Petrol Price without Ethanol: अगर पेट्रोल में इथेनॉल न होता तो किस रेट पर बिकता तेल? सरकार ने संसद में समझाया पूरा गणित
Ethanol Blending Impact on Petrol Price: भारत में पेट्रोल की कीमतों और उसमें मिलाए जाने वाले इथेनॉल (Ethanol) को लेकर लगातार चर्चाएं होती रहती हैं। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि यदि पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग नहीं की जाती, तो आम जनता को प्रति लीटर पेट्रोल किस कीमत पर मिलता?
अब केंद्र सरकार ने संसद में इस सवाल का लिखित जवाब देते हुए पूरा गणित साफ कर दिया है। सरकार का दावा है कि इथेनॉल नीति के कारण ही वैश्विक संकटों के बावजूद देशवासियों को महंगा पेट्रोल खरीदने से बड़ी राहत मिली है।
इथेनॉल नहीं होता तो 125 रुपये लीटर तक पहुंच सकता था पेट्रोल
लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में तनाव के दौरान कच्चे तेल की कीमत लगभग 135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। ऐसी स्थिति में यदि इथेनॉल ब्लेंडिंग जैसी व्यवस्था नहीं होती, तो देश में पेट्रोल की खुदरा कीमत करीब 125 रुपये प्रति लीटर तक जा सकती थी। सरकार के अनुसार, इथेनॉल मिश्रण, कच्चे तेल की उपलब्धता और तेल विपणन कंपनियों की प्रभावी खरीद रणनीति के कारण उपभोक्ताओं को पेट्रोल लगभग 94.77 रुपये प्रति लीटर की दर पर उपलब्ध कराया जा सका।
E20 पेट्रोल को लेकर सरकार ने क्या कहा?
सरकार ने संसद में स्पष्ट किया कि E20 ईंधन (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) से वाहनों के इंजन को नुकसान पहुंचने के दावों की पुष्टि नहीं हुई है। सरकार के मुताबिक, E20 लागू करने से पहले ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM), इंडियन ऑयल और विभिन्न वाहन निर्माताओं के सहयोग से व्यापक परीक्षण किए गए। इन परीक्षणों में इंजन की क्षमता, प्रदर्शन और पुर्जों पर किसी गंभीर नकारात्मक प्रभाव के प्रमाण नहीं मिले।
करोड़ों वाहन कर रहे हैं इथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग
सरकार ने बताया कि देश में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उपयोग कई वर्षों से किया जा रहा है। वर्तमान में:
- 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन
- 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें
इथेनॉल मिश्रित ईंधन का इस्तेमाल कर रही हैं। सरकार के अनुसार, इतने बड़े पैमाने पर उपयोग के बावजूद इंजन खराब होने, जंग लगने या पुर्जों के तेजी से घिसने जैसी कोई व्यापक समस्या दर्ज नहीं हुई है।
किसानों और अर्थव्यवस्था को भी मिल रहा लाभ
सरकार का कहना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम केवल ईंधन की लागत कम करने तक सीमित नहीं है। इससे गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा मिलता है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलते हैं।
इसके अलावा, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटने से देश का विदेशी मुद्रा व्यय कम होता है और ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होती है। सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और कृषि क्षेत्र को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा.
