ओटीटी पर भी रानी मुखर्जी का जलवा 'मर्दानी 3' नेटफ्लिक्स पर नंबर 1 पूरी फ्रेंचाइजी ने टॉप 10 में बनाई जगह
मुंबई | 03 अप्रैल 2026
भारतीय सिनेमा की सबसे सफल महिला-प्रधान फ्रेंचाइजी 'मर्दानी' ने एक नया इतिहास रच दिया है। निर्देशक अभिराज मीनावाला और निर्माता आदित्य चोपड़ा की 'मर्दानी 3' (2026) न केवल थिएटर्स में ब्लॉकबस्टर साबित हुई, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी रिकॉर्ड तोड़ रही है।
नेटफ्लिक्स इंडिया पर 'मर्दानी' की हैट्रिक
आज सुबह के आंकड़ों के अनुसार, नेटफ्लिक्स इंडिया की टॉप 10 सूची में 'मर्दानी' सीरीज का दबदबा कुछ इस प्रकार है:
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मर्दानी 3 (2026): नंबर 1 स्थान पर ट्रेंडिंग।
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मर्दानी (2014): नंबर 5 स्थान पर।
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मर्दानी 2 (2019): नंबर 7 स्थान पर।
किसी एक फ्रेंचाइजी की तीनों फिल्मों का एक साथ टॉप 10 में होना भारतीय ओटीटी स्पेस के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
बॉक्स ऑफिस पर 'शिवानी शिवाजी रॉय' की दहाड़
'मर्दानी 3' ने केवल दर्शकों का दिल ही नहीं जीता, बल्कि कमाई के मामले में भी अपनी पिछली फिल्मों को पीछे छोड़ दिया है:
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कुल कलेक्शन: फिल्म ने भारत में 53 करोड़ रुपये से अधिक का नेट कलेक्शन किया है।
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सबसे बड़ी ओपनिंग: पहले दिन 4 करोड़ रुपये कमाकर इसने रानी मुखर्जी की सोलो फिल्मों के लिए सबसे बड़ी ओपनिंग दर्ज की।
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दुर्लभ उपलब्धि: सिनेमाघरों में सफलतापूर्वक 50 दिन पूरे किए, जो आज के दौर में बहुत कम फिल्मों के साथ होता है।
रानी मुखर्जी: करियर के 30वें साल में भी 'सक्सेस क्वीन'
अपने करियर के 30वें वर्ष में कदम रख चुकीं रानी मुखर्जी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि एक दमदार कहानी और सशक्त किरदार (एसएसपी शिवानी शिवाजी रॉय) के दम पर सोलो फिल्में भी बॉक्स ऑफिस पर राज कर सकती हैं। वह भारतीय सिनेमा की एकमात्र ऐसी अभिनेत्री बन गई हैं जिनके नाम एक सफल महिला-पुलिस फ्रेंचाइजी दर्ज है।
विशेषज्ञों की राय
फिल्म विश्लेषकों का मानना है कि 'मर्दानी 3' की सफलता थिएटर और ओटीटी के बीच के बेहतरीन तालमेल को दर्शाती है। मजबूत 'वर्ड-ऑफ-माउथ' के कारण ही यह फिल्म स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर भी लंबे समय तक दर्शकों को अपनी ओर खींच रही है। मर्दानी' सीरीज अब भारतीय सिनेमा में कहानी कहने की उत्कृष्टता का एक बेंचमार्क बन चुकी है। 12 वर्षों के सफर के बाद, यह फ्रेंचाइजी साबित करती है कि दर्शकों को अब केवल पुरुष सितारों के दबदबे वाली एक्शन फिल्मों की नहीं, बल्कि दमदार और सामाजिक रूप से प्रासंगिक कहानियों की भी तलाश है।
