अगले हफ्ते सोना-चांदी में क्या करें? मिडल ईस्ट तनाव के बीच बड़ी गिरावट के बाद एक्सपर्ट्स की रणनीति
पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक बाजारों सहित घरेलू बाजार में भी हलचल तेज कर दी है। यदि आप सोने या चांदी में निवेश करने की सोच रहे हैं या पहले से निवेश कर चुके हैं, तो बाजार में आई इस हालिया बड़ी गिरावट और एक्सपर्ट्स की राय को जानना आपके लिए बेहद जरूरी है। यहाँ कमोडिटी मार्केट के दिग्गजों और एक्सपर्ट्स के विश्लेषण के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट दी गई है, जो आपको अगले सप्ताह के लिए सही रणनीति बनाने में मदद करेगी
पिछले सप्ताह बाजार का हाल (MCX और COMEX)
पिछले कारोबारी सप्ताह के दौरान सर्राफा बाजारों में भारी गिरावट (Correction) देखने को मिली। मुनाफावसूली और मजबूत डॉलर के चलते कीमतें काफी नीचे आईं:
-
घरेलू बाजार (MCX):
-
सोना (अगस्त वायदा): सप्ताह के दौरान ₹3,900 (2.65%) की बड़ी गिरावट के साथ ₹1.43 लाख प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ।
-
चांदी (सितंबर वायदा): लगभग ₹14,746 (6.2%) की भारी टूट के साथ ₹2.22 लाख प्रति किलोग्राम पर आ गई।
-
-
अंतरराष्ट्रीय बाजार (COMEX):
-
सोना: 0.3% गिरकर 4,113.7 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ।
-
चांदी: 1.5% की गिरावट के साथ 60.16 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।
-
इन 3 बड़े कारकों पर टिकी है बाजार की नजर
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आने वाले दिनों में सोने-चांदी की चाल मुख्य रूप से निम्नलिखित वैश्विक घटनाक्रमों से तय होगी:
1. अमेरिका-ईरान संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव
पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की घोषणा और यूएई, कुवैत व बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर हुए हमलों के बाद बाजार सहमे हुए हैं। जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रणव मेर के अनुसार, यदि यह तनाव और ज्यादा बढ़ता है, तो कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में दोबारा उबाल आएगा। ऐसी स्थिति में निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड की तरफ भागेंगे, जिससे सोने पर दबाव बढ़ सकता है।
2. महंगाई के आंकड़े और फेडरल रिजर्व का रुख
भारत, अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) के आगामी महंगाई (Inflation) के आंकड़े बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं। ये आंकड़े यह तय करेंगे कि दुनिया के प्रमुख केंद्रीय बैंक, खासकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed), आने वाले समय में ब्याज दरों में कटौती करेंगे या बढ़ोतरी। मजबूत डॉलर और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका ने पिछले हफ्ते सोने की धारणा को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है।
3. हर उछाल पर मुनाफावसूली (Profit Booking)
एलकेपी सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी का कहना है कि सर्राफा कीमतें पिछले दिनों आई तेजी को बरकरार रखने में विफल रही हैं। बाजार में जब भी कोई मामूली सुधार या उछाल आता है, निवेशक तुरंत मुनाफावसूली (Profit Booking) कर रहे हैं, जिससे कीमतों में गिरावट का रुख (Correction Mode) बना हुआ है। हालांकि, भारतीय रुपये में आई मामूली कमजोरी ने घरेलू बाजार (MCX) को थोड़ा सहारा जरूर दिया है, लेकिन वैश्विक कमजोरी के आगे वह नाकाफी रहा।
आगे क्या: गिरावट जारी रहेगी या आएगी तेजी?
एक्सपर्ट्स की सलाह: अगले सप्ताह भी सोने और चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव (Volatility) बने रहने की पूरी संभावना है। जब तक अमेरिका-ईरान संकट को लेकर स्थितियां साफ नहीं हो जातीं और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत दिशा के संकेत (जैसे खुदरा बिक्री और बेरोजगारी के आंकड़े) सामने नहीं आते, तब तक कीमतों में सीमित दायरे में गिरावट या ठहराव देखा जा सकता है। मौजूदा गिरावट को पैनिक (घबराहट) में बेचने के बजाय एक बेहतर 'करेक्शन' के रूप में देखना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए निचले स्तरों पर धीरे-धीरे (SIP मोड में) खरीदारी करने के अच्छे अवसर बन सकते हैं, लेकिन शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स को फिलहाल बाजार की भारी अस्थिरता को देखते हुए सतर्क रहना चाहिए।
