Rajesh Exports Crisis: ₹15 लाख करोड़ की वित्तीय हेराफेरी का आरोप, प्रमोटर राजेश मेहता पर SEBI का शिकंजा; LIC को भी लगा झटका
मुंबई/बेंगलुरु: भारतीय कॉर्पोरेट जगत से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। देश की जानी-मानी गोल्ड रिफाइनिंग और ज्वेलरी निर्माता कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (Rajesh Exports) और उसके चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) राजेश मेहता के खिलाफ भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक सख्त अंतरिम आदेश जारी किया है।
सेबी की शुरुआती जांच में कंपनी पर वित्तीय आंकड़ों को बड़े पैमाने पर बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने और कॉर्पोरेट गवर्नेंस में गंभीर धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं। इस खबर के बाहर आते ही गुरुवार को राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में भारी गिरावट के साथ लोअर सर्किट लग गया, जिसका सीधा खामियाजा देश की सबसे बड़ी सरकारी बीमा कंपनी एलआईसी (LIC) को भी भुगतना पड़ा है।
SEBI की जांच में हुआ ₹15.15 लाख करोड़ का सनसनीखेज खुलासा
सेबी के अंतरिम आदेश के अनुसार, राजेश एक्सपोर्ट्स ने वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच अपने टर्नओवर और मुनाफे को लेकर निवेशकों के सामने पूरी तरह भ्रामक और झूठी तस्वीर पेश की।
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फर्जी रेवेन्यू का आरोप: जांच नियामक का दावा है कि कंपनी ने इन चार सालों के दौरान लगभग ₹15.15 लाख करोड़ के कंसोलिडेटेड रेवेन्यू (राजस्व) की गलत रिपोर्टिंग की।
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99.8% राजस्व का हेरफेर: चौंकाने वाली बात यह है कि कथित तौर पर दिखाया गया 99.8% राजस्व हकीकत से कोसों दूर और कागजी पाया गया है। इसके अलावा, कंपनी के प्रमोटर्स से जुड़ी शेल कंपनियों (Entities) के जरिए फंड की हेराफेरी के भी गंभीर संकेत मिले हैं।
मात्र ₹1200 से शुरू किया था सफर: कौन हैं राजेश मेहता?
20 जून 1964 को बेंगलुरु में जन्मे राजेश मेहता ने अपनी स्कूली शिक्षा सेंट जोसेफ स्कूल से पूरी की। वे बहुत ही कम उम्र में अपने पारिवारिक ज्वेलरी व्यवसाय से जुड़ गए थे। 1980 के दशक में राजेश मेहता ने अपने भाई प्रशांत मेहता के साथ मिलकर चांदी के गहनों का व्यापार शुरू किया था, जिसके लिए उन्होंने अपने बड़े भाई से मात्र ₹1,200 उधार लिए थे। अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने जल्द ही दक्षिण भारत, गुजरात और मुंबई के सराफा बाजारों में अपनी मजबूत पैठ बना ली।
आईपीओ से लेकर स्विस रिफाइनरी खरीदने तक का स्वर्णिम काल
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1995 में एंट्री: राजेश एक्सपोर्ट्स ने साल 1995 में शेयर बाजार में कदम रखा और अपने आईपीओ (IPO) के जरिए ₹10 करोड़ जुटाए। इसके बाद कंपनी ने बैकवर्ड इंटीग्रेशन के तहत गोल्ड रिफाइनिंग और रिटेल चेन (शुभ ज्वेलर्स) में कदम रखा।
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ग्लोबल धमाका: साल 2015 में इस कंपनी ने तब इतिहास रच दिया, जब इसने स्विट्जरलैंड की दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनरी 'वाल्कैम्बी' (Valcambi) को करीब 400 मिलियन डॉलर (लगभग ₹2600 करोड़) में पूरी तरह कैश डील के जरिए खरीद लिया। इस अधिग्रहण के बाद राजेश मेहता का नाम दुनिया के बड़े दिग्गजों में शुमार हो गया था।
अब क्यों लगा राजेश मेहता पर बैन?
सेबी के मुताबिक, राजेश मेहता ही कंपनी के सर्वेसर्वा हैं और सभी वित्तीय फैसलों पर उनका सीधा नियंत्रण था। वित्तीय धोखाधड़ी में मुख्य भूमिका के चलते सेबी ने अंतरिम निर्देश जारी करते हुए राजेश मेहता को अगली सूचना तक शेयर बाजार में किसी भी प्रकार की ट्रेडिंग या खरीद-बिक्री करने से प्रतिबंधित कर दिया है।
LIC के निवेश पर कैसे पड़ा असर?
देश की दिग्गज संस्थागत निवेशक भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की राजेश एक्सपोर्ट्स में 10.80% की बड़ी हिस्सेदारी है। सेबी की इस कार्रवाई के कारण जैसे ही कंपनी के शेयर क्रैश हुए, एलआईसी के पोर्टफोलियो को तगड़ा झटका लगा और खुद एलआईसी के शेयरों में भी 1% तक की गिरावट दर्ज की गई।
यदि सेबी की अंतिम जांच में ये आरोप पूरी तरह सही साबित होते हैं, तो यह भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास के सबसे बड़े 'अकाउंटिंग फ्रॉड' और वित्तीय घोटालों में से एक बन सकता है।
