RBI Bulletin: कमजोर मानसून और ग्लोबल टेंशन बढ़ा सकते हैं भारत की चिंता, जानें आरबीआई बुलेटिन की बड़ी बातें
वैश्विक आर्थिक परिदृश्य और अमेरिका-ईरान समझौता
बुलेटिन के मुताबिक, पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम शांति समझौते से फिलहाल कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन वैश्विक आर्थिक स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है। यदि यह अस्थायी समझौता टूटता है, तो दुनिया भर में ऊर्जा (क्रूड ऑयल) की आपूर्ति बाधित हो सकती है। इससे निवेश में देरी, खाद्य सुरक्षा की चिंताएं, वित्तीय अस्थिरता और महंगाई में अचानक उछाल आ सकता है, जिसका सीधा असर भारत की ग्रोथ रेट पर पड़ेगा।
भारतीय अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति मजबूत
तमाम वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी संकेतक काफी मजबूत हैं:
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शानदार जीडीपी ग्रोथ: वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (Q4) में भारत ने 7.8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर दर्ज की है। इसे निजी खपत और स्थायी निवेश से बड़ा सपोर्ट मिला है।
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मजबूत बाहरी क्षेत्र: देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का निरंतर प्रवाह और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) भारत के बाहरी मोर्चे को सुरक्षा प्रदान कर रहा है।
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महंगाई नियंत्रण में: मई में कुछ तेजी के बावजूद उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित खुदरा महंगाई दर फिलहाल तय दायरे के भीतर है।
आम जनता की जेब पर क्यों बढ़ रहा है असर?
बुलेटिन में घरेलू स्तर पर महंगाई बढ़ने के प्रमुख कारणों का भी विश्लेषण किया गया है
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कमर्शियल LPG और रेस्टोरेंट: कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ने की वजह से 'हॉस्टल और रेस्टोरेंट' श्रेणी में महंगाई बढ़ी है। मई में कुल 12 में से 8 श्रेणियों में क्रमिक रूप से कीमतें बढ़ी हैं।
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सब्जियां और अनाज महंगे: गर्मियों के मौसम में असामान्य मौसमी बदलावों के कारण खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़े हैं। चावल, गेहूं और दालों के साथ-साथ आलू, प्याज और टमाटर जैसी जरूरी सब्जियों की कीमतों में तेजी देखी गई है। खाद्य तेलों (Edible Oils) के दाम भी मासिक आधार पर बढ़े हैं।
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पेट्रोल-डीजल की मार: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण घरेलू स्तर पर भी असर पड़ा। मई के महीने में 4 किस्तों में पेट्रोल करीब 7.5 रुपये और डीजल लगभग 7.6 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ, हालांकि जून में क्रूड की कीमतों में थोड़ी नरमी आई है।
