Mamta Kulkarni : टॉपलेस से भगवाधारी!
बहुत से लोगों को भले ही ये ज़िंदगी का The End लगता होगा लेकिन असल बात तो ये है कि यहीं से शुरूआत होती है खुद को हकीक़त की तरफ ले जाने की... ये ज़िन्दगी का एक टर्निंग पॉइंट होता है, जिसका फायदा उठाया जा सकता है... जी हां, अगर किसी की ज़िंदगी में ये टर्निंग पॉइंट आया है, तो वो इसका सही इस्तेमाल करके इस ज़िन्दगी के कुछ अनकहे और अनसुने पहलुओं को जान सकता है... और इन्हें जानने का सबसे बेहतरीन तरीका होता है खुद को अध्यात्म से जोड़ लेना... अगर कोई इंसान आध्यात्मिक द्रष्टिकोण को अपना लेता है तो फिर उसे अपनी ज़िंदगी फिर से नयी लगने लगेगी... जब आपका ज़िंदगी से मन भर ही चुका है, तो क्यों न अपनी बाकी की ज़िंदगी ईश्वर की भक्ति में लगा दी जाए... इसका एक पॉजिटिव इंपैक्ट ये होगा कि आफको दुनिया देखने का एक नया नज़रिया मिल जाएगा...
वैसे क्या आपको पता है कि हम आज आपसे इन किस्म की बातें क्यो कर रहे हैं... इसकी दरअसल एक बड़ी वजह है... चलिए आपको डिटेल में समझाते हैं...साल 1995 में एक बॉलीवुड फिल्म आई थी... करन-अर्जुन... ये समझ लीजिए कि इसी फिल्म से शाहरुख और सलमान के सुपरस्टार बनने की कवायद शुरू हुई थी... इस फिल्म का एक बड़ा ही मशहूर गाना है जो आज भी शादी-पार्टियों में गूंजता है...
इस गाने में आप जिस एक्ट्रेस को डांस करते हुए देख रहे हैं इनका नाम है ममता कुलकर्णी... 90 के दौर में ममता कुलकर्णी एक ऐसी अदाकारा थीं, जिनकी मासूमियत, जिनकी सुंदरता के लोग कायल थे... यही नहीं, उनका हॉट एंड सिज़लिंग अंदाज़ भी लोगों को खूब भाता था... यकीन नहीं होता तो आप Akshay Kumar की फिल्म सबसे बड़ा खिलाड़ी का Maang Meri Bharo गाना सुन लीजिएगा, मतलब सुन भी लीजिएगा और देख तो ज़रूर ही लीजिएगा, आपको समझ आ जाएगा क्या होश उड़ानें वालीं अदाएं थी ममता कुलकर्णी में... लेकिन अब ममता कुलकर्णी पहले वाली ममता कुलकर्णी नहीं रहीं जो लबल-लबल करतीं थीं... अब ममता कुलकर्णी को चाहिए फुल इज्जत... क्योंकि उन्होंने अपने लिए जो रास्ता चुना है, उस पथ की राहें इतनी कठिन हैं कि उस पर चल पाना हर किसी के बस की बात नहीं...
जी हां, प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में ममता कुलकर्णी ने संन्यास की दीक्षा ले ली है... ममता को अब नया नाम दे दिया गया है... दीक्षा लेने के बाद ममता कुलकर्णी ने भगवा वस्त्र धारण कर लिया है... उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में ममता कुलकर्णी किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर बनीं हैं... इसके पहले उन्हें संगम में अपना पिंडदान किया... फिर अखाड़े में ही उनका पट्टाभिषेक हुआ... ममता ने काफी पहले संन्यास ले लिया था... वो साध्वी की जिंदगी जी रही थीं... हाल ही में वो 24 साल बाद भारत लौटी हैं...
आपको बता दें कि ममता कुलकर्णी को अब यमाई ममता नंद गिरि के नाम से जाना जाएगा... जूना अखाड़े की आचार्य लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने ममता कुलकर्णी को दीक्षा दी... ममता कुलकर्णी महाकुंभ में किन्नर अखाड़े में रह रही हैं... ममता सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहती हैं... उन्होंने महाकुंभ से कई तस्वीरों और वीडियो को साझा किया, जिसमें वो भगवा वस्त्र पहने साध्वियों के साथ खड़ी नजर आईं...किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण ने ममता बनर्जी के दीक्षा लेने से पहले क्या कुछ कहा चलिए आपको वो सुना देते हैं...
ये किन्नर अखाड़ा actually है क्या, चलिए पहले आपको वो बता देते हैं...
