Prostate Cancer Warning: प्रोस्टेट कैंसर की पहचान में देरी पड़ सकती है भारी, शरीर में दिखें ये लक्षण तो तुरंत हो जाएं सावधान

Prostate Cancer Warning: Delay in detecting prostate cancer can prove costly; be alert immediately if you notice these symptoms in your body.
 
Prostate Cancer Warning

भारत में पुरुषों के बीच प्रोस्टेट कैंसर के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। वर्तमान में यह भारतीय पुरुषों में पाया जाने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर बन चुका है। हालांकि, डॉक्टरों के लिए चिंता की बात सिर्फ इसके बढ़ते मामले नहीं हैं, बल्कि सबसे बड़ी चुनौती बीमारी के निदान (Diagnosis) में होने वाली देरी है।

अक्सर मरीज शुरुआती लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे कैंसर शरीर के अन्य अंगों में फैल जाता है और इलाज बेहद जटिल हो जाता है।

देर से पहचान होने पर बढ़ता है न्यूरोलॉजिकल जटिलताओं का खतरा

सर गंगा राम अस्पताल के जाने-माने यूरो-ऑन्कोलॉजिस्ट और रोबोटिक सर्जन डॉ. अश्विन मलाया के अनुसार, अब छोटे शहरों से भी प्रोस्टेट कैंसर के मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं, जो एक सकारात्मक संकेत है। लेकिन चिंता की बात यह है कि लगभग 50 प्रतिशत मरीज अब भी स्टेज 4 (अंतिम चरण) में अस्पताल पहुंचते हैं।

जब प्रोस्टेट कैंसर एडवांस स्टेज में पहुंच जाता है, तो यह प्रोस्टेट ग्रंथि से बाहर निकलकर हड्डियों और रीढ़ की हड्डी (Spine) को प्रभावित करने लगता है। इसके कारण मरीजों में गंभीर न्यूरोलॉजिकल (तांत्रिक) समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

स्पाइनल कॉर्ड कम्प्रेशन: इन खतरनाक लक्षणों को न करें नजरअंदाज

जब कैंसर रीढ़ की हड्डी पर दबाव बनाता है, तो इसे 'स्पाइनल कॉर्ड कम्प्रेशन' कहा जाता है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है। ऐसे में निम्नलिखित लक्षणों के दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए:

  • लगातार और गंभीर कमर दर्द होना।

  • पैरों में कमजोरी महसूस होना या चलने-फिरने में कठिनाई।

  • पैरों में सुन्नपन या झुनझुनी का अहसास होना।

  • पेशाब या मल (Bladder and Bowel) पर नियंत्रण खो देना।

इसके अलावा, यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय से पेशाब करने में दिक्कत आ रही हो या हड्डियों में लगातार दर्द रहता हो, तो उसे बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। विशेषकर उन पुरुषों को अधिक सतर्क रहना चाहिए, जिनके परिवार में प्रोस्टेट कैंसर का इतिहास (Family History) रहा हो।

बचाव और सही समय पर जांच के उपाय

डॉ. अश्विन मलाया का कहना है कि शुरुआती चरण में पता चलने पर प्रोस्टेट कैंसर का इलाज पूरी तरह संभव और बेहद प्रभावी होता है। इसके लिए डॉक्टरों द्वारा कुछ प्रमुख जांचें कराने की सलाह दी जाती है:

  1. PSA (Prostate-Specific Antigen) ब्लड टेस्ट: यह शुरुआती स्क्रीनिंग का सबसे आसान और महत्वपूर्ण तरीका है।

  2. मल्टी-पैरामेट्रिक एमआरआई (mpMRI): यदि पीएसए का स्तर असामान्य हो, तो इस स्कैन की मदद ली जाती है।

  3. MRI-TRUS फ्यूजन बायोप्सी: सटीक पहचान और कैंसर की स्टेज जानने के लिए यह एडवांस बायोप्सी की जाती है।

 स्टेज 4 में पहुंचने के बाद प्रोस्टेट कैंसर को नियंत्रित तो किया जा सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह जड़ से खत्म करना नामुमकिन हो जाता है। इसलिए, 50 वर्ष की उम्र के बाद (या फैमिली हिस्ट्री होने पर 45 के बाद) पुरुषों को नियमित रूप से प्रोस्टेट की जांच करानी चाहिए।

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