“हॉरर और कॉमेडी का मेल बहुत दिलचस्प होता है”: अक्षय कुमार
भूत बंगला’ के वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर को लेकर उत्साहित अक्षय कुमार ने बताया, क्यों खास है डर और हंसी का संगम
हॉरर और कॉमेडी का अनोखा मेल दर्शकों को एक साथ डरने और हंसने का मौका देता है। अभिनेता अक्षय कुमार का मानना है कि ऐसी फिल्मों की सबसे बड़ी खूबी यही है कि वे दर्शकों को एक पल रोमांच और तनाव का एहसास कराती हैं, तो अगले ही पल हंसी से माहौल हल्का कर देती हैं। अपनी फिल्म ‘भूत बंगला’ के वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर के मौके पर अक्षय कुमार ने फैंटेसी फिल्मों की कहानी, हॉरर-कॉमेडी के आकर्षण और पर्दे पर हास्य को स्वाभाविक बनाने की कला पर अपने विचार साझा किए।
फैंटेसी की दुनिया में भी कहानी के पीछे वजह जरूरी: अक्षय कुमार
सवाल: ‘भूत बंगला’ के वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर के बीच, आपके अनुसार फैंटेसी फिल्म की कहानी में ऐसी वजह और सोच होना कितना जरूरी है, जिससे दर्शक खुद को जोड़ सकें?
अक्षय कुमार: मेरा मानना है कि हर चीज के पीछे कोई न कोई वजह होनी चाहिए, फिर चाहे वह फैंटेसी की दुनिया ही क्यों न हो। जब आप कोई कॉमिक बुक पढ़ते हैं, तो उसमें भी हर किरदार की ताकत के पीछे कोई कारण होता है। ये ताकतें कहां से आती हैं? कोई इंसान कैसे बदलता है और उसका रूप क्यों बदल जाता है? हर बदलाव के पीछे कोई वजह होती है।
जब आप असाधारण किरदारों और काल्पनिक परिस्थितियों की बात करते हैं, तब भी उनके पीछे की वजह बताना जरूरी है। इससे दर्शकों को फिल्म की बनाई हुई दुनिया को समझने और उससे जुड़ने में मदद मिलती है।

डर के बीच अचानक पैदा होने वाली हंसी बनाती है हॉरर-कॉमेडी को खास
सवाल: आपके हिसाब से हॉरर-कॉमेडी दर्शकों का इतना मनोरंजन क्यों करती है? फिल्म से उन्हें क्या उम्मीद रखनी चाहिए?
अक्षय कुमार: मुझे लगता है कि हॉरर और कॉमेडी का मेल बहुत दिलचस्प होता है। जब आप कोई डरावना दृश्य देखते हैं, तो तनाव में रहते हैं और इंतजार करते हैं कि अब क्या होने वाला है। तभी अचानक कोई मजेदार पल आ जाता है और सारा तनाव खत्म हो जाता है। लोग हंसने लगते हैं। यही मेल इस तरह की फिल्मों को इतना मजेदार बनाता है।
हालांकि, कॉमेडी परिस्थितियों से स्वाभाविक रूप से निकलनी चाहिए। उसे जबरदस्ती पैदा नहीं किया जा सकता। ‘भूत बंगला’ में भी यही कोशिश की गई है कि दर्शकों को डर और हंसी, दोनों का अनुभव मिले। एक पल वे डरें और अगले ही पल हंसने लगें।
अब जब फिल्म का प्रीमियर ज़ी सिनेमा पर हो रहा है, तो परिवार घर बैठे साथ में इस मस्ती और पागलपन का आनंद ले सकते हैं। बस आराम से बैठिए, फिल्म देखिए और अगर किसी ऐसे पल में हंसी छूट जाए, जिसकी आपने उम्मीद भी न की हो, तो हैरान मत होइए।
सही टाइमिंग और चेहरे के हावभाव से निखरती है कॉमेडी
सवाल: कॉमेडी अक्सर अप्रत्याशित परिस्थितियों से निकलती है। किसी सीन को करते समय आपका अपना मजाकिया अंदाज इसमें कितनी भूमिका निभाता है?
अक्षय कुमार: मुझे लगता है कि कॉमेडी पूरी तरह सही समय पर सही बात कहने और आसपास की चीजों पर ध्यान देने पर निर्भर करती है। रोजमर्रा की जिंदगी में हमारे सामने कई मजेदार परिस्थितियां आती हैं, लेकिन उस समय हमें एहसास भी नहीं होता कि उनमें कितनी कॉमेडी छिपी है। एक अभिनेता के तौर पर हमें उन छोटी-छोटी बातों को पर्दे पर लाने का मौका मिलता है।
कई बार चेहरे का एक साधारण-सा हावभाव या थोड़ी देर का ठहराव लंबे संवाद से भी ज्यादा हंसा सकता है। ‘भूत बंगला’ जैसी फिल्म में, जहां परिस्थितियां इतनी अनोखी हैं, वहां मजा इसी बात में है कि आप उन पर कितनी सहजता से प्रतिक्रिया देते हैं।
किरदार के तौर पर आपको उस स्थिति को गंभीरता से लेना होता है, भले ही दर्शक उस पर हंस रहे हों। यही बात कॉमेडी को असरदार बनाती है।
‘भूत बंगला’ में मिलेगा डर और मनोरंजन का अनोखा अनुभव
अक्षय कुमार के मुताबिक, हॉरर-कॉमेडी में कहानी, परिस्थितियों और अभिनय की टाइमिंग का संतुलन बेहद अहम होता है। डरावने दृश्यों के बीच स्वाभाविक हास्य दर्शकों के अनुभव को खास बना देता है। ‘भूत बंगला’ के वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर के जरिए दर्शकों को घर बैठे मनोरंजन, रोमांच और हंसी का ऐसा ही मिश्रण देखने का अवसर मिलेगा।