देखिए देश भर में किन्नरों के 13 अखाड़े हैं... इसमें शिवजी को मानने वाला किन्नर अखाड़ा, भगवान विष्णु जी को मानने वाला किन्नर अखाड़ा और गुरु नानक देव जी को मानने वाला किन्नर अखाड़ा शामिल है... किन्नर अखाड़ा प्राचीन काल से अस्तित्व में है... ये रामायण और महाभारत काल के समय यानी त्रेता और द्वापर युग में भी मौजूद रहा है... ऐसा कहा जाता है कि जब राजा दशरथ को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, तब आशिर्वाद देने के लिए किन्नर समुदाय के लोग गए थे... किन्नरों ने भगवान राम की नज़र उतारी और उन्हें दुआएं दीं... ये काम किन्नर समुदाय आज भी करता है... आपने भी देखा होगा कि जब किसी के घर में बच्चा पैदा होता है तो किन्नर समुदाय से जुड़े लोग आकर बच्चे को अपना आशीर्वाद देते हैं, दुआएं देते हैं... ये काम किन्नर अखाड़े के सदस्य भी सनातन पद्धति के मुताबिक करते हैं...
किन्नर समुदाय के भटके लोगों को राह दिखाने और किन्नरों के अस्तित्व को जागृत करने के लिए किन्नर अखाड़ा गठित किया गया था... गौरतलब है कि हिंदू धर्म और धार्मिक विचारों से प्रभावित किन्नरों का इस अखाड़े से जुड़ाव है...
आध्यात्म, समर्पण और परम्पराओं के प्रतीक महाकुंभ में किन्नरों की विशेष और ऐतिहासिक भूमिका होती है... किन्नर अखाड़ा आध्यात्म, समर्पण और परंपराओं का प्रतीक है... किन्नर अखाड़े की स्थापना का उद्देश्य किन्नर समुदाय को समाज में सम्मान और धार्मिक स्थान दिलाना है... कुंभ के दौरान किन्नर अखाड़ा विभिन्न धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों में भाग लेता है, शाही स्नान में शामिल होता है, और अपने अखाड़े की विशेष परंपराओं का पालन करता है...
खैर, वापस आते हैं ममता कुलकर्णी पर... शायद आप सोच रहे होंगे कि महामंडलेश्वर बनने के लिए ममता कुलकर्णी ने किन्नर अखाड़े को ही क्यों चुना? तो इसका जवाब ये है कि किन्नर अखाड़ा सनातन धर्म के 13 प्रमुख अखाड़ों से अलग है... ये वो अखाड़ा है, जिसमें संन्यासी बनने के बाद भी भौतिक जीवन जिया जा सकता है और इसमें महामंडलेश्वर बनने के लिए संसारिक और पारिवारिक रिश्तों को खत्म करना जरूरी नहीं होता और यही वजह है कि ममता कुलकर्णी ने इस अखाड़े को चुना और अब वो भौतिक जीवन जीते हुए भी संन्यासी बनकर रह सकेंगी... इसमें उन्हें वैराग्य वाला जीवन नहीं बिताना होगा...
वैसे बहुत सारे लोग ये भी सवाल कर रहे हैं कि ममता कुलकर्णी अचानक से महामंडलेश्वर कैसे बन गईं, क्योंकि महामंडलेश्वर बनने के लिए पहले दीक्षा लेनी पड़ती है और एक लम्बी अवधि में तपस्या करके संसारिक जीवन के प्रवृति मार्ग को छोड़ना पड़ता है... तो देखिए, अखाड़ों का नियम है कि जो व्यक्ति महामंडमलेश्वर बनता है, उसे संन्यासी होना चाहिए... उसमें संसारिक मोह-माया के लिए त्याग की भावना होनी चाहिए... पारिवारिक संबंधों से दूर होना चाहिए और वेद-पुराणों का ज्ञान होना चाहिए, लेकिन अगर आप ममता कुलकर्णी के जीवन को देखेंगे तो आपको ये पता चलेगा कि कुछ समय पहले तक तो उनका जीवन विवादों से भरा हुआ था...
तो चलिए आपको बताते हैं ममता कुलकर्णी की ज़िंदगी से जुड़ी हुई कुछ ऐसे कंट्रोवर्सीज़ जो शायद उनका पीछा कभी ना छोड़ें...
