कार्डियक अरेस्ट क्या है? अचानक क्यों रुक जाती है दिल की धड़कन, जानें लक्षण और बचाव के तरीके
हेल्थ डेस्क। कार्डियक अरेस्ट एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें दिल अचानक शरीर में प्रभावी ढंग से खून पंप करना बंद कर देता है। ऐसी स्थिति में मस्तिष्क और शरीर के दूसरे अंगों तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित हो सकती है। समय पर सीपीआर (CPR) और आपातकालीन चिकित्सा सहायता मिलने से मरीज की जान बचने की संभावना बढ़ सकती है।
नाना पाटेकर के निधन से जुड़ी खबर में कार्डियक अरेस्ट का उल्लेख किया गया है। हालांकि, किसी व्यक्ति की मृत्यु का सटीक चिकित्सकीय कारण संबंधित डॉक्टरों या आधिकारिक मेडिकल जानकारी से ही प्रमाणित माना जाना चाहिए। कार्डियक अरेस्ट के बारे में जागरूकता जरूरी है, क्योंकि यह बिना किसी स्पष्ट चेतावनी के भी हो सकता है।
क्या होता है कार्डियक अरेस्ट?
कार्डियक अरेस्ट में दिल की विद्युत गतिविधि में गड़बड़ी होने से उसकी पंप करने की क्षमता अचानक बंद हो सकती है। इसके कारण व्यक्ति बेहोश हो सकता है और सामान्य रूप से सांस लेना बंद कर सकता है या केवल हांफने जैसी असामान्य सांसें ले सकता है।
यह हार्ट अटैक से अलग स्थिति है। हार्ट अटैक आमतौर पर दिल की मांसपेशियों तक खून पहुंचाने वाली धमनी में रुकावट के कारण होता है, जबकि कार्डियक अरेस्ट में दिल की पंपिंग अचानक बंद हो जाती है। हार्ट अटैक कभी-कभी कार्डियक अरेस्ट का कारण भी बन सकता है।
कार्डियक अरेस्ट के प्रमुख लक्षण
कार्डियक अरेस्ट में व्यक्ति की हालत तेजी से बिगड़ सकती है। इसके प्रमुख संकेत हैं:
- अचानक बेहोश होकर गिर जाना।
- आवाज देने या कंधा थपथपाने पर प्रतिक्रिया न देना।
- सामान्य रूप से सांस न लेना या केवल हांफना।
- शरीर में सामान्य प्रतिक्रिया का अभाव।
ध्यान दें: ऐसे संकेत दिखने पर तुरंत आपातकालीन सहायता बुलाएं। भारत में एम्बुलेंस के लिए 112 पर कॉल किया जा सकता है।
कार्डियक अरेस्ट आने पर क्या करें?
कार्डियक अरेस्ट में शुरुआती मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे समय में तुरंत कार्रवाई करना जरूरी है।
1. प्रतिक्रिया और सांस जांचें: देखें कि व्यक्ति आवाज देने पर प्रतिक्रिया दे रहा है या नहीं और सामान्य रूप से सांस ले रहा है या नहीं। जांच में ज्यादा समय न लगाएं।
2. आपातकालीन सहायता बुलाएं: किसी व्यक्ति को 112 पर कॉल करने और उपलब्ध होने पर AED यानी ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर लाने के लिए कहें।
3. सीपीआर शुरू करें: यदि व्यक्ति बेहोश है और सामान्य रूप से सांस नहीं ले रहा है, तो छाती के बीचोंबीच जोर से और तेजी से दबाव देना शुरू करें। वयस्कों में छाती को प्रति मिनट 100–120 बार दबाने की सलाह दी जाती है। दबाव की गहराई लगभग 5–6 सेंटीमीटर होनी चाहिए और हर दबाव के बाद छाती को वापस सामान्य स्थिति में आने दें।
4. प्रशिक्षित हों तो सांस भी दें: सीपीआर में सामान्यतः 30 छाती दबाव के बाद 2 रेस्क्यू ब्रीद दी जाती हैं। यदि आप प्रशिक्षित नहीं हैं या मुंह से सांस देने में सक्षम नहीं हैं, तो आपातकालीन ऑपरेटर के निर्देशों के अनुसार लगातार छाती दबाते रहें।
5. AED उपलब्ध हो तो इस्तेमाल करें: मशीन चालू करके उसके निर्देशों का पालन करें। आपातकालीन टीम के आने या व्यक्ति के सामान्य रूप से सांस लेने और प्रतिक्रिया देने तक सहायता जारी रखें।
कार्डियक अरेस्ट से बचाव के लिए क्या करें?
हर कार्डियक अरेस्ट को रोक पाना संभव नहीं है, लेकिन दिल की सेहत का ध्यान रखने से कुछ जोखिम कम किए जा सकते हैं।
- ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखें: नियमित जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार लें।
- डायबिटीज पर नियंत्रण रखें: रक्त शर्करा का स्तर नियंत्रित रखने के लिए चिकित्सकीय सलाह का पालन करें।
- धूम्रपान से बचें: तंबाकू दिल और रक्त वाहिकाओं के लिए नुकसानदेह है।
- संतुलित आहार और नियमित गतिविधि अपनाएं: अपनी उम्र और स्वास्थ्य के अनुसार व्यायाम करें।
- परिवार के मेडिकल इतिहास को समझें: परिवार में कम उम्र में अचानक हृदय मृत्यु या गंभीर हृदय रोग का इतिहास हो तो डॉक्टर से परामर्श लें।
- लक्षणों को नजरअंदाज न करें: सीने में दर्द या दबाव, सांस फूलना, बेहोशी या अचानक तेज धड़कन होने पर तत्काल चिकित्सकीय जांच कराएं। गंभीर लक्षणों में आपातकालीन सहायता लें।
क्या कार्डियक अरेस्ट के बाद बचना मुश्किल होता है?
कार्डियक अरेस्ट जानलेवा स्थिति है, लेकिन इसे हमेशा घातक मानना सही नहीं है। तुरंत सीपीआर, समय पर डिफिब्रिलेशन और अस्पताल में उन्नत उपचार से बचने की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए परिवार के सदस्यों और आम लोगों को सीपीआर की बुनियादी ट्रेनिंग लेना उपयोगी हो सकता है।
