Diabetic Foot Care Tips: डायबिटिक फुट के घाव को केवल ड्रेसिंग समझने की भूल न करें, जानें क्यों एंडोक्राइनोलॉजिस्ट से समय पर इलाज कराना है बेहद जरूरी

Diabetic Foot Care Tips: Do not mistake diabetic foot wound for just dressing, know why it is very important to get timely treatment from endocrinologist.
 
Diabetic Foot Care Tips: डायबिटिक फुट के घाव को केवल ड्रेसिंग समझने की भूल न करें, जानें क्यों एंडोक्राइनोलॉजिस्ट से समय पर इलाज कराना है बेहद जरूरी

Diabetic Foot Wound Care & Treatment: डायबिटीज (मधुमेह) के मरीजों के लिए पैरों में हुआ छोटा सा छाला, जूते की रगड़ या हल्की सी खरोंच भी बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। इसे सामान्य घाव समझकर केवल साधारण पट्टी या ड्रेसिंग के भरोसे छोड़ना कई बार पैर गंवाने का कारण बन सकता है।

पुणे के 'इनामदार मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल' के एंडोक्रिनोलॉजिस्ट व डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. सादिक मुल्ला के अनुसार, लंबे समय तक ब्लड शुगर नियंत्रित न रहने से नसों और रक्त वाहिकाओं को भारी नुकसान पहुँचता है, जिसे नज़रअंदाज़ करना भारी पड़ सकता है।

डायबिटीज में क्यों जल्दी नहीं भरते पैरों के घाव?

डायबिटीज के कारण मुख्य रूप से दो बड़ी समस्याएं पैदा होती हैं

  1. डायबिटिक न्यूरोपैथी (नसों का सुन्न होना): ब्लड शुगर बढ़ने से पैरों की तंत्रिकाएं (Nerves) कमजोर हो जाती हैं। इसके कारण दर्द, गर्मी, ठंडक या चोट का अहसास कम या पूरी तरह खत्म हो जाता है। मरीज को घाव होने का अहसास ही नहीं होता और संक्रमण अंदर ही अंदर बढ़ता रहता है।

  2. ब्लड सर्कुलेशन में कमी: शुगर के मरीजों में पैरों की धमनियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे रक्त का प्रवाह धीमा हो जाता है। खून सही मात्रा में न पहुँचने के कारण ऑक्सीजन, जरूरी पोषक तत्व और एंटीबॉडीज घाव तक नहीं पहुँच पाते, जिससे घाव भरने की गति बेहद धीमी हो जाती है।

 केवल ड्रेसिंग काफी नहीं: जानें मेडिकल जांच और सही इलाज

डॉक्टरों के अनुसार केवल रोज़ाना ड्रेसिंग करा लेना ही इसका समाधान नहीं है। डॉक्टरी जांच में निम्नलिखित बातों का आकलन किया जाता है:

  • गंभीरता की जांच: घाव की गहराई, मवाद (Pus), सूजन, लालपन और गंध का परीक्षण।

  • अडवांस्ड डायग्नोसिस: यदि संक्रमण त्वचा और मांसपेशियों से हड्डियों तक पहुँचने का खतरा हो, तो ब्लड टेस्ट, एक्स-रे, एमआरआई (MRI) या कल्चर टेस्ट कराया जाता है।

  • सर्जिकल व मेडिकल ट्रीटमेंट: घाव के मृत हिस्से (Dead Tissue) को हटाना, घाव पर दबाव कम करने के लिए विशेष फुटवियर देना, एंटीबायोटिक्स और सख्त शुगर कंट्रोल करना।

  • एंजियोप्लास्टी की जरूरत: यदि पैर में खून की सप्लाई बहुत कम हो, तो वैस्कुलर सर्जन की सलाह से एंजियोप्लास्टी कर रक्त प्रवाह सुधारा जाता है।

 चेतावनी के लक्षण (Warning Signs): कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?

यदि घाव में निम्नलिखित में से कोई भी लक्षण दिखे, तो घरेलू नुस्खों और खुद से दवा लेने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें:

  • घाव के आसपास तेजी से सूजन, लालिमा या मवाद का बढ़ना।

  • घाव से तेज बदबू आना या त्वचा का काला पड़ना (गैंग्रीन का संकेत)।

  • घाव के साथ तेज बुखार आना।

  • अचानक ब्लड शुगर का लेवल बहुत अधिक बढ़ जाना।

 डायबिटिक फुट के मामलों में शुरुआती दौर में ही सही डॉक्टर (एंडोक्राइनोलॉजिस्ट या डायबेटोलॉजिस्ट) से परामर्श लेना, ब्लड शुगर कंट्रोल में रखना और सही उपचार कराना ही गंभीर जटिलताओं और अंग कटने (Amputation) के खतरे से बचा सकता है।

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