Pancham Haldi benefits in Hindi : आयुर्वेद में पंचम हल्दी क्या है? जानिए पीली, काली, सफेद, जंगली और दारुहल्दी के बारे में

What is the 'fifth' turmeric in Ayurveda? Learn about yellow, black, white, wild, and Daruhaldi (tree turmeric).
 
Pancham Haldi benefits in Hindi

Pancham Haldi: हल्दी का नाम आते ही आमतौर पर हमारे मन में पीले रंग की साधारण हल्दी की तस्वीर आती है। भारतीय परंपरा और आयुर्वेदिक साहित्य में हालांकि हरिद्रा से जुड़े कई अलग-अलग द्रव्यों का उल्लेख मिलता है। इनके नाम, वनस्पति पहचान और पारंपरिक उपयोग एक-दूसरे से अलग हो सकते हैं।

लोकप्रिय स्वास्थ्य लेखों में पीली हल्दी, काली हल्दी, सफेद या अंबा हल्दी, जंगली हल्दी और दारुहल्दी को कई बार “पंचम हल्दी” कहकर बताया जाता है। हालांकि इस नाम को आयुर्वेद की एक सर्वमान्य, निश्चित पांच-वनस्पति वाली श्रेणी मानना उचित नहीं है। अलग स्रोतों में वर्गीकरण और नाम अलग मिल सकते हैं।

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के e-Charak डेटाबेस में भी औषधीय पौधों को उनके वैज्ञानिक और प्रचलित नामों के साथ अलग-अलग दर्ज किया गया है। उदाहरण के लिए Curcuma zedoaria को कचूर के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

1. पीली हल्दी

सामान्य रसोई में इस्तेमाल होने वाली हल्दी को मुख्य रूप से Curcuma longa से जोड़ा जाता है। इसके प्रकंद का इस्तेमाल मसाले के तौर पर किया जाता है और आयुर्वेदिक परंपरा में भी इसका लंबे समय से उपयोग रहा है।हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन (Curcumin) इसके प्रमुख सक्रिय घटकों में से एक है। आधुनिक शोध में करक्यूमिन पर सूजन और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों को लेकर अध्ययन हुए हैं, लेकिन कई स्वास्थ्य दावों की पुष्टि के लिए अभी पर्याप्त उच्च गुणवत्ता वाले प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।पीली हल्दी का सामान्य भोजन में मसाले के रूप में इस्तेमाल अलग बात है, जबकि किसी बीमारी के इलाज के उद्देश्य से अधिक मात्रा में सप्लीमेंट लेना अलग विषय है।

2. काली हल्दी

काली हल्दी को आमतौर पर Curcuma caesia से जोड़ा जाता है। इसकी गांठ अंदर से गहरे नीले-काले रंग की दिखाई दे सकती है और इसका इस्तेमाल पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों तथा लोक उपचारों में अलग-अलग तरीके से किया जाता रहा है।काली हल्दी को लेकर दर्द, सूजन और अन्य स्वास्थ्य लाभों के कई पारंपरिक दावे मिलते हैं, लेकिन किसी बीमारी के इलाज के रूप में इसके प्रभाव को लेकर पर्याप्त मजबूत मानव-आधारित वैज्ञानिक प्रमाण मान लेना उचित नहीं है।इसलिए इसे औषधि के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

3. सफेद या अंबा हल्दी

सफेद हल्दी को कई जगह अंबा हल्दी भी कहा जाता है। कुछ प्रकारों की पहचान Curcuma zedoaria जैसी प्रजातियों से की जाती है, हालांकि स्थानीय नामों के कारण पहचान में भ्रम हो सकता है।पारंपरिक रूप से इसका इस्तेमाल पाचन संबंधी समस्याओं, मसाले और विभिन्न घरेलू नुस्खों में किया जाता रहा है।किसी जड़ी-बूटी का पारंपरिक उपयोग और उसका चिकित्सकीय रूप से सिद्ध प्रभाव एक ही बात नहीं है। इसलिए नियमित औषधीय सेवन शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित है।

4. जंगली हल्दी

जंगली हल्दी के नाम से विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग पौधों का उल्लेख मिलता है। कुछ स्थानों पर इसे Curcuma aromatica से जोड़ा जाता है।

इसका पारंपरिक उपयोग विशेष रूप से त्वचा संबंधी घरेलू देखभाल, उबटन और लेप आदि में बताया जाता है। लेकिन किसी भी पौधे को त्वचा पर लगाने से पहले उसकी सही पहचान और व्यक्ति की त्वचा की संवेदनशीलता को ध्यान में रखना जरूरी है।

5. दारुहल्दी

दारुहल्दी को सामान्य हल्दी से अलग वनस्पति द्रव्य माना जाता है। इसलिए इसे केवल “हल्दी की एक और किस्म” कहना पूरी तरह सही नहीं होगा।आयुर्वेदिक परंपरा में दारुहरिद्रा का अलग उल्लेख मिलता है और इसका उपयोग विभिन्न पारंपरिक तैयारियों में किया जाता है। इसकी सही वनस्पति पहचान और इस्तेमाल के लिए प्रमाणित आयुर्वेदिक स्रोत या योग्य आयुर्वेद चिकित्सक से जानकारी लेना बेहतर है।

क्या इन सभी हल्दियों का सेवन किया जा सकता है?

नहीं, किसी भी जड़ी-बूटी को केवल प्राकृतिक होने के कारण पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जाना चाहिए। अलग-अलग पौधों के सक्रिय घटक और उनके शरीर पर प्रभाव अलग हो सकते हैं।सामान्य भोजन में इस्तेमाल होने वाली हल्दी और अधिक मात्रा में लिए जाने वाले कंसंट्रेटेड करक्यूमिन/हर्बल सप्लीमेंट को भी एक जैसा नहीं समझना चाहिए। NCCIH के अनुसार करक्यूमिन उत्पादों की संरचना और शरीर में अवशोषण अलग-अलग हो सकता है तथा कुछ अधिक-बायोअवेलेबल उत्पादों से यकृत संबंधी नुकसान की रिपोर्ट भी हुई है।

हल्दी का सेवन करते समय किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए?

जो लोग नियमित रूप से दवाएं लेते हैं, उन्हें हर्बल सप्लीमेंट शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि जड़ी-बूटियां कुछ दवाओं के प्रभाव के साथ परस्पर क्रिया कर सकती हैं।गर्भावस्था के दौरान भोजन में सामान्य मात्रा से अधिक हल्दी या करक्यूमिन सप्लीमेंट लेने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना विशेष रूप से जरूरी है। NCCIH के अनुसार गर्भावस्था में सप्लीमेंट के रूप में हल्दी की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त जानकारी नहीं है।

पंचम हल्दी को लेकर सबसे जरूरी बात

पीली हल्दी, काली हल्दी, सफेद हल्दी, जंगली हल्दी और दारुहल्दी के नाम इंटरनेट पर एक साथ “पंचम हल्दी” के रूप में लोकप्रिय हो सकते हैं, लेकिन इन सभी को एक निश्चित और सर्वमान्य आयुर्वेदिक समूह मान लेना सही नहीं होगा।

इन पौधों के पारंपरिक उपयोग जरूर हैं, लेकिन पारंपरिक उपयोग को आधुनिक चिकित्सा में सिद्ध उपचार के बराबर नहीं माना जा सकता। किसी स्वास्थ्य समस्या के इलाज के लिए इन्हें दवा का विकल्प बनाने के बजाय योग्य चिकित्सक की सलाह लेना बेहतर है।

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