लाड़ली बहना को 3000 रुपये देने का वादा: हकीकत या हवा-हवाई? कैबिनेट के फैसले ने खड़े किए सवाल
पवन वर्मा | विनायक फीचर्स मध्य प्रदेश में 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने महिलाओं से वादा किया था कि सरकार बनने पर लाड़ली बहना योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि को धीरे-धीरे बढ़ाकर 3000 रुपये प्रतिमाह किया जाएगा। इस वादे के साथ भाजपा ने चुनाव में बड़ी सफलता हासिल की और सरकार बनाई। अब, 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले इस वादे को पूरा करने की दिशा में सरकार की वित्तीय तैयारी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लाड़ली बहना योजना को वर्ष 2031 तक जारी रखने के लिए 1,14,365 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई। मौजूदा लाभार्थियों की संख्या और पांच साल की अवधि के आधार पर इस राशि का औसत निकालें तो यह लगभग 1525 रुपये प्रति महिला प्रति माह बैठता है। यही गणित भाजपा के 3000 रुपये प्रतिमाह के वादे को लेकर सवाल खड़ा करता है।
1.14 लाख करोड़ की मंजूरी का क्या है गणित?
फिलहाल करीब 1.25 करोड़ महिलाएं लाड़ली बहना योजना का लाभ ले रही हैं। यदि इन्हीं लाभार्थियों को अगले 60 महीनों तक 1,14,365 करोड़ रुपये की पूरी राशि समान रूप से वितरित की जाए, तो प्रत्येक महिला के हिस्से में पांच वर्षों में करीब 91,492 रुपये आएंगे।
इसे 60 महीनों में बांटने पर औसत करीब 1525 रुपये प्रतिमाह बैठता है।वहीं, यदि 1.25 करोड़ महिलाओं को हर महीने 3000 रुपये दिए जाएं तो सरकार को प्रति माह करीब 3750 करोड़ रुपये और सालाना करीब 45,000 करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी। ऐसे में 3000 रुपये के लक्ष्य और मौजूदा कैबिनेट मंजूरी के बीच स्पष्ट वित्तीय अंतर दिखाई देता है।
मंजूरी और बजट प्रावधान में अंतर
हालांकि, केवल इस गणित के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना भी सही नहीं होगा कि सरकार 3000 रुपये का वादा पूरा नहीं कर सकती।कैबिनेट द्वारा किसी योजना को जारी रखने के लिए राशि मंजूर करना और आगामी वर्षों के बजट में वास्तविक व्यय के लिए राशि आवंटित करना अलग-अलग बातें हैं। सरकार भविष्य के बजट में इस योजना के लिए अतिरिक्त प्रावधान कर सकती है। लाभार्थियों की संख्या में बदलाव होने पर कुल वित्तीय आवश्यकता भी बदल सकती है और भुगतान राशि को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जा सकता है।इसलिए 1,14,365 करोड़ रुपये की मंजूरी को 3000 रुपये प्रतिमाह के वादे की अंतिम वित्तीय सीमा मानना उचित नहीं होगा।
1000 से 1500 रुपये तक पहुंची राशि
लाड़ली बहना योजना की शुरुआत जून 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में 1000 रुपये प्रतिमाह की सहायता से हुई थी। विधानसभा चुनाव से पहले इसे बढ़ाकर 1250 रुपये किया गया।इसके बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार ने योजना को जारी रखा और पिछले वर्ष नवंबर में मासिक सहायता राशि बढ़ाकर 1500 रुपये कर दी।इस तरह योजना की शुरुआत से अब तक राशि में 500 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जबकि भाजपा के संकल्प पत्र में किए गए 3000 रुपये के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अभी 1500 रुपये की और वृद्धि करनी होगी।
2028 के चुनाव से पहले होगी असली परीक्षा
भाजपा के 2023 के विधानसभा चुनाव के संकल्प पत्र में लाड़ली बहनों की सहायता राशि को धीरे-धीरे बढ़ाकर 3000 रुपये प्रतिमाह करने का वादा किया गया था। सरकार के पास 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले इस वादे को पूरा करने का समय है।
19 अगस्त की कैबिनेट मंजूरी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे योजना को 2031 तक जारी रखने की सरकार की प्रतिबद्धता तो स्पष्ट होती है, लेकिन मंजूर राशि का मौजूदा लाभार्थियों और 60 महीने की अवधि के आधार पर किया गया औसत 3000 रुपये प्रतिमाह के लक्ष्य से काफी नीचे है।
आगे के बजट पर टिकी नजर
यह भी संभव है कि आने वाले वर्षों में लाभार्थियों की संख्या घटे, भुगतान की राशि चरणबद्ध तरीके से बढ़े और सरकार अतिरिक्त बजटीय प्रावधान करे। इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि 3000 रुपये का वादा पूरा होगा या नहीं।
लेकिन राजनीतिक रूप से सवाल जरूर खड़ा हो गया है कि 3000 रुपये प्रतिमाह के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए सरकार आने वाले बजटों में कितनी अतिरिक्त राशि का प्रावधान करेगी।1000 रुपये से शुरू हुई लाड़ली बहना योजना अब 1500 रुपये प्रतिमाह तक पहुंच चुकी है। अगला बड़ा पड़ाव 3000 रुपये है। 19 अगस्त की कैबिनेट मंजूरी ने योजना को आगे बढ़ाने का रास्ता तो साफ किया है, लेकिन 3000 रुपये के वादे तक पहुंचने के लिए वित्तीय रास्ता अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।अब निगाह आने वाले बजटों और सरकार के अगले फैसलों पर होगी। यही तय करेगा कि 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा अपने इस बड़े चुनावी वादे को पूरा करने में कितनी सफल होती है।
