सोनी राजदान की अनकही कहानी: कैसे महेश भट्ट से शादी ने बदल दिया उनका करियर
Why Soni Razdan stopped getting work in Bollywood
Bollywood actresses who faced career issues after marriage
बॉलीवुड में कई प्रेम कहानियाँ सुर्खियाँ बटोरती हैं, लेकिन कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जो सिर्फ दिलों को नहीं, करियर को भी गहराई से प्रभावित करते हैं। ऐसी ही एक कहानी है मशहूर फिल्ममेकर महेश भट्ट और प्रतिभाशाली अभिनेत्री सोनी राजदान की।
जहाँ एक ओर इनकी प्रेम कहानी ने खूब चर्चा बटोरी, वहीं दूसरी ओर इस रिश्ते ने सोनी के एक्टिंग करियर पर एक गहरा असर डाला — इतना गहरा कि खुद सोनी कहती हैं, “मुझे शादी के बाद काम मिलना बंद हो गया था।”
शुरुआत एक फिल्म सेट से, बदलाव पूरी ज़िंदगी में
महेश भट्ट और सोनी राजदान की पहली मुलाकात 1980 के दशक में फिल्म ‘सारांश’ के सेट पर हुई थी। उस वक्त महेश पहले से शादीशुदा थे और उनके दो बच्चे – पूजा भट्ट और राहुल भट्ट – भी थे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
1986 में, तमाम सामाजिक और निजी विवादों के बीच, महेश और सोनी ने शादी कर ली। महेश ने इस्लाम धर्म अपनाया ताकि वे बिना पहली पत्नी को तलाक दिए सोनी से निकाह कर सकें। यह फैसला जितना निजी था, उतना ही सार्वजनिक भी बन गया — और इसके प्रभाव सिर्फ निजी ज़िंदगी तक सीमित नहीं रहे।
एक चमकता करियर, जो अचानक थम गया
80 के दशक में सोनी राजदान का नाम उन अभिनेत्रियों में गिना जाता था, जो न सिर्फ खूबसूरत थीं, बल्कि अपने अभिनय से भी सबका दिल जीत रही थीं। ‘मंडी’ (1983), ‘त्रिकाल’ (1985) और ‘खामोश’ (1985) जैसी फिल्मों में उनके प्रदर्शन को खूब सराहा गया।
लेकिन शादी के बाद अचानक ही उनके पास फिल्मों के ऑफर आने बंद हो गए। हाल ही में एक इंटरव्यू में सोनी ने खुलासा किया:
“मैं बहुत गुस्से में थी। करियर के पीक पर थी, लेकिन शादी के बाद इंडस्ट्री ने मुझे इग्नोर करना शुरू कर दिया।”
उस दौर में बॉलीवुड में यह धारणा थी कि शादीशुदा अभिनेत्रियाँ अब परिवार पर ध्यान दें, ना कि फिल्मों पर।
सिर्फ ‘किसी की पत्नी’ नहीं, एक स्वतंत्र कलाकार भी
सोनी ने यह भी कहा कि शादी के बाद उन्हें अक्सर "किसी की पत्नी" या "किसी की माँ" के रूप में ही देखा गया, एक स्वतंत्र कलाकार के रूप में नहीं। यह एक बड़ा मानसिक और पेशेवर संघर्ष था।
लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। टीवी सीरियल ‘बुनियाद’ में भूमिका मिलने के बाद उनका करियर एक बार फिर पटरी पर लौटा। फिर उन्होंने ‘सच ए लॉन्ग जर्नी’ (1998), ‘राज़ी’ (2018), और ‘योर ट्रूली’ (2018) जैसी सराहनीय फिल्मों में काम किया।
आज का बॉलीवुड और एक बदला हुआ नजरिया
सोनी मानती हैं कि आज का बॉलीवुड पहले से काफी बदल चुका है। अब महिलाएँ अपनी शर्तों पर काम करती हैं, और शादी या उम्र उनकी पहचान को सीमित नहीं करती।
एक फिल्म जैसी प्रेम कहानी
महेश भट्ट और सोनी राजदान की प्रेम कहानी भी किसी बॉलीवुड स्क्रिप्ट से कम नहीं। 2023 में अपनी 37वीं शादी की सालगिरह पर, सोनी ने एक इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा:
“एक दिन अचानक एक दोस्त ने मुझे फोन किया और कहा कि वो मुझे महेश भट्ट से मिलवाना चाहता है। हम मिले, प्यार हुआ, और आज हम यहाँ हैं।”
महेश ने भी एक इंटरव्यू में कहा था कि वो सोनी के प्यार में पड़ने से डरते थे, क्योंकि उन्हें लगता था कि वो उनकी जिंदगी बर्बाद कर देंगे। सोनी का जवाब था:
“मैं बर्बाद होना चाहती हूँ।”
यह लाइन बाद में उनकी फिल्म ‘रहस्य’ में भी इस्तेमाल हुई।
एक परिवार, जो आज मिसाल बन चुका है
आज, सोनी और महेश की बेटियाँ – आलिया भट्ट और शाहीन भट्ट – अपने-अपने क्षेत्रों में नाम कमा चुकी हैं। पूजा भट्ट भी अपनी सौतेली माँ और बहनों के साथ एक मजबूत रिश्ता साझा करती हैं।
