जब अनुपम खेर ने महेश भट्ट को दिया था 'श्राप' – और वही बना उनके करियर का टर्निंग पॉइंट!
Bollywood friendships that survived scandals
Anupam Kher early career
1984 की ‘सारांश’ और बॉलीवुड का वो किस्सा, जो आज भी प्रेरणा देता है
बॉलीवुड में स्ट्रगलर्स की कहानियाँ आम हैं, लेकिन कुछ किस्से ऐसे होते हैं जो इतिहास बना जाते हैं। एक ऐसा ही किस्सा है दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर और डायरेक्टर महेश भट्ट का, जो 1984 की फिल्म सारांश के इर्द-गिर्द घूमता है।
कभी एक स्ट्रगलर रहे अनुपम खेर ने खुद हाल ही में एक इवेंट में इस कहानी को शेयर किया, और बताया कैसे उनका “श्राप” ही उनके करियर का सबसे बड़ा वरदान बन गया!
शुरुआत: NSD से लेकर मुंबई की गलियों तक
अनुपम खेर ने 1978 में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) से गोल्ड मेडल के साथ ग्रेजुएशन किया। लेकिन टैलेंट होने के बावजूद उन्हें बॉलीवुड में एंट्री नहीं मिली।
"मैंने 100 से ज्यादा ऑडिशन्स दिए, लेकिन कहीं रोल नहीं मिला," – अनुपम ने बताया Indian Express के Expresso इवेंट में।
फिर आई 'सारांश' – उम्मीद की एक किरण
1984 में डायरेक्टर महेश भट्ट अपनी फिल्म सारांश पर काम कर रहे थे। फिल्म की स्क्रिप्ट लिखी थी विजय तेंदुलकर ने। कहानी थी एक बुजुर्ग दंपत्ति की, जो अपने बेटे की मौत के बाद जिंदगी से लड़ते हैं।
महेश भट्ट ने 28 साल के अनुपम को फिल्म के मुख्य किरदार बंकरनाथ के लिए कास्ट किया – जो कि 65 साल का एक रिटायर्ड व्यक्ति था!
अनुपम ने 6 महीने की मेहनत में खुद को पूरी तरह ट्रांसफॉर्म कर दिया:
-
सफेद बाल,
-
चेहरे पर झुर्रियों का मेकअप,
-
आवाज़ में बुजुर्गों जैसा कंपन,
-
चाल-ढाल भी वैसी ही।
महेश भट्ट इम्प्रेस हो चुके थे। शूटिंग से पहले कॉन्ट्रैक्ट साइन हो चुका था। सबकुछ परफेक्ट लग रहा था।
धोखा या प्रेशर? न्यूकमर को हटाकर लाने की प्लानिंग थी संजीव कुमार!
लेकिन कहानी में ट्विस्ट आया। शूटिंग से ठीक तीन दिन पहले, अनुपम को पता चला कि उन्हें फिल्म से निकाल दिया गया है।
प्रोड्यूसर्स ने महेश भट्ट पर दबाव डाला कि किसी जाने-माने चेहरे को लिया जाए – जैसे संजीव कुमार, ताकि फिल्म को कमर्शियल वैल्यू मिल सके।
महेश भट्ट ने अनुपम से यह बात छुपा ली और उन्हें कोई छोटा रोल ऑफर किया। लेकिन यह बात अनुपम के लिए जिंदगी का सबसे बड़ा झटका थी।
अनुपम का फूटना और 'श्राप' देना
दिल टूट चुका था। गुस्से और दुख में डूबे अनुपम ने बैग पैक किया और मुंबई छोड़ने का फैसला कर लिया। लेकिन जाते-जाते वे महेश भट्ट के घर पहुँचे।
दरवाज़ा खुलते ही अनुपम ने कहा:
"तुम सबसे बड़े धोखेबाज़ हो! मैंने तुम पर भरोसा किया और तुमने मुझे धोखा दिया।"
रोते हुए अनुपम ने कहा:
"मैं तुम्हें श्राप देता हूँ – तुम्हें कभी सक्सेस ना मिले!"
यह शब्द सुनकर महेश भट्ट सन्न रह गए। लेकिन उन्होंने तुरंत एक फैसला लिया – “जो सीन इसने अभी किया, वही ये फिल्म में करेगा!”
और इस तरह, अनुपम खेर को वापस सारांश में लाया गया।
फिल्म रिलीज और करियर की उड़ान
1984 में Saaransh रिलीज हुई। फिल्म को:
-
क्रिटिक्स का प्यार मिला,
-
अनुपम खेर को नेशनल अवॉर्ड मिला,
-
फिल्म ऑस्कर के लिए भारत की तरफ से भेजी गई।
सिर्फ एक हफ्ते में अनुपम ने 57 फिल्में साइन कीं!
"वो श्राप ही मेरा ब्रेकथ्रू बन गया," – अनुपम खेर (Hindustan Times को दिए इंटरव्यू में)
40 साल बाद क्या कहते हैं अनुपम और महेश?
2025 में Expresso इवेंट में अनुपम खेर ने फिर से वो कहानी सुनाई, और कहा:
"मैंने उन्हें श्राप दिया था, लेकिन उन्होंने मेरा साथ दिया। आज मैं उनका हमेशा के लिए आभारी हूँ।"
महेश भट्ट ने भी सारांश के 40 साल पूरे होने पर अनुपम की तारीफ की और उस पल को "एक्टर और इंसान की जीत" बताया।
क्या ये आज भी संभव है?
80 के दशक में न्यूकमर्स के लिए मौके मिलना बेहद मुश्किल था। लेकिन अनुपम खेर ने दिखा दिया कि:
-
अगर आप फियरलेस हैं,
-
अगर आप खुद के लिए खड़े हो सकते हैं,
-
तो आपकी किस्मत कोई नहीं रोक सकता।
आज, अनुपम खेर 500 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके हैं। और वो एक true inspiration बन चुके हैं।
