महिला दिवस विशेष: सही जूतों का चुनाव सिर्फ फैशन नहीं, महिलाओं के 'आत्मविश्वास' और 'सेहत' की कुंजी है

महिला दिवस के अवसर पर अक्सर हम महिलाओं के अधिकारों और उनकी उपलब्धियों की चर्चा करते हैं, लेकिन उनके शारीरिक स्वास्थ्य और रोज़मर्रा के संघर्षों पर ध्यान कम ही जाता है। एशियन फुटवेयर्स के सीईओ आयुष जिंदल और प्रसिद्ध ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. एन. के. अग्रवाल के इन विचारों ने एक नई बहस छेड़ दी है कि कैसे 'सही जूते' महिलाओं के सशक्तिकरण का आधार बन सकते हैं।
 
महिला दिवस विशेष: सही जूतों का चुनाव सिर्फ फैशन नहीं, महिलाओं के 'आत्मविश्वास' और 'सेहत' की कुंजी है
नई दिल्ली, 7 मार्च 2026: इस महिला दिवस पर जब हम दुनिया भर में महिलाओं के नेतृत्व और महत्वाकांक्षा का जश्न मना रहे हैं, तब एक बेहद महत्वपूर्ण पहलू— पर चर्चा करना अनिवार्य हो जाता है। सफलता की राह पर चलने के लिए केवल हौसला काफी नहीं, बल्कि उन पैरों का मजबूत और दर्दमुक्त होना भी जरूरी है, जो इस सफर को तय करते हैं।

दिखावा नहीं, सहारा हैं जूते: आयुष जिंदल

एशियन फुटवेयर्स के सीईओ आयुष जिंदल का मानना है कि जूते केवल एक एक्सेसरी नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए एक अनिवार्य लाइफ-सपोर्ट सिस्टम हैं। वे कहते हैं महिलाएं एक साथ कई भूमिकाएं निभाती हैं—दफ्तर की जिम्मेदारी से लेकर घर के प्रबंधन तक। उन्हें लंबे समय तक खड़ा रहना पड़ता है। ऐसे में गलत जूतों का चुनाव न केवल पैरों में दर्द पैदा करता है, बल्कि इसका असर घुटनों, कूल्हों और कमर तक पहुंच जाता है। सही कुशनिंग और सपोर्ट वाले जूते कोई लग्जरी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए निवेश हैं।"

डॉक्टर की चेतावनी: फैशन के चक्कर में न बिगाड़ें पैरों की सेहत

वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सलाहकार डॉ. एन. के. अग्रवाल ने कामकाजी महिलाओं को सचेत करते हुए कहा कि लंबे समय तक खड़े रहने और चलने से पैरों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। उनके अनुसार:

  • जरूरी मानक: जूतों में आर्च सपोर्ट, बेहतर कुशनिंग और पूरे पैर को कवर करने वाला डिजाइन होना चाहिए।

  • बीमारियों से बचाव: सही जूते 'प्लांटर फैसाइटिस' और एड़ी के दर्द जैसी गंभीर समस्याओं से बचाते हैं।

  • सुझाव: बहुत टाइट या असुविधाजनक जूतों की जगह ऐसे डिजाइन चुनें जो थकान कम करें और पैरों की प्राकृतिक बनावट को सहारा दें।

आधुनिक तकनीक और सशक्तिकरण का संबंध

आज के दौर में जूते तकनीक और आराम का मिश्रण हैं। एक सशक्त महिला के लिए ऐसे जूते जरूरी हैं जो:

  • झटकों को सोखें (Shock Absorption): ताकि जोड़ों पर सीधा दबाव न पड़े।

  • भार का समान वितरण: शरीर के वजन को पैरों पर बराबर बांटें।

  • ब्रीदेबल मटेरियल: जिससे पसीने और संक्रमण का खतरा कम हो और दिन भर ताजगी बनी रहे।

आराम ही आत्मविश्वास की नींव है

जब पैरों को सही सहारा मिलता है, तो शारीरिक मुद्रा (Posture) बेहतर होती है। सीधा खड़े होने और बिना किसी दर्द के चलने से शरीर में एक सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार होता है। शारीरिक आराम सीधे तौर पर मानसिक मजबूती और कार्यक्षमता से जुड़ा है।

निष्कर्ष: सशक्तिकरण का अर्थ केवल अवसर प्रदान करना नहीं, बल्कि उन बाधाओं को दूर करना भी है जो महिलाओं की प्रगति को धीमा करती हैं। सही जूतों का चुनाव महिलाओं को उनके सपनों की ओर बिना रुके और बिना थके बढ़ने में मदद करता है। इस महिला दिवस पर संकल्प लें कि आराम और स्वास्थ्य के साथ कोई समझौता नहीं होगा।

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