भगवान राम का किरदार निभाते समय डर और असमंजस में थे रणबीर कपूर, बोले- अपनी मर्जी से कुछ भी बदलने की आजादी नहीं थी
‘रामायण’ में राम की भूमिका को लेकर अभिनेता ने साझा किया अनुभव, साई पल्लवी ने माता सीता के किरदार को बताया आध्यात्मिक सफर
नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण’ को लेकर दर्शकों के बीच चर्चा तेज है। फिल्म में भगवान राम की भूमिका निभा रहे अभिनेता रणबीर कपूर ने इस किरदार को निभाने के दौरान आई चुनौतियों और अपनी भावनाओं के बारे में खुलकर बात की है। रणबीर ने स्वीकार किया कि भगवान राम जैसे पूजनीय चरित्र को पर्दे पर उतारना उनके लिए आसान नहीं था। इस भूमिका को निभाते समय वह डर और असुरक्षा से घिरे हुए थे।
बीबीसी एशियन नेटवर्क को दिए इंटरव्यू में रणबीर कपूर और फिल्म में माता सीता की भूमिका निभा रहीं साई पल्लवी ने अपने अनुभव साझा किए। दोनों कलाकारों ने बताया कि पौराणिक पात्रों को निभाने के साथ किस तरह की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता जुड़ी होती है।
‘रामायण’ में अपनी मर्जी से बदलाव करना आसान नहीं था
रणबीर कपूर ने बताया कि आधुनिक फिल्मों में काल्पनिक किरदार निभाते समय कलाकार को अपनी रचनात्मकता के अनुसार कई प्रयोग करने की आजादी मिलती है। उन्होंने अपनी फिल्मों ‘एनिमल’ और ‘ब्रह्मास्त्र’ का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे किरदारों में कलाकार अपने हिसाब से कुछ बदलाव कर सकता है।
लेकिन ‘रामायण’ जैसे पौराणिक विषय में यह स्थिति अलग होती है। रणबीर के मुताबिक, यह ऐसी कथा है जिससे करोड़ों लोगों की आस्था और भावनाएं जुड़ी हुई हैं। इसलिए कलाकार को मूल कहानी के प्रति ईमानदार रहना पड़ता है और अपनी तरफ से अनावश्यक बदलाव करने से बचना होता है।
उन्होंने बताया कि इस भूमिका को निभाते समय उनके मन में कई सवाल उठते थे। उन्हें इस बात का भी ध्यान रखना पड़ता था कि उनका अभिनय किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत न करे और वह दर्शकों की अपेक्षाओं पर खरे उतर सकें।
‘मैं डर और असुरक्षा से पूरी तरह घिरा हुआ था’
भगवान राम की भूमिका को लेकर रणबीर ने स्वीकार किया कि शुरुआत में वह काफी डरे हुए थे। उनके मुताबिक, जब कोई कलाकार किसी पूजनीय या दिव्य व्यक्तित्व का किरदार निभाता है, तो वह अपने हावभाव, चाल-ढाल, पहनावे और चेहरे के भावों को लेकर जरूरत से ज्यादा सतर्क हो जाता है।
रणबीर ने बताया कि उनके मन में भी यह सवाल था कि क्या वह इस भूमिका के लिए सही हैं और क्या भगवान राम जैसे आदर्श व्यक्तित्व के साथ न्याय कर पाएंगे। इस वजह से वह कई बार खुद पर संदेह करने लगे थे।
हालांकि, उन्हें यह भी महसूस हुआ कि ऐसा किरदार निभाने का अवसर बार-बार नहीं मिलता। इसलिए उन्होंने अपने डर से बाहर निकलकर इस चुनौती को स्वीकार किया। उनका मानना है कि कलाकार को कहानी पर भरोसा रखना चाहिए, उसके प्रति श्रद्धा बनाए रखनी चाहिए और अभिनय को सहज रखना चाहिए।
भगवान राम के मानवीय पहलुओं को समझना जरूरी: रणबीर
रणबीर कपूर का मानना है कि पौराणिक किरदारों को दर्शकों से जोड़ने के लिए उनके मानवीय पक्ष को समझना जरूरी है। किसी पात्र को केवल आदर्श या दिव्य रूप में दिखाने के बजाय उसकी भावनाओं और संवेदनाओं को भी समझना चाहिए।
अभिनेता के अनुसार, जब दर्शक किसी किरदार के मानवीय पहलुओं से जुड़ते हैं, तो कहानी उनके लिए अधिक प्रभावशाली और विश्वसनीय बनती है।
साई पल्लवी ने सीता के किरदार को बताया आध्यात्मिक अनुभव
इंटरव्यू में साई पल्लवी ने भी माता सीता की भूमिका निभाने के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि उनकी आध्यात्मिक परवरिश ने इस किरदार को समझने में मदद की।
साई के मुताबिक, हर फिल्म और हर किरदार से उन्हें कुछ नया सीखने को मिलता है। कई बार कोई भूमिका उनके व्यक्तित्व के ऐसे पहलुओं से परिचित कराती है, जिनके बारे में उन्होंने पहले खुद भी नहीं सोचा होता।
उन्होंने ‘रामायण’ में सीता की भूमिका को केवल अभिनय का अवसर नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव बताया। साई ने कहा कि उनकी कोशिश इस किरदार के प्रति पूरी तरह समर्पित रहने की थी। वह इसे केवल अपनी सर्वश्रेष्ठ परफॉर्मेंस देने के नजरिए से नहीं देखना चाहती थीं।
दो हिस्सों में बनाई गई है ‘रामायण’
नमित मल्होत्रा के निर्माण और नितेश तिवारी के निर्देशन में तैयार ‘रामायण’ को दो हिस्सों में बनाया गया है। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी माता सीता, यश रावण, सनी देओल हनुमान और रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका में नजर आएंगे।
फिल्म का निर्माण प्राइम फोकस स्टूडियोज ने DNEG और यश की मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस के साथ मिलकर किया है। इसके संगीत के लिए ऑस्कर विजेता संगीतकार हंस जिमर और एआर रहमान ने पहली बार साथ काम किया है। फिल्म के विजुअल इफेक्ट्स की जिम्मेदारी DNEG ने संभाली है। इसे अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को ध्यान में रखते हुए IMAX फॉर्मेट में भी तैयार किया गया है।
