Share Market Crash: शेयर बाजार में ब्लैक फ्राइडे! सेंसेक्स 1100 अंक क्रैश, निफ्टी 23,550 के नीचे बंद; निवेशकों के डूबे ₹6 लाख करोड़
कैसा रहा इंडेक्स का हाल? (Sensex & Nifty Performance)
कारोबार के अंत में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का प्रमुख सूचकांक निफ्टी 50 चौतरफा बिकवाली के कारण बुरी तरह लड़खड़ा गया। आज केवल फ्रंटलाइन (दिग्गज) शेयरों में ही नहीं, बल्कि ब्रॉडर मार्केट में भी पैनिक सेलिंग (घबराहट में बिकवाली) हावी रही
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निफ्टी मिडकैप इंडेक्स: इसमें 1.4 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
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स्मॉलकैप इंडेक्स: यह भी 1 प्रतिशत से ज्यादा लुढ़क कर बंद हुआ।
सेक्टोरल इंडेक्स: आईटी को छोड़ सब डूबे
आज के कारोबारी सत्र की सबसे बड़ी बात यह रही कि सूचना प्रौद्योगिकी (IT) सेक्टर को छोड़कर बाजार के लगभग सभी सेक्टर्स लाल निशान में डूबे नजर आए। बाजार को गर्त में धकेलने में ऑटो, मेटल, एनर्जी और ऑयल एंड गैस सेक्टर्स की सबसे बड़ी भूमिका रही, जो करीब 2-2 फीसदी तक टूटकर बंद हुए।
आज के टॉप लूजर्स और गेनर्स
| निफ्टी के टॉप लूजर्स (Top Losers) | निफ्टी के टॉप गेनर्स (Top Gainers) |
| आयशर मोटर्स (Eicher Motors) | टेक महिंद्रा (Tech Mahindra) |
| इंटरग्लोब एविएशन - इंडिगो (Indigo) | एचसीएल टेक्नोलॉजीज (HCL Tech) |
| पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन (Power Grid) | विप्रो (Wipro) |
| ओएनजीसी (ONGC) | लार्सन एंड टुब्रो (L&T) |
| बजाज ऑटो (Bajaj Auto) |
क्यों आई भारतीय बाजार में इतनी बड़ी गिरावट?
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, दलाल स्ट्रीट पर मचे इस कोहराम के पीछे निम्नलिखित 4 मुख्य कारण रहे:
1. मानसून को लेकर बढ़ी चिंता (IMD Forecast):
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा इस साल मानसून के अनुमान को घटाकर 90% करने से निवेशकों के सेंटिमेंट को बड़ा झटका लगा है। कमजोर बारिश और एल नीनो (El Nino) की आशंका से ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित होने और खाद्य महंगाई (Food Inflation) बढ़ने का डर पैदा हो गया है।
2. वीकेंड से पहले मुनाफावसूली (Profit Booking):
विशेषज्ञों का मानना है कि शनिवार और रविवार की छुट्टी से पहले निवेशकों ने किसी भी तरह का जोखिम न लेते हुए भारी मुनाफावसूली की, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया।
3. वैश्विक स्तर पर अस्थिरता (Global Cues):
अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम (Ceasefire) की सुगबुगाहट और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में शिपिंग गतिविधियों के दोबारा शुरू होने की खबरों ने वैश्विक कमोडिटी और शेयर बाजारों में हलचल तेज कर दी है।
4. MSCI इंडेक्स में रीबैलेंसिंग (MSCI Index Changes):
MSCI ग्लोबल स्टैंडर्ड इंडेक्स में हुए बदलावों के कारण भी बाजार में उतार-चढ़ाव देखा गया। इस बदलाव के तहत फेडरल बैंक, इंडियन बैंक और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MCX) जैसे शेयरों को इंडेक्स में जगह मिली है, जिसके कारण पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग के चलते शॉर्ट-टर्म अस्थिरता बढ़ी।
