Shabana Azmi Box Office Clash: 40 साल बाद बना दुर्लभ संयोग! एक ही दिन रिलीज़ होंगी शबाना आज़मी की 2 बड़ी फिल्में, खुद से ही टकराएंगी दिग्गज अभिनेत्री
Shabana Azmi Awaraapan 2 & Batwara 1947 Release: भारतीय सिनेमा की बहुमुखी और दिग्गज अभिनेत्री शबाना आजमी (75 वर्ष) इस शुक्रवार (14 अगस्त) को एक अनोखे और ऐतिहासिक रिकॉर्ड के साथ बॉक्स ऑफिस पर दस्तक दे रही हैं। एक ही दिन उनकी दो बहुप्रतीक्षित फिल्में— 'आवारापन 2' (Awarapan 2) और 'बंटवारा 1947' (Batwara 1947) सिनेमाघरों में रिलीज हो रही हैं। 75 वर्ष की उम्र में एक ही दिन दो बिल्कुल विपरीत और दमदार किरदारों के साथ खुद से टकराने को शबाना आजमी ने अपने करियर का बेहद दुर्लभ और सुखद अनुभव बताया है।
40 साल पुराना दौर हुआ ताज़ा
अपने करियर के इस पड़ाव पर मिलने वाली विविधता पर खुशी जताते हुए शबाना आजमी ने याद किया कि लगभग 40 साल पहले (1983 में) उनके करियर में ऐसा समय आया था जब 15 दिनों के भीतर उनकी 'मासूम', 'अवतार', 'कामरूप' और 'ये नजदीकियां' जैसी 4 फिल्में एक साथ रिलीज हुई थीं।
उस दौर का ज़िक्र करते हुए उन्होंने बताया कि तब सितारे एक साथ 8 से 10 फिल्मों में काम करते थे और एक दिन में दो-दो शिफ्ट करना आम बात थी। उन्होंने यह भी याद किया कि दिग्गज अभिनेता शशि कपूर की व्यस्तता के कारण राज कपूर उन्हें मजाक में 'टैक्सी' कहा करते थे, क्योंकि वे दिन में 4-5 शिफ्ट करते थे और उनकी कार ही उनका चलता-फिरता घर बन गई थी।
आवारापन 2' नकारात्मक और खूंखार विलेन 'नफीसा' का रोल
नितिन कक्कड़ द्वारा निर्देशित एक्शन-थ्रिलर फिल्म 'आवारापन 2' में शबाना आजमी एक ग्रे और नेगेटिव शेड वाले किरदार में नज़र आएंगी। इसमें वे 'नफीसा' नाम की मुख्य विलेन की भूमिका निभा रही हैं। इमरान हाशमी, दिशा पाटनी, सुविंदर विक्की और अनिरुद्ध रावल स्टारर इस फिल्म में शबाना का मानना है कि असली ताकत और खौफ हमेशा शांत रहकर दिखाया जाता है। इस फिल्म के जरिए वे 1982 की सुपरहिट फिल्म 'अर्थ' के 44 साल बाद विशेष भट्ट के प्रोडक्शन बैनर के साथ दोबारा जुड़ी हैं।
बंटवारा 1947 मजबूत और भावुक माँ 'माई' का रूप
राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी पीरियड-ड्रामा फिल्म 'बंटवारा 1947' में शबाना आजमी पहली बार सुपरस्टार सनी देओल के साथ स्क्रीन साझा कर रही हैं। असगर वजाहत के प्रसिद्ध नाटक 'जिस लाहौर नई वेख्या, ओ जम्या ही नई' पर आधारित इस फिल्म में शबाना 'माई' नामक एक बुजुर्ग महिला का किरदार निभा रही हैं। यह कहानी एक ऐसी मजबूत माँ की है जो विभाजन के दर्दनाक माहौल में भी लाहौर स्थित अपनी पुश्तैनी हवेली को छोड़ने से इनकार कर देती है।
विभाजन के दर्द और ऐतिहासिक चुप्पी पर बेबाक विचार
विभाजन की त्रासदी पर बात करते हुए शबाना आजमी ने कहा कि रेडक्लिफ रेखा खींचना इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक था। उस दौर में लोगों ने जीवित रहने के लिए खामोशी अख्तियार कर ली थी, लेकिन उस चुप्पी के कारण आने वाली पीढ़ियां विभाजन के कड़वे सच और उसकी त्रासदी के असली प्रभाव को सही ढंग से नहीं समझ सकीं। शुरुआती ट्रेंड्स के मुताबिक, इमरान हाशमी की 'आवारापन 2' बॉक्स ऑफिस एडवांस बुकिंग के मामले में 'बंटवारा 1947' से आगे चल रही है, लेकिन दोनों ही फिल्मों में शबाना आजमी के अभिनय की काफी सराहना की जा रही है।
