15 सितंबर 2026 से अमेरिकी स्टूडेंट वीजा नियमों में बड़ा बदलाव जानें भारतीय छात्रों पर क्या पड़ेगा असर?
यदि आप अमेरिका में उच्च शिक्षा प्राप्त करने की योजना बना रहे हैं या वर्तमान में वहां पढ़ाई कर रहे हैं, तो आपके लिए यह एक बेहद महत्वपूर्ण खबर है। अमेरिकी सरकार 15 सितंबर 2026 से अपने छात्र वीजा नियमों में कड़े संशोधन लागू करने जा रही है। इन नए नियमों का प्राथमिक उद्देश्य वीजा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना, बेहतर निगरानी रखना और इसके संभावित दुरुपयोग को रोकना है।
हालाँकि, इस नए वीजा ढांचे से भारतीय छात्रों सहित सभी अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों को अधिक प्रशासनिक प्रक्रियाओं और सख्त नियमों का सामना करना पड़ सकता है।
'Duration of Status (D/S)' व्यवस्था खत्म: अधिकतम 4 साल का स्टे
अब तक अमेरिका में F-1 और J-1 वीजा धारक छात्रों को 'Duration of Status (D/S)' का लाभ मिलता था, जिसके तहत वे बिना किसी निश्चित समय सीमा के अपने पूरे शैक्षणिक पाठ्यक्रम (चाहे वह कितने भी वर्षों का हो) तक अमेरिका में रह सकते थे।
15 सितंबर से लागू नया नियम:
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छात्र वीजा पर रहने की अधिकतम अवधि 4 वर्ष तय कर दी गई है।
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यदि किसी छात्र का पाठ्यक्रम (जैसे पीएचडी, रिसर्च प्रोग्राम या इंटीग्रेटेड मास्टर्स) 4 साल से अधिक का है, तो उसे आगे पढ़ाई जारी रखने के लिए 'यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज' (USCIS) से अलग से विस्तार (Extension) और अनुमति लेनी होगी।
भारतीय छात्रों पर सबसे गहरा प्रभाव
अमेरिका में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों में भारतीय विद्यार्थियों की संख्या सबसे अधिक है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में 3.6 लाख से अधिक भारतीय छात्र अमेरिकी विश्वविद्यालयों में नामांकित थे। इनमें से अधिकांश छात्र STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) तथा शोध आधारित पीएचडी पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत हैं।
चार साल की समय-सीमा लागू होने के कारण इन छात्रों को अब अतिरिक्त कागजी कार्रवाई, आवेदन शुल्क और सरकारी मंजूरी की जटिल प्रक्रियाओं से गुजरना होगा।
ग्रेस पीरियड घटाकर 30 दिन किया गया
नए प्रावधानों के तहत पढ़ाई पूरी करने के बाद मिलने वाले 'ग्रेस पीरियड' (Grace Period) में कटौती की गई है:
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पहले छात्रों को कोर्स खत्म होने के बाद देश में रुकने या अगला कदम तय करने के लिए 60 दिनों की छूट मिलती थी।
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अब इसे घटाकर 30 दिन कर दिया गया है।
इस 30 दिन की अवधि के भीतर ही छात्रों को या तो अमेरिका छोड़ना होगा, वीजा स्थिति बदलनी होगी, किसी अन्य विश्वविद्यालय में ट्रांसफर लेना होगा या फिर 'ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग' (OPT) की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
कोर्स या मेजर बदलना अब और चुनौतीपूर्ण
नए नियमों के अनुसार, विश्वविद्यालय बदलने, मेजर (मुख्य विषय) बदलने या पढ़ाई की अवधि बढ़ाने जैसे फैसलों में शैक्षणिक संस्थानों का सीधा अधिकार कम हो जाएगा। इन सभी बदलावों के लिए अब सीधे अमेरिकी इमिग्रेशन अधिकारियों की औपचारिक मंजूरी अनिवार्य होगी।
यूनिवर्सिटीज ने दी समय से पहले लौटने की सलाह
कोलंबिया यूनिवर्सिटी सहित कई प्रमुख अमेरिकी शैक्षणिक संस्थानों ने छुट्टियों या काम से बाहर गए अपने अंतरराष्ट्रीय छात्रों को 15 सितंबर 2026 से पहले अमेरिका वापस लौटने की सलाह दी है, ताकि नई प्रणाली लागू होने के समय होने वाली किसी भी प्रशासनिक परेशानी या प्रवेश संबंधी बाधा से बचा जा सके।
शिक्षा जगत में चिंता का माहौल
जहां एक तरफ अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि इन बदलावों से सुरक्षा और आव्रजन व्यवस्था में सुधार होगा, वहीं कई वैश्विक शिक्षा संगठनों ने इस पर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अतिरिक्त कागजी कार्रवाई, लंबी सरकारी प्रक्रियाएं और अनिश्चितता के कारण लंबी अवधि के शोध और उच्च शिक्षा पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
