NSE IPO: देश का सबसे बड़ा आईपीओ लाने की तैयारी में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज; SEBI के पास जमा किए दस्तावेज, 30,000 करोड़ का हो सकता है साइज
भारतीय वित्तीय बाजार (Financial Market) से इस वक्त की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है। देश के प्रमुख शेयर बाजार 'नेशनल स्टॉक एक्सचेंज' (NSE) ने आखिरकार सार्वजनिक रूप से लिस्ट होने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। एनएसई ने बुधवार को अपने बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) की मंजूरी के लिए बाजार नियामक सेबी (SEBI) के पास मसौदा दस्तावेज (DRHP) दाखिल कर दिए हैं।
अनुमान लगाया जा रहा है कि अनलिस्टेड मार्केट (Unlisted Market) में एनएसई के मौजूदा वैल्यूएशन के आधार पर इस महा-आईपीओ का कुल आकार लगभग 30,000 करोड़ रुपये हो सकता है। यदि ऐसा होता है, तो यह भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बन जाएगा और अक्टूबर 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के 27,870 करोड़ रुपये के आईपीओ के ऑल-टाइम रिकॉर्ड को भी ध्वस्त कर देगा।
पूरी तरह OFS पर आधारित होगा इश्यू; शेयरहोल्डर्स बेचेंगे 6% हिस्सेदारी
सेबी के पास जमा किए गए ड्राफ्ट पेपर के मुताबिक, एनएसई का यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) पर आधारित होगा। इसका मतलब यह है कि इस आईपीओ के जरिए बाजार से कोई नया फंड नहीं जुटाया जाएगा, बल्कि एक्सचेंज के मौजूदा निवेशक और प्रमोटर अपनी हिस्सेदारी बेचकर बाहर निकलेंगे।
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कुल शेयरों की बिक्री: मौजूदा शेयरधारक सामूहिक रूप से कुल 14.89 करोड़ शेयर बेचेंगे, जो एनएसई की कुल हिस्सेदारी का लगभग 6 प्रतिशत है।
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अनलिस्टेड मार्केट में वैल्यू: वर्तमान में अनलिस्टेड मार्केट में एनएसई का कुल मार्केट वैल्यूएशन 5 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक आंका जा रहा है। एक्सचेंज के पास वर्तमान में करीब 1.8 लाख शेयरधारक मौजूद हैं।
SBI बेचेगा सबसे ज्यादा शेयर, LIC नहीं होगी शामिल
इस आईपीओ के जरिए अपनी हिस्सेदारी कम करने वाले बड़े सरकारी और वैश्विक प्रमोटरों में देश का सबसे बड़ा बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) सबसे आगे है।
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एसबीआई (SBI): आईपीओ में अपने 2.48 करोड़ शेयर बेचेगा। वर्तमान में एनएसई में एसबीआई की सीधी हिस्सेदारी 3.23% है, जबकि इसकी सहायक कंपनी एसबीआई कैपिटल मार्केट्स के पास 4.33% शेयर हैं।
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एमएस स्ट्रैटेजिक: मॉरीशस की यह लिमिटेड कंपनी 1.60 करोड़ शेयरों की बिक्री करेगी।
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अन्य प्रमुख विक्रेता: कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड (1.19 करोड़ शेयर), अरांडा इन्वेस्टमेंट्स (1.12 करोड़ शेयर), बैंक ऑफ बड़ौदा (1.10 करोड़ शेयर) और स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (1.09 करोड़ शेयर) अपनी हिस्सेदारी घटाएंगे।
एलआईसी नहीं बेचेगी हिस्सेदारी:
दिलचस्प बात यह है कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में सबसे बड़ी हिस्सेदारी (10.72 प्रतिशत) रखने वाली देश की दिग्गज सरकारी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) इस आईपीओ में अपना एक भी शेयर नहीं बेच रही है।
एक दशक पुराना को-लोकेशन विवाद सुझला, लिस्टिंग की राह हुई आसान
एनएसई की लिस्टिंग की यह योजना पिछले लगभग एक दशक (10 साल) से अलग-अलग नियामकीय और कानूनी अड़चनों की वजह से ठंडे बस्ते में पड़ी थी। इसका सबसे बड़ा कारण साल 2015-16 में सामने आया बहुचर्चित 'को-लोकेशन' (Co-location) विवाद था, जिसमें कुछ चुनिंदा ब्रोकर्स को एक्सचेंज के सर्वर और ट्रेडिंग सिस्टम तक पहले एक्सेस मिलने के गंभीर आरोप लगे थे।
1,388 करोड़ में हुआ निपटारा:
इस गतिरोध को तोड़ने के लिए एनएसई ने जून 2025 में सेबी के पास एक निपटान आवेदन (Settlement Application) दायर किया। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद, एक्सचेंज ने मामले के पूर्ण निपटारे के लिए 1,388 करोड़ रुपये के भुगतान की पेशकश की, जिसे सेबी ने स्वीकार कर लिया। जनवरी 2026 में सेबी से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) मिलने के बाद, एनएसई के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 6 फरवरी 2026 को इस आईपीओ को औपचारिक मंजूरी दे दी थी।
20 मर्चेंट बैंकर्स की फौज संभालेगी कमान
बता दें कि एनएसई ने सबसे पहले साल 2016 में करीब 10,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए सेबी के पास आवेदन किया था, लेकिन तब गवर्नेंस और को-लोकेशन चिंताओं के कारण सेबी ने इसे रोक दिया था। अब 10 साल बाद इस मेगा-आईपीओ को सफलतापूर्वक बाजार में उतारने के लिए एनएसई ने 20 बड़े मर्चेंट बैंकर्स के साथ-साथ दिग्गज कानूनी सलाहकारों (Legal Advisors) और वित्तीय मध्यस्थों की एक विशाल टीम नियुक्त की है।
