यूपी के बस्ती में इंस्पेक्टर सुसाइड केस का पर्दाफाश: 1 करोड़ की ब्लैकमेलिंग से तंग आकर दी थी जान, महिला समेत 3 गिरफ्तार

Inspectors suicide case in Basti UP solved: He took his own life after being driven to despair by a ₹1 crore blackmail plot; three people, including a woman, arrested.
 
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उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में बीते 28 अगस्त को पुलिस इंस्पेक्टर सूर्यप्रकाश सिंह द्वारा की गई खुदकुशी के मामले में पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि इंस्पेक्टर किसी मानसिक तनाव या निजी विवाद नहीं, बल्कि एक संगठित हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग गिरोह के शिकार हुए थे। पुलिस ने मामले में मुख्य आरोपी महिला, उसके पिता और एक वकील को गिरफ्तार कर लिया है।

प्रेमजाल में फंसाकर बनाया आपत्तिजनक वीडियो

पुलिस जांच के अनुसार, मामले की मुख्य आरोपी प्रियंका चौधरी पहले मुंबई के ब्यूटी पार्लर और स्पा सेंटरों में काम कर चुकी है। उसने योजनाबद्ध तरीके से इंस्पेक्टर सूर्यप्रकाश सिंह से संपर्क साधा और उन्हें प्रेमजाल में फंसाया। इसके बाद इंस्पेक्टर के आपत्तिजनक और अश्लील वीडियो चोरी-छिपे रिकॉर्ड कर लिए गए।

1 करोड़ रुपये की फिरौती और मानसिक प्रताड़ना

वीडियो सामने आने के बाद आरोपियों ने इंस्पेक्टर को बदनाम करने और करियर बर्बाद करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करना शुरू किया। इंस्पेक्टर से चुप रहने की एवज में 1 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम की मांग की जा रही थी। इस लगातार मिल रही प्रताड़ना और सामाजिक बदनामी के डर से तंग आकर 28 अगस्त को इंस्पेक्टर सूर्यप्रकाश सिंह ने फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।

पिता और वकील भी थे इस सिंडिकेट में शामिल

पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और कॉल डिटेल्स के आधार पर पूरे गिरोह की परतें खोलीं। इस ब्लैकमेलिंग रैकेट में प्रियंका के अलावा दो अन्य लोग सक्रिय भूमिका निभा रहे थे:

  • रामनयन चौधरी: मुख्य आरोपी प्रियंका का पिता, जो पूरी साजिश में बराबर का भागीदार था।

  • विजय प्रकाश: एक स्थानीय वकील, जो कानूनी दांव-पेंच और दबाव बनाने में गिरोह की मदद कर रहा था।

पहले भी कई लोगों को बना चुकी है शिकार

पुलिस की प्राथमिक पूछताछ में खुलासा हुआ है कि प्रियंका चौधरी का यह पहला अपराध नहीं था। वह इससे पहले भी कई संभ्रांत और रसूखदार लोगों को इसी तरह हनीट्रैप में फंसाकर मोटी रकम ऐंठ चुकी है। पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों और डिजिटल रिकॉर्ड्स को खंगाल रही है ताकि गिरोह द्वारा पहले की गई ठगी के मामलों का भी ब्योरा जुटाया जा सके। तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

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