गाजियाबाद पासपोर्ट स्कैम: 1 नंबर, 1 पता और 24 फर्जी पासपोर्ट , डिलीवरी बॉय' बना पोस्टमैन
पोस्टमैन को मिलता था 'डिलीवरी कमीशन'
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पासपोर्ट की सुरक्षित डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए डाक विभाग के कर्मचारी को भी इस खेल में शामिल किया गया था। आरोपी डाकिया अरुण हर फर्जी पते पर आने वाले पासपोर्ट को सही हाथों (आरोपियों विवेक और प्रकाश) तक पहुँचाने के लिए 2 हजार रुपये प्रति पासपोर्ट की रिश्वत लेता था।
खाकी पर भी उठे सवाल: जांच के दायरे में थानेदार और सिपाही
सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि बिना फिजिकल वेरिफिकेशन के यह पासपोर्ट कैसे बन गए? इस मामले में बीट सिपाही, चौकी इंचार्ज और इंस्पेक्टर तक की रिपोर्ट 'ओके' पाई गई थी। पुलिस कमिश्नरेट अब उन अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच कर रही है जिन्होंने फर्जी पते पर अपनी मुहर लगाई थी।
एक महिला समेत 5 गिरफ्तार, बड़ी साजिश की आशंका
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक महिला सहित 5 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। इनके कब्जे से निम्नलिखित सामान बरामद हुआ है:
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भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज (IDs)।
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कई मोबाइल फोन।
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पासपोर्ट से जुड़े संदिग्ध कागजात।
जांच का मुख्य बिंदु: क्या है असली मकसद?
गाजियाबाद पुलिस अब इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी है कि आखिर ये फर्जी पासपोर्ट किन लोगों के लिए बनाए जा रहे थे। क्या इनका इस्तेमाल देश छोड़कर भागने, आतंकी गतिविधियों या मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों के लिए किया जाना था? पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस गिरोह ने अब तक कुल कितने फर्जी पासपोर्ट देश भर में जारी करवाए हैं।
मामले के मुख्य तथ्य
| विवरण | जानकारी |
| कुल फर्जी पासपोर्ट | 24 |
| मुख्य जरिया | एक ही मोबाइल नंबर और एक ही फर्जी पता |
| रिश्वत का खेल | ₹2000 प्रति डिलीवरी (पोस्टमैन को) |
| गिरफ्तारी | 5 आरोपी (एक महिला समेत) |
