संसाधनों के उपयोग में सावधानी ही सच्ची देशभक्ति

Prudence in the use of resources is true patriotism.
 
संसाधनों के उपयोग में सावधानी ही सच्ची देशभक्ति

डॉ. सुधाकर आशावादी – विनायक फीचर्स  राष्ट्र का अस्तित्व ही नागरिकों की सुरक्षा और समृद्धि का आधार होता है। राष्ट्र किसी एक व्यक्ति, परिवार, जाति या राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का साझा आश्रय स्थल है। ऐसे में राष्ट्र की नीतियों का पालन करना और उसके प्रति निष्ठा रखना हर नागरिक का कर्तव्य माना जाता है। जिस प्रकार कोई परिवार अपनी आय और संसाधनों का सोच-समझकर उपयोग करता है, उसी प्रकार राष्ट्रीय संसाधनों के उपयोग में भी सावधानी बरतना समय की आवश्यकता है।

हाल के दिनों में नरेंद्र मोदी द्वारा सोने की खरीद को कुछ समय के लिए टालने, विदेशी उत्पादों पर निर्भरता कम करने, पेट्रोलियम पदार्थों की खपत घटाने तथा सार्वजनिक परिवहन और ‘वर्क फ्रॉम होम’ को बढ़ावा देने जैसी सलाहों ने राजनीतिक बहस को जन्म दिया है। लेखक का मानना है कि इन सुझावों को राष्ट्रीय हित के दृष्टिकोण से देखने के बजाय कुछ लोग राजनीतिक विरोध का माध्यम बना रहे हैं।

लेख में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय संकट, युद्ध या वैश्विक आर्थिक अस्थिरता का प्रभाव हर देश पर पड़ता है। गैस और पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती कीमतों का असर खाद्य पदार्थों और खुदरा महंगाई पर भी दिखाई देता है। ऐसे समय में देशहित में सामूहिक सहयोग की आवश्यकता होती है, लेकिन राजनीति में नकारात्मकता और अवसरवादिता बढ़ने से कई बार सकारात्मक सुझावों का भी विरोध होने लगता है।

लेखक ने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए बताया कि वर्ष 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध और अन्न संकट के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने देशवासियों से सप्ताह में एक समय उपवास रखने की अपील की थी। उन्होंने पहले इस अनुशासन को अपने परिवार में लागू किया, जिसके बाद देशभर में सोमवार शाम उपवास रखने की परंपरा शुरू हुई।

इसी प्रकार वर्ष 1967 में विदेशी मुद्रा संकट के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सोने की खरीद कम करने की सलाह दी थी, ताकि विदेशी मुद्रा की बचत की जा सके। उस समय इसे राष्ट्रीय अनुशासन और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया था।

लेख के अंत में लेखक ने कहा है कि किसी भी राष्ट्रीय संकट या चुनौती का सामना केवल सरकार नहीं, बल्कि पूरे देश को मिलकर करना होता है। ऐसे समय में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को प्राथमिकता देना ही सच्ची देशभक्ति और जिम्मेदार नागरिकता का परिचायक है।

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