'आज की कमाई नहीं, कल की ताकत देखिए': गौतम अदानी ने साझा किया 'विकसित भारत 2047' और इंफ्रास्ट्रक्चर का विजन
मुंबई में आयोजित केयर एज रेटिंग्स (CareEdge Ratings) इंफ्रास्ट्रक्चर लैंडस्केप कार्यक्रम के वार्षिक समिट में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए अदानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदानी ने 'विकसित भारत 2047' के निर्माण के लिए बुनियादी ढांचे और क्रेडिट रेटिंग मॉडल पर अपना विस्तृत विजन प्रस्तुत किया।
अदानी ने स्पष्ट किया कि भारत को क्रेडिट रेटिंग के मानकों में ढील देने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की वास्तविक आर्थिक, रणनीतिक और भविष्योन्मुखी क्षमता को आंकने के लिए अपने नजरिए को व्यापक करने की जरूरत है।
मानक कम नहीं, नजरिया बड़ा होना चाहिए’
गौतम अदानी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत को रेटिंग के मानकों को कमजोर करने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय इंफ्रास्ट्रक्चर की वास्तविक उपयोगिता और भविष्य में उसकी क्षमता को समझने वाला व्यापक मूल्यांकन मॉडल विकसित किया जाना चाहिए।
उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में देखने का सुझाव दिया। उनके अनुसार, मौजूदा सुविधाओं के स्थान पर बनाई जाने वाली परियोजनाओं के लिए पारंपरिक रेटिंग मॉडल उपयोगी हो सकते हैं। वहीं, विकास को गति देने वाली परियोजनाओं के मूल्यांकन में उनसे बनने वाले व्यापक आर्थिक इकोसिस्टम को भी शामिल किया जाना चाहिए। इसके अलावा ‘प्लेटफॉर्म इंफ्रास्ट्रक्चर’ ऐसी परियोजनाएं हैं, जो आगे चलकर नए बाजार, उद्योग और क्षमताओं के विकास का आधार बनती हैं।
मुंद्रा पोर्ट का उदाहरण
गौतम अदानी ने गुजरात के मुंद्रा पोर्ट का उदाहरण देते हुए बताया कि एक समय अपेक्षाकृत कम विकसित समुद्री क्षेत्र में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट बाद में पोर्ट के साथ-साथ रेल, लॉजिस्टिक्स, बिजली और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े बड़े इकोसिस्टम में बदल गया।
उनका कहना था कि यदि ऐसी परियोजनाओं का मूल्यांकन केवल मौजूदा मांग या अनुमानित कैश फ्लो के आधार पर किया जाए तो उनकी भविष्य की वास्तविक क्षमता सामने नहीं आ पाएगी।
अदानी ने कहा कि यदि देश केवल आज की दिखाई देने वाली मांग को ध्यान में रखकर निर्माण करेगा तो वह भविष्य में पैदा होने वाले अवसरों से पीछे रह सकता है।
विझिंजम से बदल सकती है भारत की समुद्री क्षमता
उन्होंने केरल के विझिंजम इंटरनेशनल सीपोर्ट का भी उल्लेख किया। अदानी के मुताबिक, भारत लंबे समय तक ट्रांसशिपमेंट के लिए दूसरे देशों के प्रमुख बंदरगाहों पर निर्भर रहा, जबकि विझिंजम की भौगोलिक स्थिति वैश्विक समुद्री मार्गों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि किसी परियोजना का महत्व केवल उसके शुरुआती वित्तीय प्रदर्शन से नहीं बल्कि उससे मिलने वाले रणनीतिक और दीर्घकालिक लाभ से भी समझा जाना चाहिए।
खावड़ा प्रोजेक्ट को AI और मैन्युफैक्चरिंग से जोड़ा
गुजरात के कच्छ क्षेत्र में स्थित खावड़ा के बड़े रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट का जिक्र करते हुए अदानी ने कहा कि इसे केवल बिजली उत्पादन की परियोजना के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा।
उनके अनुसार, बड़े पैमाने पर उपलब्ध स्वच्छ ऊर्जा भविष्य में डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और अन्य ऊर्जा-आधारित उद्योगों के विकास की नींव बन सकती है।
उन्होंने कहा कि AI भले ही सॉफ्टवेयर आधारित तकनीक दिखाई देती हो, लेकिन इसके संचालन के लिए बड़े डेटा सेंटर, पर्याप्त बिजली, कूलिंग सिस्टम, ट्रांसमिशन नेटवर्क और जमीन जैसी बुनियादी सुविधाओं की आवश्यकता होगी।
रेटिंग में छूट नहीं, मूल्यांकन में विस्तार की मांग
अदानी ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग कमजोर परियोजनाओं को आसान रेटिंग देने या क्रेडिट मानकों में कमी करने की नहीं है। उन्होंने कहा कि रेटिंग एजेंसियों को अपनी स्वतंत्रता और कठोर मानकों को बनाए रखते हुए ऐसे मॉडल विकसित करने चाहिए, जो बड़े प्लेटफॉर्म इंफ्रास्ट्रक्चर की भविष्य की क्षमता का भी आकलन कर सकें।
उन्होंने सुझाव दिया कि नए क्रेडिट फ्रेमवर्क में पारंपरिक वित्तीय संकेतकों के साथ-साथ इकोसिस्टम से मिलने वाले अतिरिक्त लाभ, रणनीतिक महत्व और भविष्य में जुड़ने वाली औद्योगिक क्षमताओं को भी जगह मिलनी चाहिए।
भारत से दुनिया के लिए नया क्रेडिट मॉडल विकसित करने की अपील
गौतम अदानी ने CareEdge से ‘इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म इंफ्रास्ट्रक्चर’ के लिए एक व्यापक क्रेडिट फ्रेमवर्क विकसित करने की दिशा में नेतृत्व करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत में तैयार होने वाला ऐसा मॉडल अन्य विकासशील देशों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है।
उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर का वास्तविक मूल्य केवल उससे मिलने वाले प्रत्यक्ष वित्तीय रिटर्न तक सीमित नहीं होता। किसी परियोजना की बड़ी उपलब्धि यह भी है कि वह कितनी नई आर्थिक गतिविधियों, उद्योगों और राष्ट्रीय क्षमताओं को जन्म देती है।
अपने संबोधन के समापन पर गौतम अदानी ने विकसित भारत के संकल्प को लेकर कविता की पंक्तियां भी प्रस्तुत कीं। उन्होंने कहा कि ऐसा भारत, जहां नागरिकों के सपनों को उड़ान मिले, आत्मविश्वास देश की पहचान बने और सामर्थ्य व संकल्प राष्ट्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाएं, वही वास्तव में विकसित, समर्थ और महान भारत होगा।
