लाइक और व्यू के लिए शिवानी कुमारी पर कमेंट करना कितना सही? दोस्ती को रिश्ते का नाम देना ठीक नहीं
सोशल मीडिया पर आजकल लाइक, कमेंट और व्यू पाने की होड़ में लोग किसी के निजी रिश्तों को लेकर भी तरह-तरह की बातें करने लगते हैं। इन दिनों सोशल मीडिया क्रिएटर शिवानी कुमारी को लेकर भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है।
शिवानी कुमारी इन दिनों विदेशी कंटेंट क्रिएटर मार्विन अची के साथ नजर आ रही हैं। मार्विन पहले भी शिवानी से मिल चुके हैं और अब दोबारा भारत आने के बाद उनके साथ घूमते और कंटेंट बनाते दिखाई दे रहे हैं। दोनों की साथ में तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने तरह-तरह के कमेंट करना शुरू कर दिया है। कई लोग तो मार्विन को शिवानी का बॉयफ्रेंड तक बता रहे हैं।
हर रिश्ते को एक ही नजर से देखना ठीक नहीं
सोशल मीडिया पर किसी महिला और पुरुष को साथ देखकर उनके रिश्ते को तुरंत प्रेम संबंध का नाम देना उचित नहीं है। स्त्री और पुरुष के बीच सिर्फ एक ही रिश्ता नहीं होता। दोनों के बीच दोस्ती, भाई-बहन, सहकर्मी या किसी अन्य तरह का रिश्ता भी हो सकता है।
शिवानी कुमारी और मार्विन अची के बीच वास्तविक रिश्ता क्या है, इसे लेकर दोनों की ओर से कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसलिए केवल साथ घूमने या साथ कंटेंट बनाने के आधार पर किसी रिश्ते को लेकर निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।
कंटेंट के लिए साथ आना भी हो सकता है वजह
सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स के लिए साथ मिलकर वीडियो बनाना और अलग-अलग तरह का कंटेंट तैयार करना सामान्य बात है। ऐसे में यह भी संभव है कि शिवानी और मार्विन की मुलाकात और साथ घूमने का उद्देश्य दोस्ती के साथ-साथ कंटेंट तैयार करना हो।
लेकिन बिना पूरी जानकारी के किसी के निजी रिश्ते पर टिप्पणी करना या अपमानजनक बातें कहना उचित नहीं है। कुछ लाइक और व्यू के लिए किसी व्यक्ति की निजी जिंदगी को लेकर अटकलें लगाना सोशल मीडिया की जिम्मेदार संस्कृति का हिस्सा नहीं होना चाहिए।
सोशल मीडिया पर कमेंट से पहले सोचें
किसी वायरल तस्वीर या वीडियो को देखकर अपनी राय बनाना आसान है, लेकिन उसके पीछे की पूरी सच्चाई जानना जरूरी है। खासकर किसी महिला के बारे में बिना पुष्टि के निजी रिश्तों को लेकर टिप्पणी करना उसकी सार्वजनिक छवि को प्रभावित कर सकता है।
शिवानी कुमारी और मार्विन अची के बीच क्या रिश्ता है, यह दोनों का निजी विषय है। जब तक दोनों खुद इस बारे में कुछ स्पष्ट नहीं करते, तब तक सोशल मीडिया पर चल रही अटकलों को तथ्य मानने के बजाय उन्हें सिर्फ अटकलों के रूप में ही देखना बेहतर है।
