Giloy Benefits for Health: फैटी लिवर, डेंगू और डायबिटीज में कैसे करें गिलोय का सेवन? जानें इसके औषधीय गुण और सही तरीका
Giloy Ayurvedic Benefits & Usage: आयुर्वेद में 'अमृता' और 'गुडूची' के नाम से जानी जाने वाली गिलोय (Giloy) एक ऐसी चमत्कारिक बेल है, जो सेहत के लिए वरदान मानी जाती है। कोरोना काल के बाद से गिलोय की लोकप्रियता घर-घर में बढ़ी है। आयुर्वेद के अनुसार, गिलोय ही एक ऐसी औषधि है जो शरीर के तीनों दोषों—वात, पित्त और कफ को संतुलित करने में सक्षम है।
'आशा आयुर्वेदा' की आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ. चंचल शर्मा के अनुसार, नीम के पेड़ पर चढ़ी गिलोय (नीम गिलोय) सबसे उत्तम और औषधीय गुणों से भरपूर मानी जाती है। आइए जानते हैं विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं में गिलोय का सेवन कब, कैसे और कितनी मात्रा में करना चाहिए।
गिलोय की पहचान
गिलोय एक बेलनुमा पौधा है, जिसके पत्ते पान के आकार के लेकिन उससे बड़े और गहरे हरे रंग के होते हैं। आयुर्वेद में नीम के पेड़ पर चढ़ी गिलोय को विशेष रूप से गुणकारी माना जाता है, जिसे नीम गिलोय कहा जाता है।
गिलोय के प्रमुख गुण
गिलोय में एंटीऑक्सीडेंट और सूजन कम करने वाले तत्व पाए जाते हैं। पारंपरिक आयुर्वेद में इसका उपयोग बुखार, पाचन संबंधी समस्याओं, मधुमेह, गठिया, पीलिया तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाता रहा है। हालांकि किसी भी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए इसे डॉक्टर की सलाह के बिना दवाओं के विकल्प के रूप में नहीं लेना चाहिए।
गिलोय का सेवन कैसे करें?
गिलोय का सेवन मुख्य रूप से तीन रूपों में किया जाता है—
- गिलोय सत्व
- गिलोय का रस (जूस)
- गिलोय चूर्ण
विभिन्न समस्याओं में गिलोय का उपयोग
1. पाचन संबंधी समस्याएं
कब्ज, अपच और गैस जैसी समस्याओं में रात को सोने से पहले आधा से एक चम्मच गिलोय चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लिया जा सकता है।
2. डायबिटीज
कुछ अध्ययनों और आयुर्वेदिक परंपरा के अनुसार गिलोय रक्त शर्करा नियंत्रित करने में सहायक हो सकती है। सामान्यतः 2–3 चम्मच गिलोय का रस एक कप पानी में मिलाकर सुबह लिया जाता है या आधा चम्मच गिलोय चूर्ण भोजन के लगभग 1–1.5 घंटे बाद दिन में दो बार लिया जा सकता है।यदि आप डायबिटीज की दवा या इंसुलिन लेते हैं, तो गिलोय शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें, क्योंकि इससे ब्लड शुगर अधिक कम हो सकती है।
3. डेंगू
आयुर्वेद में गिलोय को बुखार और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए उपयोगी माना जाता है। डेंगू में इसे केवल सहायक उपाय के रूप में लिया जा सकता है। डेंगू का मुख्य उपचार डॉक्टर की निगरानी, पर्याप्त तरल पदार्थ और प्लेटलेट्स सहित आवश्यक जांच पर आधारित होना चाहिए।
4. एनीमिया
पारंपरिक रूप से गिलोय का रस शहद या पानी के साथ लेने की सलाह दी जाती है। हालांकि एनीमिया का कारण जानकर आयरन, विटामिन बी12 या अन्य आवश्यक उपचार लेना अधिक महत्वपूर्ण है।
5. फैटी लिवर और लिवर स्वास्थ्य
आयुर्वेद में गिलोय को लिवर के लिए लाभकारी माना जाता है। गिलोय सत्व की थोड़ी मात्रा शहद के साथ लेने की सलाह दी जाती है। हालांकि फैटी लिवर के उपचार में संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण और चिकित्सकीय सलाह सबसे प्रभावी उपाय हैं।
किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?
- गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं बिना डॉक्टर की सलाह के गिलोय का सेवन न करें।
- ऑटोइम्यून रोग (जैसे रूमेटॉइड आर्थराइटिस, ल्यूपस आदि) से पीड़ित लोगों को चिकित्सकीय सलाह के बाद ही इसका उपयोग करना चाहिए।
- यदि आप ब्लड शुगर कम करने वाली दवाएं ले रहे हैं, तो गिलोय लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श करें।
- किसी भी हर्बल सप्लीमेंट का लंबे समय तक नियमित सेवन विशेषज्ञ की सलाह से ही करें।
गिलोय आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है और कई स्वास्थ्य समस्याओं में सहायक माना जाता है। हालांकि इसे किसी भी बीमारी के इलाज का विकल्प नहीं समझना चाहिए। यदि आपको डेंगू, डायबिटीज, फैटी लिवर या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, तो डॉक्टर की सलाह के साथ ही गिलोय या किसी भी आयुर्वेदिक औषधि का सेवन करें।