आरोप लगते हैं कि साल 2013 में ममता कुलकर्णी ने हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री को छोड़कर ड्रग माफिया विक्की गोस्वामी से दुबई में शादी कर ली थी और ये वही ड्रग माफिया है, जिसे दुबई में ड्रग्स तस्करी के लिए 12 सालों की जेल हुई थी... हालांकि ममता कुलकर्णी इन आरोपों को ग़लत बताती हैं, लेकिन सच्चाई ये है कि साल 2016 में मुंबई पुलिस ने ड्रग्स तस्करी के एक मामले में उनके खिलाफ अरेस्ट वॉरंट जारी किया था और ये बताया था कि उसने मुम्बई से 80 लाख रुपये की ड्रग्स बरामद की थी, जिसका संबंध एक ऐसी कम्पनी से था, जिसकी डायरेक्टर ममता कुलकर्णी थीं... ममता कुलकर्णी खुद कहती हैं कि वो ड्रग माफिया विक्की गोस्वामी से प्यार करती थीं और इस दौरान वो साल 2000 से 2024 तक भारत से दूर रहीं... इसके अलावा जब ममता कुलकर्णी ने हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री को छोड़ा नहीं था, तब उन पर अंडरवर्ल्ड से कनेक्शन होने के आरोप लगे थे... कहा जाता है कि एक फिल्म के लिए उन्होंने अंडरवर्ल्ड के अपराधियों से डायरेक्टर को फोन करवाया था...
इतना ही नहीं, साल 1993 में उन्होंने एक मैग्ज़ीन के लिए टॉपलैस फोटोशूट कराया था, जिस पर देशभर में काफी हंगामा हुआ था... जी हां, सितंबर 1993 के ‘स्टारडस्ट’ मैगज़ीन में उन्होंने टॉपलेस फोटो शूट कराकर सनसनी फैला दी थी... उनकी ये टॉपलेस फोटो उस जमाने के हिसाब से कुछ ज्यादा ही ऑफेंसिव थी... उस समय इस फोटो शूट पर काफी विवाद हुआ था... और जब वो मैगज़ीन छपकर आई तो फैन्स ममता की तस्वीरें देखकर हैरान रह गए..., बॉलीवुड में भी उनके इस लुक की खूब चर्चा हुई... ऐसा कहा जाता है कि उस समय ममता कुलकर्णी की टॉपलेस फोटो देखकर कई बी-ग्रेड डायरेक्टर्स ने उनको अपनी फिल्मों में काम करने के लिए फोन भी करना शुरू कर दिया था... ममता की तस्वीर रातोंरात वायरल हो गई थीं... दरअसल, ममता फिल्मों में एक सिंपल लड़की का रोल निभाती आ रही थीं... ऐसे में इस तरह के फोटोशूट ने उनकी इमेज को काफी नुकसान पहुंचाया था...
इसके अलावा अपने ज़माने में पापुलर एक्ट्रेस रहीं उर्मिला मातोंडकर के साथ उनकी कोल्ड कैट फाइट का भी किस्सा बॉलीवुड के गलियारों में आम सा है... दरअसल, स्टारडस्ट के फोटोशूट के बाद ममता की पॉपुलैरिटी सांतवे आसमान पर थी... ममता को इसी बीच मशहूर फिल्ममेकर राजकुमार संतोषी ने अपनी फिल्म चाइना गेट के लिए फोन किया... वो उन्हें फिल्म में कास्ट करना चाहते थे... ये फिल्म फेमस फिल्म सेवन समुराई की हिंदी रिमेक थी... बाद में फिल्म को लेकर रुमर्स उठने लगे की संतोषी और ममता के बीच चीजें ठीक नहीं हैं और उसके बाद बात और आगे बढ़ गई जब ममता ने संतोषी के ऊपर हैरेस्मेंट का इल्जाम लगा दिया... इसके बाद उन्हें रातोंरात फिल्म से निकाल दिया गया है... कहा जाता है कि फिल्म में ममता को वापस लेने के लिए राजकुमार संतोषी को अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम के खास छोटा राजन का फोन आया... ममता को फिल्म में वापस लिया गया और फिल्म शूट हुई लेकिन बॉक्स ऑफिस पर फिल्म पिट गई... हालांकि, फिल्म का गाना छम्मा-छम्मा खूब चला... गाने में उर्मिला मातोंडकर ने डांस किया था... इसके बाद तो मानों उर्मिला और ममता में एक कोल्ड वॉर छिड़ गई, और छोटा राजन से उनके कनेक्शन की खबरों ने आग में घी का काम किया... संतोषी पर लगाए गए आरोपों और अंडरवर्ल्ड से लिंक के बाद उन्हें फिल्में मिलना ही बंद हो गईं... और इस तरह से वो बॉलीवुड से पूरी तरह से गायब होती चलीं गईं...
बहरहाल, अब ममता कुलकर्णी ने खुद के लिए एक बिल्कुल अलग रास्ता चुन लिया है, अब शायद उनकी बाकी की ज़िंदगी इसी रास्ते पर गुज़रेगी... और यही है ममता कुलकर्णी की ज़िंदगी की अब तक की कहानी... आई होप कि आपको स्टोरी पसंद आई होगी... इसके अलावा अगर आप ममता बनर्जी के बारे में कुछ कहना चाहते हैं
