ITR Filing Deadline 31 July: 31 जुलाई के बाद भरा इनकम टैक्स रिटर्न तो ढीली होगी जेब! जानें कितनी लगेगी पेनल्टी और क्या होंगे बड़े नुकसान
ITR Filing Deadline 2026: एसेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 के लिए बिना किसी पेनल्टी के इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है। यदि आपने अभी तक अपना रिटर्न दाखिल नहीं किया है, तो अंतिम क्षणों की तकनीकी दिक्कतों से बचने के लिए तुरंत यह काम निपटा लें।
31 जुलाई की डेडलाइन मिस होने पर आयकरदाताओं को केवल लेट फीस ही नहीं, बल्कि बकाया टैक्स पर भारी ब्याज और कई अन्य वित्तीय अधिकारों के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
डेडलाइन छूटने पर भी भरा जा सकता है रिटर्न (Belated ITR)
यदि आप किसी कारणवश 31 जुलाई तक ITR दाखिल करने से चूक जाते हैं, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। आयकर कानून के प्रावधानों के तहत आप 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न (Belated ITR) दाखिल कर सकते हैं। हालांकि, इसके लिए आपको जुर्माना और ब्याज का भुगतान करना होगा।
कितनी लगेगी लेट फीस? (Section 234F)
इनकम टैक्स एक्ट की धारा 234F के तहत लेट फीस करदाता की कुल वार्षिक आय पर निर्भर करती है:
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5 लाख रुपये से अधिक आय पर: यदि आपकी कुल सालाना आय 5 लाख रुपये से अधिक है, तो आपको ₹5,000 की लेट फीस देनी होगी।
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5 लाख रुपये या उससे कम आय पर: यदि आपकी आय 5 लाख रुपये तक ही है, तो लेट फीस अधिकतम ₹1,000 होगी।
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टैक्स फ्री स्लैब वाले टैक्सपेयर्स: जिनकी कुल आय टैक्स योग्य न्यूनतम सीमा से कम है और वे केवल स्वेच्छा से ITR भर रहे हैं, उन पर कोई लेट फीस लागू नहीं होगी।
बकाया टैक्स पर लगेगा 1% प्रति माह ब्याज (Section 234A)
यदि आपकी टैक्स देनदारी बनती है और आपने 31 जुलाई तक ITR फाइल नहीं किया, तो धारा 234A के अंतर्गत बकाया टैक्स राशि पर 1 अगस्त 2026 से प्रति माह 1% की दर से साधारण ब्याज लागू हो जाएगा। यह ब्याज तब तक जुड़ता रहेगा जब तक आप पूरे टैक्स का भुगतान नहीं कर देते।
समय पर ITR न भरने के 4 बड़े नुकसान
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घाटे को कैरी फॉरवर्ड करने का अधिकार खत्म: शेयर बाजार, फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) या बिजनेस में हुए नुकसान को भविष्य के कैपिटल गेंस से एडजस्ट करने का अवसर हाथ से निकल जाएगा।
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टैक्स रिफंड में देरी और ब्याज का घाटा: यदि आपका अधिक TDS कट चुका है, तो रिफंड की प्रक्रिया में देरी होगी और उस पर मिलने वाले ब्याज का नुकसान हो सकता है।
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ओल्ड टैक्स रिजीम का ऑप्शन नहीं मिलेगा: बिलेटेड रिटर्न दाखिल करते समय टैक्सपेयर डिफ़ॉल्ट रूप से नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) के तहत आ जाएंगे, वे पुरानी कर व्यवस्था (Old Tax Regime) का विकल्प नहीं चुन पाएंगे।
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इनकम टैक्स नोटिस का जोखिम: 31 दिसंबर तक भी रिटर्न न भरने पर आयकर विभाग धारा 271F के तहत कानूनी नोटिस या अन्य सख्त कार्रवाई कर सकता है।
आयकर पोर्टल पर अंतिम दिन (31 जुलाई) सर्वर लोड और भारी ट्रैफिक की वजह से आने वाली समस्याओं से बचने के लिए आज ही अपना ITR दाखिल करें। समय पर रिटर्न फाइल करना न केवल आपको पेनाल्टी से बचाता है, बल्कि आपके क्रेडिट स्कोर और फाइनेंशियल ट्रैक रिकॉर्ड को भी बेहतर बनाता है।
