शादी के बाद एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की चर्चा क्यों? डेटिंग ऐप्स ने बदली रिश्तों की तस्वीर
शादीशुदा रिश्ते की बुनियाद आमतौर पर भरोसे, आपसी समझ और ईमानदारी पर टिकी होती है। जब पति-पत्नी के बीच विश्वास कमजोर पड़ता है तो रिश्ते में तनाव और दूरी बढ़ सकती है। एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर यानी विवाह के बाहर किसी अन्य व्यक्ति के साथ भावनात्मक या रोमांटिक संबंध भी ऐसे ही विवादों का एक कारण बन सकते हैं।
हालांकि, बेवफाई को केवल महिलाओं या पुरुषों से जोड़कर देखना सही नहीं है। किसी भी रिश्ते में इसके पीछे अलग-अलग व्यक्तिगत और सामाजिक कारण हो सकते हैं। कई मामलों में आपसी संवाद की कमी, साथ में पर्याप्त समय न बिताना, रिश्ते को लेकर असंतुष्टि या नए अनुभवों की तलाश जैसे कारणों की चर्चा की जाती है।
डेटिंग ऐप्स से बढ़े नए लोगों से जुड़ने के विकल्प
इंटरनेट और डेटिंग ऐप्स ने लोगों के लिए नए व्यक्तियों से संपर्क करना आसान बना दिया है। कुछ प्लेटफॉर्म विशेष रूप से विवाहित लोगों को नए संबंधों की तलाश के लिए सेवाएं उपलब्ध कराने का दावा करते हैं।फ्रांस से शुरू हुआ Gleeden भी ऐसा ही एक प्लेटफॉर्म है, जिसे विवाहित लोगों के लिए एक्स्ट्रा मैरिटल डेटिंग से जुड़े ऐप के रूप में पेश किया गया है। यह प्लेटफॉर्म वर्ष 2009 में शुरू हुआ था और बाद में भारत में भी उपलब्ध हुआ। प्लेटफॉर्म की व्यावसायिक व्यवस्था के अनुसार महिलाओं के लिए कुछ सेवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं, जबकि पुरुष उपयोगकर्ताओं को कुछ सुविधाओं के लिए भुगतान करना पड़ सकता है।
भारत में भी बना बड़ा यूजर बेस
भारत में Gleeden की मौजूदगी वर्ष 2017 से बताई जाती है। प्लेटफॉर्म से जुड़े दावों के अनुसार, देश में इसके यूजर्स की संख्या काफी बढ़ी है और कोरोना महामारी के बाद ऑनलाइन सामाजिक संपर्क सामान्य होने के साथ उपयोग में भी वृद्धि दर्ज की गई।हालांकि, ऐसे आंकड़ों को प्लेटफॉर्म के अपने दावों के रूप में देखना जरूरी है। इन्हें भारत में एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स की वास्तविक व्यापकता का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं माना जा सकता।
क्या छोटे शहरों में भी बढ़ रही है दिलचस्पी?
एक्स्ट्रा मैरिटल डेटिंग को अक्सर महानगरों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म के आंकड़े छोटे और मध्यम शहरों में भी इसकी मौजूदगी की ओर संकेत करते हैं।Gleeden से जुड़े आंकड़ों में जयपुर, भोपाल, इंदौर, पुणे, हैदराबाद, चेन्नई, गुरुग्राम, अहमदाबाद, चंडीगढ़, लखनऊ, कोच्चि, नोएडा, गुवाहाटी, विशाखापट्टनम, नागपुर, सूरत और भुवनेश्वर जैसे शहरों का उल्लेख किया गया है।प्लेटफॉर्म के अनुसार, उसके यूजर बेस का एक हिस्सा टियर-2 और टियर-3 शहरों से भी आता है। वहीं मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे बड़े महानगरों में भी बड़ी संख्या में यूजर्स होने का दावा किया गया है।
महिलाओं की भागीदारी पर क्या कहते हैं आंकड़े?
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर महिलाओं की भागीदारी को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं। लेकिन किसी एक डेटिंग ऐप के यूजर डेटा के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि किसी शहर या क्षेत्र की महिलाएं शादी के बाद अधिक बेवफाई करती हैं।
शादी के बाहर संबंधों का निर्णय व्यक्तिगत परिस्थितियों, रिश्तों की स्थिति और सामाजिक परिवेश से जुड़ा जटिल विषय है। इसलिए इसे किसी शहर, समुदाय या केवल महिलाओं के व्यवहार से जोड़कर देखना आंकड़ों की सही व्याख्या नहीं होगी।
डिजिटल युग में डेटिंग ऐप्स ने लोगों के आपसी संपर्क के तरीके जरूर बदले हैं। इसके साथ विवाहेतर संबंधों को लेकर चर्चा भी बढ़ी है। लेकिन किसी ऐप के यूजर आंकड़ों को पूरे समाज के व्यवहार का प्रतिनिधि मानने से पहले उसके स्रोत, सर्वेक्षण पद्धति और नमूने को समझना जरूरी है।
