दिलजीत दोसांझ ने फिल्म 'सतलुज' के लिए वसूली कितनी फीस? डायरेक्टर हनी त्रेहन ने किया हैरान करने वाला खुलासा
मशहूर पंजाबी गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ इन दिनों अपनी फिल्म 'सतलुज' को लेकर लगातार चर्चा में बने हुए हैं। भले ही इस फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया हो, लेकिन इसे लेकर फैंस और सिनेमा प्रेमियों के बीच उत्सुकता कम नहीं हुई है। अब फिल्म के निर्देशक हनी त्रेहन ने एक इंटरव्यू में दिलजीत दोसांझ की फीस को लेकर एक ऐसा खुलासा किया है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया है। निर्देशक ने बताया कि पंजाब के एक महान नायक की कहानी को पर्दे पर जीवंत करने के लिए दिलजीत ने एक ऐसी मिसाल कायम की है, जो फिल्म इंडस्ट्री में बेहद दुर्लभ है।
जसवंत सिंह खालरा के किरदार के लिए ली महज '1 रुपये' की फीस
द प्रिंट को दिए एक इंटरव्यू में निर्देशक हनी त्रेहन ने बताया कि फिल्म 'सतलुज' में मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की मुख्य भूमिका निभाने के लिए दिलजीत दोसांझ ने कोई मोटी रकम नहीं ली, बल्कि महज 1 रुपये की टोकन मनी स्वीकार की।
दिलजीत का मानना था कि पंजाब के इतने बड़े और सम्मानित नायक का किरदार निभाने के बदले व्यावसायिक लाभ या मोटी फीस लेना उनके नैतिक सिद्धांतों के खिलाफ होगा। निर्देशक ने यह भी साफ किया कि इस ऐतिहासिक और संवेदनशील रोल के लिए दिलजीत ही उनकी पहली और आखिरी पसंद थे।
दिलजीत दोसांझ का भावुक पल: हनी त्रेहन ने साल 2021 की अपनी पहली मुलाकात को याद करते हुए बताया, "हम सिर्फ 30 मिनट के लिए मिले थे। जैसे ही मैंने रिसर्च से जुड़े दस्तावेज और खालरा साहब की तस्वीर दिलजीत के सामने रखी, वह स्तब्ध रह गए। उन्होंने तुरंत कुर्सी से खड़े होकर फिल्म की स्क्रिप्ट को अपने माथे से लगाया और पूरी श्रद्धा से 'वाहेगुरु' कहा। दिलजीत ने कहा कि ऐसे महान व्यक्तित्व का रोल करने के लिए पैसे लेना शर्मनाक होगा। जब मैंने उन्हें व्यावसायिक भुगतान करने का आग्रह किया, तो उन्होंने कहा कि कागजी कार्यवाही और कानूनी प्रक्रियाओं के लिए वह सिर्फ 1 रुपया मानदेय के रूप में लेंगे।"
बॉलीवुड के बड़े सितारों को कास्ट न करने की असली वजह
जब हनी त्रेहन से पूछा गया कि उन्होंने इस किरदार के लिए बॉलीवुड के किसी मुख्यधारा के बड़े अभिनेता को क्यों नहीं चुना, तो उन्होंने बेहद तार्किक जवाब दिया।
हनी त्रेहन (47 वर्ष) ने स्पष्ट किया कि वह इस भूमिका के लिए एक ऐसे सच्चे सरदार अभिनेता को चाहते थे, जो पंजाब की संस्कृति, मिट्टी और उस दौर के दर्द को गहराई से समझता हो। उन्होंने कहा, "अगर मैं किसी बॉलीवुड स्टार को यह रोल देता, तो दर्शकों का ध्यान कहानी और जसवंत सिंह खालरा के संघर्षों से हटकर इस बात पर चला जाता कि कोई अभिनेता सरदार का गेटअप लेकर एक्टिंग कर रहा है। ऐसा करना पीड़ितों के दर्द के साथ नाइंसाफी होती।"
रिलीज के 48 घंटे के भीतर लगा बैन, अब कोर्ट में है मामला
दुर्भाग्य से, फिल्म 'सतलुज' अपनी शुरुआत से ही विवादों और प्रतिबंधों से घिरी रही है।
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अचानक रिलीज और ब्लॉक: बिना किसी बड़े प्रमोशन के 3 जुलाई को यह फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज की गई थी, लेकिन महज 48 घंटों के भीतर इसे भारत में ब्लॉक कर दिया गया। बाद में इसे वैश्विक स्तर पर भी हटा दिया गया और इसकी आईएमडीबी (IMDb) रेटिंग्स भी गायब कर दी गईं।
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127 कट्स का आदेश: यह फिल्म पहले 'पंजाब 95' नाम से बनाई जा रही थी, जिस पर सेंसर बोर्ड ने 127 कट्स लगाने के निर्देश दिए थे।
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इंटरनेशनल प्रीमियर रद्द: साल 2023 में टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (TIFF) में होने वाले इसके प्रीमियर को भी भारतीय अधिकारियों की आपत्तियों के बाद रद्द कर दिया गया था।
फिलहाल इस फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर वापस लाने और इसे अचानक हटाए जाने के कारणों को सार्वजनिक करने की मांग को लेकर पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। बता दें कि यह फिल्म पंजाब में उग्रवाद के दौर के दौरान हुए कथित फर्जी एनकाउंटरों और अवैध सामूहिक दाह-संस्कारों के खिलाफ आवाज उठाने वाले जसवंत सिंह खालरा के ऐतिहासिक संघर्ष पर आधारित है।
