तापसी पन्नू ने किया बॉलीवुड के पीआर गेम का खुलासा, कहा – “अब सफलता दूसरों को गिराकर हासिल की जा रही है”

 
Taapsee Pannu EXPOSES Bollywood's Toxic PR Game

आज हम बात करने वाले हैं बॉलीवुड की सबसे बेबाक और निडर एक्ट्रेस तापसी पन्नू की। तापसी वो नाम हैं जो बिना घुमा-फिरा कर अपनी बात रखने के लिए जानी जाती हैं। लेकिन इस बार उन्होंने जो कहा है, उसने पूरी बॉलीवुड इंडस्ट्री के पीआर सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने बॉलीवुड के तथाकथित “पीआर गेम” को एक्सपोज़ करते हुए ऐसा बयान दिया है, जिसने इंडस्ट्री के कई लोगों को असहज कर दिया है।

तापसी ने साफ शब्दों में कहा है कि बॉलीवुड का पीआर गेम अब सिर्फ प्रमोशन तक सीमित नहीं रहा। अब ये एक टॉक्सिक पावर गेम बन चुका है, जहां लोग खुद को आगे बढ़ाने के साथ-साथ दूसरों को नीचे गिराने के लिए भी पैसा खर्च कर रहे हैं। सवाल ये है कि आखिर ये पीआर गेम है क्या? और तापसी इससे इतनी नाराज़ क्यों हैं? चलिए, पूरी कहानी समझते हैं।

सबसे पहले तापसी पन्नू के करियर पर एक नज़र डालते हैं। उन्होंने 2010 में तेलुगु फिल्म ‘झुम्मंडी नादम’ से अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद बॉलीवुड में उन्होंने ‘पिंक’, ‘बदला’, ‘थप्पड़’, और हाल ही में ‘डंकी’ जैसी फिल्मों से अपनी एक अलग पहचान बनाई। तापसी हमेशा ऐसी फिल्में चुनती हैं जो सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं, बल्कि समाज से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाती हैं।

पिछले डेढ़-दो सालों में आपने शायद नोटिस किया होगा कि तापसी का स्क्रीन प्रेजेंस थोड़ा कम हो गया है। लेकिन ये किसी मजबूरी की वजह से नहीं, बल्कि उनका सोचा-समझा फैसला है। टाइम्स नाउ और ज़ूम को दिए इंटरव्यू में तापसी ने खुद बताया कि उन्होंने जानबूझकर अपना काम स्लो किया है, क्योंकि उन्हें एहसास हुआ कि इंडस्ट्री का माहौल अब बहुत ज़्यादा बनावटी और जहरीला हो चुका है।

अब आते हैं असली मुद्दे पर — बॉलीवुड का पीआर गेम। पहले पीआर का मतलब होता था फिल्म प्रमोशन, इंटरव्यूज़, और पॉजिटिव इमेज बनाना। लेकिन तापसी के मुताबिक अब ये गेम पूरी तरह बदल चुका है। उन्होंने कहा कि आज के समय में लोग न सिर्फ खुद को आगे बढ़ाने के लिए पैसे देते हैं, बल्कि दूसरों को बदनाम करने के लिए भी बड़े-बड़े अमाउंट खर्च किए जाते हैं।

तापसी का सवाल सीधा और बेहद दमदार है — “आपकी सफलता कब से किसी और की नाकामी पर निर्भर करने लगी?” सोचिए, अगर कोई एक्टर अच्छा कर रहा है, तो उसके खिलाफ नेगेटिव आर्टिकल्स प्लांट कराए जाते हैं, सोशल मीडिया पर ट्रोल आर्मी एक्टिव की जाती है, और फेक नैरेटिव्स फैलाए जाते हैं। यही है आज का नया पीआर सिस्टम।

उन्होंने ये भी कहा कि कई लोग अपनी असली पर्सनैलिटी छोड़कर एक फेक इमेज क्रिएट कर रहे हैं, सिर्फ लाइमलाइट में बने रहने के लिए। लेकिन जब स्क्रीन पर उनका काम कुछ और दिखाता है और सोशल मीडिया पर उनकी इमेज कुछ और, तो ये Discrepancy साफ नज़र आती है — और यही चीज तापसी को सबसे ज़्यादा परेशान करती है।

एक मजेदार लेकिन सटीक उदाहरण देते हुए तापसी ने कहा कि उनके पास किसी सोशल मीडिया अकाउंट को 50,000 रुपये देने के लिए नहीं हैं ताकि वो उनके बारे में झूठी तारीफें लिखे। वो अपना पैसा खुद पर, अपनी फैमिली पर और ट्रैवलिंग पर खर्च करना पसंद करती हैं। और यहीं पर तापसी आम लोगों से कनेक्ट कर जाती हैं।

अगर हम थोड़ा पीछे देखें, तो बॉलीवुड में नेगेटिव पीआर के उदाहरण नए नहीं हैं। सुशांत सिंह राजपूत केस के दौरान ब्लाइंड आइटम्स और नेगेटिव कैंपेन की काफी चर्चा हुई थी। कंगना रनौत भी कई बार कह चुकी हैं कि उनके खिलाफ ऑर्गनाइज़्ड कैंपेन चलाए गए। सोशल मीडिया के आने से ये सब और आसान हो गया है — फेक फॉलोअर्स, ट्रेंड्स और पेड नैरेटिव्स अब नॉर्मल बन चुके हैं।

तापसी की बातें सिर्फ शिकायत नहीं हैं, बल्कि एक वेक-अप कॉल हैं। वो आज भी एक्टिव हैं और अपनी अपकमिंग फिल्म ‘गंधारी’ पर काम कर रही हैं, लेकिन अपने नियमों और अपनी वैल्यूज़ के साथ। वो ट्रेंड्स को फॉलो नहीं करतीं, बल्कि खुद का रास्ता बनाती हैं।

अब सवाल आपसे है — क्या बॉलीवुड को और तापसी जैसे स्टार्स की जरूरत है? या फिर पीआर गेम अब इंडस्ट्री का स्थायी हिस्सा बन चुका है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए। 

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