सोने-चांदी की कीमतों में आएगी तेजी या जारी रहेगी गिरावट? निवेश करने से पहले जान लें ये 5 बड़े फैक्टर्स
1. अमेरिका-ईरान वार्ता और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' पर नजर
कमोडिटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस समय पूरी दुनिया की नजर स्विट्जरलैंड में होने वाली अमेरिका-ईरान बातचीत पर टिकी है। अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस इस बैठक में ईरानी अधिकारियों के साथ तनाव कम करने के लिए चर्चा का नेतृत्व कर सकते हैं। यदि यह वार्ता सकारात्मक रहती है, तो 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के रास्ते होने वाली कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) की सप्लाई सुचारू हो जाएगी, जिससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता कम होगी और सोने की सुरक्षित निवेश (Safe Haven) वाली मांग घट सकती है।
2. पिछले हफ्ते बाजार का हाल: रिकॉर्ड स्तर से भारी गिरावट
बीते सप्ताह घरेलू वायदा बाजार (MCX) में सोने और चांदी दोनों में ही बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी:
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सोना (Gold): करीब 2.2% (3,325 रुपये) टूटकर 1.47 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद हुआ।
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चांदी (Silver): करीब 5.3% (13,001 रुपये) की भारी गिरावट के साथ 2.33 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई।
3. मजबूत रुपया और डॉलर इंडेक्स का दबाव
भारतीय बाजार में सोने के दाम गिरने की एक मुख्य वजह रुपये की मजबूती भी रही। जानकारों के अनुसार, जब डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत होता है, तो भारत के लिए सोने का आयात सस्ता हो जाता है, जिससे घरेलू कीमतों पर दबाव बनता है। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर इंडेक्स 100.60 के आसपास मजबूत बना हुआ है, जिसके कारण वैश्विक बाजार में बुलियन पर दबाव साफ देखा जा सकता है।
4. कच्चे तेल की कीमतें और फेडरल रिजर्व का रुख
अमेरिकी केंद्रीय बैंक (Federal Reserve) के सख्त नीतिगत रुख यानी ब्याज दरों को लेकर कड़े तेवरों ने सोने की चमक को थोड़ा फीका किया है। इसके साथ ही कच्चे तेल और ऊर्जा की कीमतों में आई नरमी ने भी सर्राफा बाजार के सेंटिमेंट को प्रभावित किया है।
5. पश्चिम एशिया बनाम रूस-यूक्रेन संकट
अंतरराष्ट्रीय बाजार में फिलहाल सोना मामूली बढ़त के साथ 4,245.9 डॉलर प्रति औंस और चांदी 66.32 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही है। हालांकि रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते बाजार को थोड़ा सपोर्ट जरूर मिल रहा है, लेकिन निवेशकों का पूरा ध्यान इस समय पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) के भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर केंद्रित है।
