Boycott Turkey Campaign Impact भारत का ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद टर्की पर सख़्त संदेश: जनता ने दिखाया असली बहिष्कार का दम
'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत ने जिस तरह पाकिस्तान पर करारा वार किया, उसके बाद तुर्की ने खुलेआम पाकिस्तान का समर्थन किया। तुर्की ने न सिर्फ पाकिस्तान को ड्रोन और सैन्य हथियार मुहैया कराए, बल्कि उसकी नीतियों का समर्थन भी किया। हालांकि भारत सरकार की ओर से कोई आधिकारिक अभियान नहीं चला, लेकिन जनता ने खुद आगे बढ़कर टर्की के खिलाफ ‘Boycott Turkey’ की मुहिम शुरू कर दी।
टूरिज्म सेक्टर को लगा करारा झटका
भारतीय नागरिकों ने टर्की और पाकिस्तान समर्थक देश अज़रबैजान का टूरिज्म स्तर पर विरोध करना शुरू कर दिया। नतीजा यह हुआ कि इन देशों के लिए बुक की गई टूरिस्ट टिकटों में 60% तक गिरावट आई। साथ ही, कई पुरानी बुकिंग भी रद्द कर दी गईं। टूरिज्म के माध्यम से होने वाली विदेशी मुद्रा आय पर यह सीधा प्रहार है।
भारत-टर्की व्यापारिक संबंधों में आई दरार
Indian Brand Equity Foundation के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2023-24 में भारत और टर्की के बीच लगभग 3.78 मिलियन डॉलर का व्यापार प्रभावित हुआ है। वहीं, 2.3 बिलियन डॉलर की डील्स रद्द कर दी गई हैं। इतना ही नहीं, भारत में काम कर रही टर्किश कंपनी Celebi का कॉन्ट्रैक्ट भी रद्द कर दिया गया है, जिससे तुर्की की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है।
भारत ने पहले भी दिखाया है आर्थिक प्रभाव
यह पहला मौका नहीं है जब भारत ने किसी देश को उसकी भारत विरोधी गतिविधियों के लिए सबक सिखाया हो। कुछ समय पहले मालदीव की ओर से भारत के खिलाफ टिप्पणी के बाद भारतीयों ने वहां जाना कम कर दिया था। इसके परिणामस्वरूप लक्षद्वीप को एक नया पर्यटक गंतव्य के रूप में बढ़ावा मिला।
टर्की की अर्थव्यवस्था को लग सकता है बड़ा झटका
टर्की की जीडीपी में पर्यटन का हिस्सा लगभग 12% है और यह सेक्टर 10% रोजगार भी पैदा करता है। भारत के टूरिज्म बायकॉट से टर्की और अज़रबैजान को अनुमानित रूप से 4000 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। इसका असर आने वाले महीनों में और गहराने की संभावना है।
भारत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जब बात राष्ट्रीय सम्मान की हो, तो जनता किसी भी स्तर तक जाकर अपनी आवाज़ बुलंद कर सकती है। चाहे वो टूरिज्म हो या ट्रेड—अब भारत विरोधी गतिविधियों की कीमत चुकानी पड़ती है।
