A.R. Rahman के बयान पर मचा बवाल, ममता कुलकर्णी का तंज बना चर्चा का विषय
आज हम बात करने वाले हैं बॉलीवुड के उस म्यूजिक जीनियस की, जिनकी धुनों पर पूरी दुनिया झूमती है – ए.आर. रहमान। लेकिन इस बार वजह कोई नया गाना नहीं, बल्कि उनका एक ऐसा बयान है, जिसने पूरी फिल्म इंडस्ट्री में भूचाल ला दिया। और जैसे ही मामला गरम हुआ, एंट्री हुई 90s की ग्लैम क्वीन और अब साध्वी बन चुकी ममता कुलकर्णी की, जिनका कमेंट सुनकर लोग बोले – “भाई, ये तो सीधा दिल पर लग गया!”
तो अगर आपको बॉलीवुड, म्यूजिक और थोड़ा सा मसाला पसंद है, तो वीडियो को लास्ट तक जरूर देखिएगा।
सबसे पहले जानते हैं कि मामला शुरू कहां से हुआ। जनवरी 2026 में ए.आर. रहमान ने BBC Asian Network को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि पिछले कुछ सालों में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से उन्हें उतना काम नहीं मिल रहा। उन्होंने इशारों-इशारों में कहा कि इंडस्ट्री में अब क्रिएटिव लोगों की जगह नॉन-क्रिएटिव पावर में हैं और कहीं न कहीं एक तरह का बायस भी महसूस होता है। उन्होंने “कम्युनल थिंग” जैसे शब्द इस्तेमाल किए, और बस फिर क्या था – सोशल मीडिया पर तूफान आ गया।
राइट-विंग ग्रुप्स भड़क गए, कुछ नेताओं और सेलेब्रिटीज़ ने रहमान पर निशाना साधा। कंगना रनौत ने तो बयान को “हेटफुल” तक कह दिया। वहीं दूसरी तरफ जावेद अख्तर, शान और शंकर महादेवन जैसे लोगों ने कहा कि उन्होंने इंडस्ट्री में कभी ऐसा भेदभाव महसूस नहीं किया। मामला इतना बढ़ा कि रहमान को खुद सामने आकर सफाई देनी पड़ी। उन्होंने कहा – “भारत मेरा घर है, मेरी प्रेरणा है। मेरा किसी को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं था।” लेकिन दोस्तों, एक बार बहस शुरू हो जाए तो वो आसानी से रुकती नहीं है।
अब आते हैं इस कहानी के सबसे दिलचस्प हिस्से पर – ममता कुलकर्णी का रिएक्शन। 90s की सुपरहिट एक्ट्रेस, जो अब पूरी तरह आध्यात्मिक जीवन में हैं, उन्होंने बड़े ही मजेदार अंदाज में कहा –
“अब हालात ऐसे हैं कि म्यूजिक डायरेक्टर भी पॉपकॉर्न खाने लगे हैं!”
मतलब? उनका कहना था कि इंडस्ट्री इतनी बदल चुकी है कि बड़े-बड़े आर्टिस्ट्स भी अब साइडलाइन होकर सिर्फ फिल्म देख रहे हैं, काम का इंतज़ार कर रहे हैं। उन्होंने ये भी कहा कि आज की जनरेशन में पहले जैसा सब्र नहीं रहा और म्यूजिक भी युवाओं के टेस्ट के हिसाब से बदल गया है।
ममता ने बड़ी साफ बात कही – “ए.आर. रहमान को खुश होना चाहिए कि उन्हें खुद आकर तय करना नहीं पड़ता कि कौन सा गाना करना है।” बात मजाक में कही गई, लेकिन मैसेज सीधा था – इंडस्ट्री में अब कॉम्पिटिशन, इगो और पॉलिटिक्स बहुत बढ़ गई है।
इसके साथ ही ममता कुलकर्णी ने धर्म के नाम पर भेदभाव पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि 90s में कोई हिंदू-मुस्लिम नहीं देखता था। आमिर खान जैसे स्टार्स उनके घर आते थे, सब एक परिवार की तरह काम करते थे। आज हर किसी पर लेबल लगा दिया जाता है। उनका साफ कहना था – “कलाकार सिर्फ कलाकार होता है।” और सच कहें तो यही बात इस पूरे विवाद की जड़ भी है।
वैसे ममता कुलकर्णी खुद भी कभी कंट्रोवर्सी से दूर नहीं रहीं। 90s में उनका स्टारडम, बोल्ड फोटोशूट्स, अचानक इंडस्ट्री से गायब होना, फिर अलग-अलग विवादों में नाम आना – उनकी जिंदगी किसी फिल्म से कम नहीं रही। अब साध्वी बनकर वो इंडस्ट्री को बाहर से देखती हैं, शायद इसलिए उनकी बातें ज्यादा सच्ची और कड़वी लगती हैं।
दोस्तों, ये पूरा विवाद हमें ये सोचने पर मजबूर करता है कि क्या वाकई बॉलीवुड बदल गया है? क्या टैलेंट से ज़्यादा पहचान और विचारधारा मायने रखने लगी है? ए.आर. रहमान जैसे लीजेंड अगर ऐसा महसूस कर रहे हैं, तो सवाल तो उठता है।
अब आपकी बारी है। क्या आपको लगता है रहमान का बयान सही था? या फिर इसे बेवजह तूल दिया गया? और ममता कुलकर्णी की “पॉपकॉर्न वाली” बात पर आप क्या कहेंगे?
नीचे कमेंट में अपनी राय ज़रूर बताइए।
