New Tax Regime: क्या डेट फंड (Debt Fund) की कमाई पर भी मिलेगा ₹12 लाख का टैक्स रिबेट? ITR फाइल करने से पहले दूर करें यह बड़ा कन्फ्यूजन
Income Tax Return (ITR) Filing 2026: बजट में नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) के तहत कुल सालाना आय पर ₹12 लाख तक की टैक्स छूट (Rebate) की घोषणा के बाद से करदाताओं के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। इनमें से सबसे बड़ा कन्फ्यूजन डेट म्यूचुअल फंड (Debt Mutual Funds) के निवेशकों को लेकर है।
फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के विकल्प के रूप में डेट फंड में निवेश करने वाले लोग अक्सर असमंजस में हैं कि क्या उनकी इस कमाई पर भी ₹12 लाख वाले रिबेट का लाभ मिलेगा? आइए, इनकम टैक्स रिटर्न भरने से पहले इस पूरे गणित और टैक्स एक्सपर्ट्स की राय को आसान भाषा में समझते हैं।
डेट म्यूचुअल फंड पर टैक्स का नया नियम
टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, 1 अप्रैल 2023 के बाद खरीदे गए उन डेट म्यूचुअल फंड्स पर टैक्स के नियम बदल चुके हैं, जिनमें घरेलू इक्विटी (Domestic Equity) की हिस्सेदारी 35% से कम होती है।
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आय में सीधा जुड़ाव: ऐसे डेट फंड्स से होने वाले मुनाफे को अब 'शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स' (STCG) माना जाता है और इसे सीधे निवेशक की नियमित सालाना आय में जोड़ दिया जाता है।
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टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स: डेट फंड की कमाई पर कोई अलग या फिक्स टैक्स रेट नहीं लगता, बल्कि यह निवेशक के मौजूदा इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार करयोग्य (Taxable) होती है।
चूंकि डेट फंड से होने वाला मुनाफा आपकी सकल कुल आय (Gross Total Income) का ही एक हिस्सा बनता है, इसलिए यदि आपकी सैलरी, बिजनेस और डेट फंड के मुनाफे को मिलाकर आपकी कुल सालाना कमाई ₹12,00,000 (₹12 लाख) या उससे कम रहती है, तो आपको नई टैक्स व्यवस्था में धारा 87A के तहत पूरा रिबेट मिलेगा। इस स्थिति में आपको डेट फंड की कमाई पर भी कोई टैक्स नहीं देना होगा।
सावधान! यहाँ फंस सकता है पेंच (टैक्स ट्रैप का जोखिम)
डेट फंड के निवेशकों को आईटीआर भरते समय एक बारीक नियम का ध्यान रखना बेहद जरूरी है, अन्यथा वे भारी टैक्स के जाल में फंस सकते हैं। इसे हम एक आसान उदाहरण से समझ सकते हैं:
उदाहरण से समझें टैक्स का गणित
| विवरण | स्थिति 'अ' (रिबेट के दायरे में) | स्थिति 'ब' (टैक्स ट्रैप में) |
| सालाना सैलरी (Annual Salary) | ₹11,30,000 | ₹11,50,000 |
| डेट फंड से मुनाफा (Debt Fund Gain) | + ₹60,000 | + ₹60,000 |
| कुल टैक्सेबल इनकम (Total Income) | ₹11,90,000 | ₹12,10,000 |
| धारा 87A के तहत रिबेट | मिलेगा (टैक्स = ₹0) | नहीं मिलेगा |
महत्वपूर्ण विश्लेषण: स्थिति 'ब' में जैसे ही कुल आय ₹12 लाख की तय सीमा को पार कर ₹12,10,000 हुई, निवेशक धारा 87A के टैक्स रिबेट के दायरे से पूरी तरह बाहर हो जाएगा। ऐसी स्थिति में उसे केवल ऊपर के ₹10,000 पर ही नहीं, बल्कि नए टैक्स स्लैब के अनुसार अपनी पूरी आय (₹12,10,000) पर टैक्स चुकाना होगा।
यदि आप इस साल अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने जा रहे हैं और आपने डेट फंड या एफडी से कमाई की है, तो अपनी कुल आय का सटीक आकलन जरूर कर लें। यदि आपकी कुल आय ₹12 लाख की सीमा के बिल्कुल करीब है, तो टैक्स प्लानिंग के जरिए इसे सीमा के भीतर रखने का प्रयास करें ताकि ₹12 लाख के रिबेट का पूरा लाभ उठाया जा सके।
