Silent Heart Attack: बिना सीने में दर्द के भी आ सकता है दिल का दौरा; भूलकर भी न करें इन 6 शुरुआती संकेतों को इग्नोर
जब भी 'हार्ट अटैक' (Heart Attack) का नाम आता है, तो दिमाग में सबसे पहला ख्याल सीने में उठने वाले बहुत तेज और असहनीय दर्द का आता है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों और कार्डियोलॉजिस्ट्स की मानें तो यह पूरी सच्चाई नहीं है। कई मामलों में बिना सीने में रत्ती भर दर्द हुए भी दिल का दौरा आ सकता है। इसे मेडिकल भाषा में 'साइलेंट हार्ट अटैक' (Silent Heart Attack) कहा जाता है।
सही जानकारी के अभाव में लोग इसके शुरुआती संकेतों को सामान्य गैस, कमजोरी या थकान समझकर टाल देते हैं, जो बाद में जानलेवा साबित हो जाता है।
क्यों खतरनाक है बिना दर्द वाला हार्ट अटैक?
श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट (दिल्ली) के कार्डियोलॉजी डायरेक्टर डॉ. अमर सिंघल के अनुसार, बिना सीने में दर्द के आने वाला हार्ट अटैक और भी अधिक घातक साबित होता है क्योंकि मरीज इसके लक्षणों को पहचान नहीं पाता और अस्पताल पहुंचने में देरी हो जाती है। महिलाओं, बुजुर्गों और डायबिटीज (मधुमेह) के मरीजों में हार्ट अटैक के दौरान सीने में तेज दर्द के बजाय अन्य सूक्ष्म लक्षण (Silent Symptoms) अधिक देखे जाते हैं।
सीने में दर्द के अलावा दिखाई देने वाले 6 मुख्य लक्षण
यदि आपको बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक निम्नलिखित लक्षण महसूस हों और वे कुछ मिनटों तक बने रहें, तो इन्हें तुरंत गंभीरता से लें:
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अचानक सांस फूलना (Shortness of Breath): थोड़ा सा चलने या बिना किसी भारी काम के भी अचानक सांस लेने में तकलीफ होना।
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बहुत ज्यादा थकान और कमजोरी: बिना मेहनत किए शरीर में अचानक भारी थकान और ढलान महसूस होना।
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ठंडा पसीना आना (Cold Sweats): सामान्य तापमान में भी अचानक माथे और शरीर पर ठंडा पसीना छूटने लगना।
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चक्कर आना या घबराहट: अचानक सिर घूमना, आंखों के आगे अंधेरा छाना या अकारण बेचैनी होना।
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शरीर के ऊपरी हिस्सों में दर्द या भारीपन: सीने के बजाय जबड़े (Jaw), गर्दन, पीठ, कंधों या बाएं हाथ में खिंचाव, दर्द या भारीपन महसूस होना।
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मतली या उल्टी (Nausea/Vomiting): पेट में मरोड़, मतली या ऐसा अहसास होना जैसे पेट में गैस भरी हो।
देरी पड़ सकती है भारी: 'गोल्डन आवर' का रखें ध्यान
हार्ट अटैक के दौरान समय (Time) सबसे महत्वपूर्ण कारक होता है। मरीज जितनी जल्दी अस्पताल पहुंचता है, डॉक्टरों के लिए दिल की मांसपेशियों (Heart Muscles) को स्थायी नुकसान से बचाना उतना ही आसान हो जाता है। इसलिए इन लक्षणों को एसिडिटी या सामान्य थकान समझने की भूल बिल्कुल न करें और तुरंत नजदीकी इमरजेंसी में संपर्क करें।
खानपान और जीवनशैली पर दें ध्यान
डॉक्टर्स का कहना है कि आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और जंक फूड का अत्यधिक सेवन नसों में एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल (Bad Cholesterol) के स्तर को बढ़ाता है। यह बैड कोलेस्ट्रॉल नसों के भीतर थक्के (Clots) के रूप में जमने लगता है, जिससे हृदय तक रक्त का प्रवाह बाधित होता है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, धूम्रपान से दूरी और समय-समय पर कोलेस्ट्रॉल व शुगर की जांच कराकर आप दिल की बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
