Gold Silver Price Crash: सोने-चांदी की कीमतों में हाहाकार! सोना ₹2100 तो चांदी ₹7300 धड़ाम, ETF में भी मची भारी बिकवाली

Gold and Silver Price Crash: Turmoil in precious metal markets! Gold plunges by ₹2,100 and silver by ₹7,300; massive sell-off in ETFs as well.
 
Gold Silver Price Crash
Gold Silver Market Update: वैश्विक और घरेलू सर्राफा बाजार में मंगलवार को भारी बिकवाली का दौर देखने को मिला, जिससे सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। एक ही कारोबारी सत्र में घरेलू बाजार में सोना करीब ₹2,100 प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया, वहीं चांदी की कीमतों में ₹7,300 प्रति किलोग्राम की भारी गिरावट आई। इस ताबड़तोड़ बिकवाली का सीधा असर गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ (ETF) पर भी पड़ा और वे भारी नुकसान के साथ लाल निशान में बंद हुए।

बाजार का मौजूदा भाव: रिकॉर्ड स्तर से नीचे फिसलीं कीमती धातुएं

मंगलवार को कमोडिटी बाजार में सोने-चांदी की चाल कुछ इस तरह रही:

  • सोना (Gold Price): सोने की कीमतों में 1.42% की गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही 24 कैरेट 10 ग्राम सोने का भाव करीब ₹2,100 टूटकर ₹1,46,010 के स्तर पर आ गया। कारोबार के दौरान यह निचले स्तर पर ₹1,45,510 तक भी चला गया था।

  • चांदी (Silver Price): चांदी की स्थिति और भी गंभीर रही। इसमें 3% से अधिक की बड़ी गिरावट आई, जिससे प्रति किलो चांदी का दाम ₹7,300 कम होकर ₹2,27,010 पर आ गया। दिन के कारोबार में चांदी ₹2,25,666 के निचले स्तर को भी छू चुकी थी।

  • अंतरराष्ट्रीय बाजार: वैश्विक मोर्चे पर भी ऐसा ही रुख दिखा, जहां सोना करीब 2% और चांदी 5% से ज्यादा टूट गई।

सोने-चांदी में गिरावट के 3 सबसे बड़े कारण

बाजार विश्लेषकों और ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) के अनुसार, इस बड़ी गिरावट के पीछे मुख्य रूप से तीन वैश्विक कारक जिम्मेदार हैं:

1. अमेरिकी फेडरल रिजर्व का सख्त रुख और ब्याज दरों का डर

गिरावट का सबसे बड़ा ट्रिगर अमेरिकी सेंट्रल बैंक (फेड) की ओर से मिल रहे संकेत हैं। फेडरल रिजर्व महंगाई को नियंत्रित करने के लिए साल 2026 में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। बैंक ऑफ अमेरिका ने अनुमान जताया है कि इस साल तीन बार ब्याज दरें बढ़ाई जा सकती हैं, जिसकी शुरुआत सितंबर से होने की आशंका है।

बाजार का गणित: जब ब्याज दरें बढ़ती हैं और सरकारी बॉन्ड्स पर रिटर्न अच्छा मिलता है, तो निवेशक सोने जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों से पैसा निकालकर बॉन्ड्स में लगाते हैं। इसी वजह से गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ में भारी प्रॉफिट बुकिंग (मुनाफावसूली) देखी जा रही है।

2. मजबूत होता अमेरिकी डॉलर

हाल के दिनों में डॉलर इंडेक्स में आई मजबूती ने सोने की चमक को फीका कर दिया है। डॉलर के मजबूत होने से अन्य विदेशी मुद्रा वाले खरीदारों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से सोना-चांदी खरीदना महंगा हो जाता है। इसका सीधा असर वैश्विक मांग पर पड़ता है और कीमतें नीचे आ जाती हैं।

3. भू-राजनीतिक तनाव में कमी (Geopolitical De-escalation)

सोने को संकट के समय 'सेफ हेवन' (सुरक्षित निवेश) माना जाता है। वैश्विक तनाव के दौरान निवेशक सोने में पैसा सुरक्षित रखते हैं। हालांकि, हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर सकारात्मक प्रगति हुई है। भू-राजनीतिक जोखिम कम होने से निवेशकों का डर दूर हुआ है और वे सुरक्षित निवेश छोड़कर वापस रिस्की एसेट्स (जैसे शेयर बाजार) का रुख कर रहे हैं।

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