सरकार ने Ullu, ALTT जैसे ओटीटी ऐप्स पर लगाया बैन – अश्लील कंटेंट के खिलाफ सख्त कार्रवाई
Government action on obscene content
Ministry of Information and Broadcasting
नई दिल्ली, 25 जुलाई 2025 – भारत सरकार ने अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information and Broadcasting) ने 25 ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक करने का आदेश जारी किया है। इनमें प्रमुख ऐप्स जैसे Ullu, ALTT, Desiflix, और Big Shots शामिल हैं। सरकार का कहना है कि ये प्लेटफॉर्म्स लगातार "सॉफ्ट पोर्न" और वल्गर कंटेंट परोस रहे थे, जो समाज और युवा वर्ग पर बुरा असर डाल सकते हैं।
क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार द्वारा की गई यह कार्रवाई ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर लंबे समय से चल रही निगरानी और आलोचनाओं के बाद सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन ऐप्स पर बिना किसी सेंसर या रेगुलेशन के इरोटिक व अश्लील कंटेंट लगातार प्रसारित किया जा रहा था।
विशेषज्ञों का मानना है कि महामारी और लॉकडाउन के दौरान इन प्लेटफॉर्म्स की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। एक अध्ययन के मुताबिक, 2016 से 2020 के बीच भारत में अश्लील ओटीटी कंटेंट में 1200% की वृद्धि दर्ज की गई। यही कारण है कि अब सरकार डिजिटल स्पेस में नियंत्रण और नैतिकता लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
यह पहला मौका नहीं है जब ओटीटी कंटेंट को लेकर विवाद हुआ हो। मार्च 2024 में, सरकार ने 18 अन्य ऐप्स को भी ब्लॉक किया था, लेकिन उस समय Ullu और ALTT इस कार्रवाई से बच गए थे। शिवसेना (UBT) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इस पर सवाल उठाया था कि आखिर कुछ ऐप्स को बैन से छूट क्यों दी गई?
'House Arrest' विवाद और एजाज खान का मामला
हाल ही में Ullu के रियलिटी शो "House Arrest" ने विवाद को और बढ़ा दिया। शो के होस्ट एजाज खान पर आरोप लगा कि उन्होंने महिला प्रतिभागियों को अश्लील टास्क करने के लिए मजबूर किया। एक वायरल वीडियो में लड़कियाँ असहज दिखाई दीं, जिसके बाद सोशल मीडिया पर भारी विरोध देखने को मिला। इस विवाद के बाद, Ullu ने शो के एपिसोड्स हटाए, और मुंबई पुलिस ने एजाज खान के खिलाफ केस दर्ज किया।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
अप्रैल 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, नेटफ्लिक्स, अमेज़न प्राइम, यूट्यूब, Ullu और ALTT को नोटिस भेजा। कोर्ट ने कहा कि अनियंत्रित डिजिटल कंटेंट से मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक मूल्यों और बच्चों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने CBFC की तर्ज पर एक स्वतंत्र कमेटी बनाने की भी सिफारिश की, जो ओटीटी कंटेंट पर निगरानी रखे।
यूट्यूब और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर भी निगाह
यह केवल ओटीटी ऐप्स तक सीमित नहीं है। सरकार ने यूट्यूब और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी नजर कड़ी की है। 2021 में, 20 यूट्यूब चैनलों को "एंटी-इंडिया प्रोपेगेंडा" फैलाने के आरोप में बैन किया गया था। अब अश्लील कंटेंट के मामले में भी ऐसे कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।
बैन का असर और बहस
इस फैसले का ओटीटी इंडस्ट्री पर गहरा असर पड़ सकता है।
जहां एक ओर यह कदम सामाजिक मूल्यों की रक्षा और बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी माना जा रहा है, वहीं कुछ विशेषज्ञ इसे क्रिएटिव फ्रीडम पर हमला भी बता रहे हैं। सरकार का कहना है कि सभी ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को उम्र आधारित कंटेंट क्लासिफिकेशन और सेल्फ-रेगुलेशन का पालन करना होगा।
आपकी राय क्या है?
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