होली 2026: उत्साह के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी; रंग खेलने में न लांघें मर्यादा की सीमा

Holi 2026: Along with enthusiasm, responsibility is also essential; don't cross the line while playing with colors.
 
होली 2026: उत्साह के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी; रंग खेलने में न लांघें मर्यादा की सीमा

लेखक: डाॅ. पंकज भारद्वाज (विनायक फीचर्स)

होली रंगों, उल्लास और आपसी प्रेम का पर्व है। लेकिन बीते कुछ वर्षों में यह देखा गया है कि उत्सव का यह उल्लास कई बार लापरवाही और असंवेदनशील व्यवहार के कारण दुर्घटनाओं में बदल जाता है। त्योहार की खुशी तभी तक सार्थक है जब वह दूसरों के लिए कष्ट का कारण न बने।

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केमिकल वाले रंगों का बढ़ता खतरा

बाजार में मिलने वाले अधिकांश पक्के रंग हानिकारक केमिकल से बने होते हैं। ये रंग न केवल त्वचा में जलन और एलर्जी पैदा करते हैं, बल्कि आंखों और बालों के लिए बेहद घातक साबित हो सकते हैं।

  • आंखों को नुकसान: आंखों में रंग जाने से सूजन और दृष्टि दोष जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

  • बालों की समस्या: केमिकल के कारण बालों का झड़ना, रूखापन और स्कैल्प इंफेक्शन आम बात है।

एक दर्दनाक सबक: मनीषा शुक्ला की कहानी

लापरवाही का परिणाम कितना भयावह हो सकता है, इसका उदाहरण गाजियाबाद की मनीषा शुक्ला हैं। पिछली होली पर किसी ने उन पर जबरन इस तरह रंग डाला कि वह उनकी आंखों में चला गया। परिणाम स्वरूप उनकी आंखों की रोशनी चली गई। कई ऑपरेशनों के बाद भी उनकी दृष्टि पूरी तरह वापस नहीं आ पाई। यह घटना हमें चेतावनी देती है कि हमारी एक छोटी सी 'शरारत' किसी का जीवन अंधकारमय कर सकती है।

सुरक्षित होली के लिए कुछ जरूरी नियम

होली के आनंद को बनाए रखने के लिए हमें कुछ बुनियादी सावधानियां बरतनी चाहिए:

  1. मर्यादा का पालन: किसी पर भी जबरन रंग न डालें। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के सम्मान और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें।

  2. हर्बल रंगों का चुनाव: यथासंभव प्राकृतिक या हर्बल रंगों का ही प्रयोग करें। पक्के और गहरे रंगों से बचें।

  3. चेहरे की सुरक्षा: आंखों के पास रंग लगाने से बचें। सुरक्षा के लिए चश्मा पहनना एक बेहतर विकल्प हो सकता है।

  4. त्वचा और बालों का बचाव: रंग खेलने से पहले पूरे शरीर और बालों पर नारियल तेल या मॉइस्चराइज़र लगाएं, ताकि रंग आसानी से निकल सके और त्वचा को नुकसान न हो।

सामाजिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी

होली का अर्थ हुड़दंग नहीं, बल्कि आनंद और सम्मान है। प्रशासन से भी यह अपेक्षा है कि वह जहरीले और जानलेवा रंगों की बिक्री पर सख्ती से रोक लगाए। जनता के बीच जागरूकता बढ़ाना भी समय की मांग है।

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