गौवंश की रक्षा से ही सनातन धर्म सुरक्षित रहेगा : विवेक ओबेरॉय

Sanatan Dharma will be safe only if cows are protected: Vivek Oberoi
 
Sanatan Dharma will be safe only if cows are protected: Vivek Oberoi
मुंबई (विभूति फीचर्स)। प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता विवेक ओबेरॉय ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक नींव गौमाता पर आधारित है। उन्होंने स्पष्ट कहा – “यदि गौवंश सुरक्षित रहेगा, तभी सनातन धर्म की रक्षा संभव है।

पिता से मिली प्रेरणा

विवेक ओबेरॉय ने अपने संबोधन में बताया कि उनके पिता, वरिष्ठ अभिनेता सुरेश ओबेरॉय ने कश्मीर से कन्याकुमारी तक गौमाता की सुरक्षा और संरक्षण के लिए लंबी पदयात्रा की थी। इस दौरान उन्होंने किसानों से संवाद किया और देशभर के गांवों में जाकर गौमाता की आर्थिक व सामाजिक उपयोगिता समझाई। उन्होंने गौहत्या रोकने के लिए भी लगातार प्रयास किए।

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कार्यक्रम का आयोजन

यह वक्तव्य उन्होंने “गऊ भारत भारती” समाचारपत्र की 11वीं वर्षगांठ पर आयोजित राष्ट्र सेवा सम्मान समारोह में दिया। यह आयोजन मुंबई के जुहू इस्कॉन सभागार में हुआ, जिसकी अध्यक्षता गुरुदेव आचार्य लोकेश मुनि ने की। मुख्य अतिथि विवेक ओबेरॉय के साथ ही मंच पर सद्गुरु डॉ. दयानिधि, विनय गोपाल सिंह, महेंद्र संगोई, सुनील सेठ और हैदराबाद से आए ज्योतिषाचार्य कल्याण शास्त्री भी उपस्थित थे।

गऊ भारत भारती की विशेषता

गौरतलब है कि गऊ भारत भारती भारत का पहला राष्ट्रीय समाचारपत्र है, जो पूरी तरह गौवंश और गौ-आधारित अर्थव्यवस्था पर केंद्रित है। “गौ माता राज्य माता – स्वर्णिम भारत, संपन्न किसान, उन्नत महाराष्ट्र” के ध्येय वाक्य के साथ यह पत्र पिछले 11 वर्षों से सक्रिय है।

  • यह समाचारपत्र न केवल गौवंश संरक्षण और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करता है,

  • बल्कि गाय के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को भी रेखांकित करता है।

  • इसका उद्देश्य “गाय को विश्वमाता” के रूप में सम्मान दिलाना और सतत विकास की दिशा में योगदान करना है।

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राष्ट्र सेवा सम्मान

इस अवसर पर विवेक ओबेरॉय, विनय गोपाल सिंह, महेंद्र संगोई और सद्गुरु डॉ. दयानिधि ने गौभक्तों तथा समाज, कला और साहित्य में उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों को “राष्ट्र सेवा सम्मान” से सम्मानित किया।
सम्मानित होने वालों में रंजना सिंह (जीतेश्वर इंफ्रा की प्रबंध निदेशिका), वर्षा चतुर्वेदी, संगीत मासूम, समर्था महालक्ष्मी, लेखिका ललिता जोगड़, हरेश वोरा, विजय पहरिया, डॉ. लेना गुप्ता और एरीपरला योगानंद शास्त्री शामिल थे।
इसके अतिरिक्त जयश्री, विशाल भगत और हिम बहादुर सोनार ने भी कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

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