पर आयात शुल्क (इम्पोर्ट ड्यूटी) बढ़ाए जाने के महज एक महीने के भीतर ही देश में विदेशों से आने वाले सोने के आयात में 70 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, टैक्स बढ़ने से पहले जहां भारत में हर महीने औसतन 75 से 100 टन सोना आयात किया जा रहा था, वहीं अब यह मात्रा घटकर सिर्फ 25 से 30 टन रह गई है। इस ऐतिहासिक फैसले का सीधा असर अब थोक आयातकों से लेकर स्थानीय ज्वेलर्स और आम खरीदारों पर दिखने लगा है।
6% से बढ़ाकर सीधे 15% की गई थी कस्टम ड्यूटी
दरअसल, केंद्र सरकार ने देश के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) को नियंत्रित करने और विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षा के लिए 13 मई 2026 को एक बड़ा कदम उठाया था। सरकार ने सोने और चांदी पर प्रभावी कस्टम ड्यूटी को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर सीधे 15 प्रतिशत कर दिया था।
टैक्स में इस दोगुनी से भी ज्यादा हुई बढ़ोतरी के कारण विदेशों से सोना मंगाना बेहद महंगा सौदा हो गया है। परिणामस्वरूप, घरेलू सर्राफा बाजार के बड़े ज्वेलर्स और संस्थागत आयातकों ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों से अपनी खरीदारी को काफी सीमित कर दिया है।
आयात का वजन घटा, लेकिन वैश्विक कीमतों के कारण बिल बढ़ा
इस पूरे घटनाक्रम का एक दिलचस्प और विरोधाभासी पहलू भी सामने आया है। भले ही मात्रा (वजन) के लिहाज से सोने का आयात 70 प्रतिशत तक घट गया हो, लेकिन वैश्विक बाजार में सोने की आसमान छूती कीमतों (Global Gold Prices) के चलते मूल्य (Value) के लिहाज से भारत का आयात बिल बढ़ गया है:
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मई का आंकड़ा: मई महीने में भारत का गोल्ड इम्पोर्ट मूल्य के आधार पर सालाना (Year-on-Year) आधार पर 34 प्रतिशत बढ़कर 3.41 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
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अप्रैल-मई 2026-27: चालू वित्त वर्ष के शुरुआती दो महीनों (अप्रैल-मई) के दौरान यह मूल्यगत आधार पर 60.14 प्रतिशत की भारी उछाल के साथ 9.04 अरब डॉलर के स्तर पर दर्ज किया गया।
आखिर सरकार को क्यों उठाना पड़ा यह सख्त कदम?
चीन के बाद भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता (Consumer) देश है। यहां मुख्य रूप से शादियों, सांस्कृतिक त्योहारों और पारंपरिक आभूषणों के लिए सोने की मांग हमेशा उच्च स्तर पर बनी रहती है।
चूंकि भारत अपनी सोने की कुल आवश्यकता का एक बहुत बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए देश के कुल आयात बिल में अकेले सोने की हिस्सेदारी 5 प्रतिशत से भी अधिक है। सोना खरीदने के लिए भारत का एक विशाल विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserve) देश से बाहर चला जाता है। इसी अवांछित खर्च पर अंकुश लगाने और घरेलू अर्थव्यवस्था को स्थिरता देने के उद्देश्य से, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का यह कड़ा फैसला लिया था।
आगामी हफ्तों में क्या होगा असर?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि टैक्स बढ़ने के कारण अल्पावधि (Short-term) में सोने की तस्करी (Smuggling) की आशंकाएं भी बढ़ सकती हैं, जिस पर सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर है। हालांकि, आयात में आई इस भारी कमी से आने वाले समय में देश के व्यापार घाटे को कम करने में सरकार को बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।
