ब्रेन कैंसर के शुरुआती संकेत जिन्हें लोग सामान्य तनाव समझने की करते हैं भूल, समय रहते पहचानना बेहद ज़रूरी
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में सिरदर्द, थकान और एकाग्रता में कमी होना आम माना जाता है। ज़्यादातर लोग इन समस्याओं को काम का दबाव या 'स्ट्रेस' मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि लगातार बने रहने वाले ये सामान्य से दिखने वाले लक्षण ब्रेन कैंसर (Brain Cancer) जैसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकते हैं?
गुरुग्राम स्थित आर्टेमिस हॉस्पिटल्स के न्यूरोसर्जरी विभाग के चेयरपर्सन डॉ. आदित्य गुप्ता के अनुसार, लोग अक्सर मानसिक तनाव और ब्रेन कैंसर के शुरुआती लक्षणों में अंतर नहीं कर पाते, जिससे सही समय पर इलाज मिलने में देरी हो जाती है।
ब्रेन कैंसर के प्रमुख शुरुआती लक्षण
डॉ. आदित्य गुप्ता बताते हैं कि यदि शरीर में नीचे दिए गए बदलाव लगातार दिख रहे हों, तो इन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए:
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सुबह के समय तेज़ सिरदर्द: यदि सुबह उठते ही सिर में भारीपन या तेज़ दर्द हो।
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उल्टी और जी मिचलाना: सिरदर्द के साथ बार-बार उल्टी होना।
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दृष्टि में बदलाव: आंखों के सामने धुंधलापन आना या दो-दो चीज़ें दिखाई देना (Double Vision)।
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शरीर में सुन्नपन या कमजोरी: शरीर के किसी एक हिस्से या हाथ-पैर में कमजोरी, सुन्नपन आना और चलने में संतुलन बिगड़ना।
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याददाश्त और भाषा में बदलाव: बातों को भूलने लगना, बोलने या शब्दों को समझने में कठिनाई होना।
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दौरे पड़ना (Seizures): अचानक मिर्गी जैसे दौरे आना।
तनाव और ब्रेन कैंसर के अंतर को कैसे समझें?
चूंकि सिरदर्द, थकान और ध्यान न लगा पाना जैसे लक्षण माइग्रेन, नींद की कमी और अत्यधिक तनाव से काफी मिलते-जुलते हैं, इसलिए लोग डॉक्टर के पास जाने से बचते हैं।
डॉक्टरों के मुताबिक, यदि सिरदर्द:
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सामान्य पेनकिलर (Over-The-Counter दवाओं) से ठीक नहीं हो रहा हो,
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समय के साथ लगातार बढ़ता जा रहा हो, और
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इसके साथ उल्टी, धुंधला दिखने जैसे लक्षण भी जुड़ रहे हों...
तो यह स्थिति चिंताजनक हो सकती है और बिना देरी किए तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट (Neurologist) से संपर्क करना चाहिए।
पैनिक न करें, लेकिन सतर्क रहें
डॉक्टर यह भी स्पष्ट करते हैं कि हर तरह का सिरदर्द या थकान कैंसर नहीं होता। अधिकांश मामलों में यह सामान्य कारणों से ही होता है। हालांकि, लंबे समय तक बने रहने वाले असामान्य लक्षणों को नज़रअंदाज़ करना जोखिम भरा हो सकता है। समय पर सही जांच और पहचान से इस गंभीर बीमारी का इलाज संभव है।
